सिनेमा मार्गरीटा विद ए स्ट्रॉ: ज़िंदगी मुख़्तसर सी मिली थी हमें, हसरतें बेशुमार ले के चलें !आशीष कुमारAugust 4, 2020August 6, 2020 by आशीष कुमारAugust 4, 2020August 6, 202002551 यह ‘लैला'(कल्कि कोचलिन)की दुनिया है।लैला यानी ‘सेरेब्रल पॉल्सी’ की शिकार।वह शतरंज खेलती है।फेसबुक चलाती है। संगीत सुनती है। धुने बनाती है। डांस भी करती है।...
स्मृति असाधारण का वैभव और साधारण का सौंदर्य : बासु चटर्जीआशीष कुमारJune 5, 2020June 7, 2020 by आशीष कुमारJune 5, 2020June 7, 202002356 अनायास नहीं, कुछ संबंध सायास भी जुड़ते हैं । मुकम्मल याद नहीं मुझे, लेकिन पहली बार टेलीविजन पर ‘रजनीगंधा’ देखा था। उस समय तक मैं...
जनमतसिनेमा ‘ चारुलता ‘ की मार्फ़त सत्यजित राय की सिनेमाई नज़र पर कुछ गुफ़्तगूआशीष कुमारMay 6, 2020May 7, 2020 by आशीष कुमारMay 6, 2020May 7, 202003491 सत्यजित राय की ' चारुलता ' को देखना, समझना और लिखना न सिर्फ सिनेमा की बारीकियों से वाक़िफ होना है बल्कि किरदारों के अन्तर्जगत में...