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कविता

‘ कारवां ’ ने पटना में आयोजित किया मुशायरा सह काव्य पाठ

पटना। ‘ कारवां ‘ की ओर से पटना के गांधी संग्रहालय के सभागार में 28 अक्टूबर को ‘मुशायरा सह कवि सम्मेलन’ का आयोजन हुआ। उर्दू और हिन्दी के रचनाकारों ने उपस्थित श्रोताओं को अपनी रचनाओं के माध्यम से वर्तमान समय के सामाजिक, राजनीतिक समस्याओं के साथ पर्यावरण और निजी ज़िंदगी की कशमकश को अपने अपने अंदाज में सुनाया।

इस मुशायरे और काव्यपाठ के मुख्य अतिथि लखनऊ से आए कवि और जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कौशल किशोर थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो संतोष कुमार ने की। उन्होंने कहा कि हम लोग जो उम्र दराज है चुके हैं, उनकी भूमिका साथ रहने की है। जिम्मेदारी नौजवानों की है। सांस्कृतिक आंदोलन में भी युवा रचनाकारों की जरूरत है। उन्हें प्रोत्साहन मिलना चाहिए। प्रो संतोष कुमार ने अपने संग्रह ‘ढ़िबरी’ से कई कविताएं सुनाईं।

विमल किशोर ने अपने नये कविता संग्रह से विभिन्न जीवन संदर्भों की चार कविताएं सुनाईं। इनके शीर्षक थे – फिर खिल उठेंगे, एक मुट्ठी रेत, युद्ध के विरुद्ध, मजहबी सब्जी। ‘युद्ध के विरुद्ध ‘ में वे कहती हैं – ‘मानवता लहूलुहान है/जिन्दगी का चीरहरण हो रहा है/और हम मूक दर्शक बने देख रहे हैं/हमारा खून खौलता क्यों नहीं/यह खून पानी तो नहीं हो गया’।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कौशल किशोर ने कहा कि कार्यक्रम का महत्व इस कारण भी है कि ऐसे दौर में जब मुशायरा सह कवि सम्मेलन की परंपरा कमजोर हुई है व हिन्दी और उर्दू के बीच दूरी बढ़ी है, इस तरह के आयोजन उर्दू और हिन्दी के अदीबों को करीब लाते हैं और एकता को मजबूत करते हैं। इसके लिए कारवां की पहल की तारीफ की जानी चाहिए।

कौशल किशोर ने कई कविताओं का पाठ किया। वे हैं – कविता, बाबरी मस्जिद का होना, आग, गिरना और मैं और मेरी परछाई ‘। ‘गिरना’ में वे कहते हैं – ‘अब तो ‘गिरने’ का ही चलन है/राजधानी में पाँच मंज़िला पीजी गिरा,/यूनिवर्सिटी का हॉस्टल गिरा,/कोचिंग सेंटर गिरा,/शहर का पुल गिरा,/उड़ान भरते ही जहाज़ गिरा/गिरने को तो जैसे पूरा शहर गिर रहा है,/और जो बाक़ी बचा था,/वह किसी की आँखों का पानी बनकर गिरा।’

इस मौके पर करीब एक दर्जन कवियों और शायरों ने कविता और शायरी सुनाई । कविता पाठ करने वालों में जहां शाहंशाह आलम व राजेश दुबे जैसे वरिष्ठ कवि थे वहीं विधान गुंजन जैसे युवा कवि थे। आशफा़क आदिल ने अपनी शायरी से श्रोताओं को रूबरू कराया। वहीं जलेस के राजीव रंजन, नरेन्द्र कुमार, अविनाश अमन, सिद्धांत, मंजीत, विभा गुप्ता आदि ने अपनी कविताएं /नज़्में सुनाईं। हाल भरा था और सुनने वालों का रिस्पांस जबरदस्त था।

कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि प्रो भारती एस कुमार ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम लगातार करना आज की परिस्थिति की जरूरत है। कार्यक्रम का संचालन पुनीत पाठक ने किया। एडवोकेट कुमार अमित ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बताया भविष्य में कारवां अनेक सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों को आयोजित करेगा।

मुशायरे सह काव्यपाठ की शुरुआत प्रमोद यादव के गायन से हुई। कारवां की संयोजन समिति के ग़ालिब मुसाफिर, अमिता, डॉक्टर इमरान अहमद, अभय चौधरी, पंकज श्वेताभ और पुनीत पाठक ने आयोजन को सफल करने में सक्रिय रहे।

इस अवसर पर संजय कुन्दन, रवि रंजन, कृष्ण संबित, मनजीत साहू, अनिल अंशुमन, मीना तिवारी, संतोष आर्या, कमलेश शर्मा, एडवोकेट असफर ईमाम, मुनीर निजामी, ओसामा खुर्शीद, आकाश कुमार, प्रेम चंद सिन्हा, प्रतिमा पासवान, रेहान ग़नी, इमरान खान, गुलशन खातून समेत शहर के कई साहित्य प्रेमी व प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।

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