समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

1300 Posts - 0 Comments
स्मृति

मास्टर साहब जो मेरे जेठ थे

समकालीन जनमत
(हम क्रांतिकारियों की छवि प्रायः लार्जर दैन लाइफ बना देते हैं। उनकी जिंदगी के छोटे-छोटे प्रसंगों, उनकी कमजोरियों या उनके बहुत सारे सहयोगियों के बारे में...
कहानी

हत्यारे न्यायाधीश

समकालीन जनमत
(एक सोसायटी के रहवासियों के माध्यम से  व्यंग्यात्मक ढंग में  यह कहानी शुरू होती है। लेकिन चोरी की एक घटना के बाद कहानी बढ़ती हुई ...
यात्रा वृतान्त

आदिवासी लोकचेतना, संस्कृति और प्रकृति का जीवंत केंद्र लुगू बुरू

समकालीन जनमत
सुरेन्द्र कुमार बेदिया झारखंड की धरती पर अनेक स्थल हैं जहाँ प्रकृति, संस्कृति और लोकचेतना का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। बोकारो जिले के...
साहित्य-संस्कृति

मनुष्यता की मुक्ति के मुकम्मल कवि हैं रमाशंकर यादव ‘ विद्रोही ’

दरभंगा। इंकलाबी जनकवि रमाशंकर यादव विद्रोही की जयंती के अवसर पर जन संस्कृति मंच तथा लोहिया चरण सिंह कॉलेज के तत्वावधान में जसम जिलाध्यक्ष डॉ. रामबाबू...
ख़बर

दलितों , गरीबों, छोटे व्यवसायियों और फुटपाथ दुकानदारों पर बुलडोजर के खिलाफ बिहार में धरना, मार्च 

समकालीन जनमत
पटना. बिहार में नई सरकार बनते ही राजधानी पटना सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में अतिक्रमण के नाम पर दलित- गरीबों एवं छोटे व्यवसायियों और...
सिनेमा

स्त्री जीवन को नियंत्रित करने वाली सामाजिक संरचनाओं की पहचान करती है लघु फ़िल्म “ओद गोहरी ”

समकालीन जनमत
लखनऊ। जन संस्कृति मंच, लखनऊ द्वारा एक दिसंबर को लघु फ़िल्म “ ओद गोहरी ” की स्क्रीनिंग एसबीएम लाइब्रेरी के सभागार में हुई। यह आयोजन...
जनमत

फुटपाथ दुकानदारों को बेदखल करने के विरोध में व्यवसायी महासंघ 3 दिसम्बर को धरना देगा

पटना। पटना शहर में फुटपाथ दुकानदारों, सर्वेक्षित वेंडरों तथा झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले गरीब परिवारों को बेदखल करने की हालिया कार्रवाईयों के विरोध में व्यवसायी...
ज़ेर-ए-बहस

जरूरत है एसआईआर 2.0 के सोशल ऑडिट की

( पूर्व-प्रशासनिक अधिकारी  और वर्तमान में ‘सिटिज़न्स कमीशन ऑन एलेक्शन्स’ के को-अर्डिनेटर एमजी देवसहयाम का यह लेख 18 नवम्बर 2025 को ‘ द हिन्दू ‘...
साहित्य-संस्कृति

“  फ़ैज़ और मुक्तिबोध हमारे दिशावाहक हैं ”

समकालीन जनमत
लखनऊ। जन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से 24 नवम्बर को एमबीए लाइब्रेरी, जगत नारायण रोड के सभागार में ‘ यादें फैज व मुक्तिबोध ‘...
स्मृति

कवि, कथाकार, संस्कृतिकर्मी अरविन्द कुमार का जाना जन सांस्कृतिक आंदोलन की बड़ी क्षति -जन संस्कृति मंच

समकालीन जनमत
‘आओ कोई ख्वाब बुने’ के रचनाकार कवि, कथाकार और संस्कृतिकर्मी अरविंद कुमार नहीं रहे। 15 नवंबर को गुरुग्राम में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह काफी...
साहित्य-संस्कृति

बिरसा मुंडा के विचारों पर चलने और उलगुलान की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प

महान क्रांतिकारी बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और झारखंड राज्य के 25वें स्थापना दिवस पर उलगुलान सभा उलगुलान के महानायक धरती आबा बिरसा मुंडा की...
दुनिया-जहान

बम से औरतें आज़ाद नहीं होती

समकालीन जनमत
दूसरे मुल्कों के आज़ादी के वादों के पीछे छुपे ख़ून, धोखे और तबाही की कहानी फ़िलीस्तीन से इराक़ और लेबनान से सीरिया की सात औरतों...
जनमत

घुटूवा गोलीकांड : पुलिस जुल्म के विरुद्ध प्रतिरोध की गाथा

समकालीन जनमत
सुरेन्द्र कुमार बेदिया झारखंड की मिट्टी सदियों से संघर्षो की गवाह रही है। यह धरती केवल खनिज संपदा, हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही...
जनमत

दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर लेखक-कलाकार संगठनों ने क्षोभ व्यक्त किया, न्याय की गारंटी करने को कहा

समकालीन जनमत
नई दिल्ली। हम देखेंगे : अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतिरोध अभियान ने देश में दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर गंभीर चिंता जाहिर करते हुए पीड़ितों को...
साहित्य-संस्कृति

अभिव्यक्ति के खतरे उठाने के आह्वान के साथ मना जसम का 40वां स्थापना दिवस

लखनऊ, 26 अक्टूबर। जन संस्कृति मंच (जसम) की लखनऊ इकाई ने संगठन का 40वां स्थापना दिवस ‘उठाने ही होंगे अभिव्यक्ति के खतरे’ के आह्वान के...
साहित्य-संस्कृति

आलोचना की सामाजिकता

जिस क्रियापद से लोचन बनता है उसी से आलोचना भी। इसका मतलब कि आलोचना के लिए देखने की शक्ति होनी चाहिए। मनुष्य की सभी ज्ञानेंद्रियों...
ज़ेर-ए-बहस

निर्यात-अर्थव्यवस्था के ढाँचे में हाशिये पर उत्तर-पूर्व

( शोधकर्ता सैंगमुआन हैंगसिंग का यह लेख  ‘ द हिन्दू ’ में 26 सितंबर को प्रकाशित हुआ है। लेखक कौटिल्य स्कूल ऑफ  पब्लिक पाॅलिसी के...
ज़ेर-ए-बहस

फासीवाद को मुँह चिढ़ाता ‘‘ एंटिफा ’’

समकालीन जनमत
( श्रीनिवासन रमानी का यह लेख ‘ द हिन्दू’ में 21 सितंबर को प्रकाशित हुआ है। समकालीन जनमत के पाठकों के लिए इसका हिंदी अनुवाद...
साहित्य-संस्कृति

हम असली मुद्दे और विरासत भूल जाएं, इसके लिए स्मृतियां मैन्युफैक्चर की जा रही हैं- प्रणय कृष्ण

समकालीन जनमत
लखनऊ, 15 सितंबर। ” देश में स्मृतियों का गृह युद्ध चल रहा है। सत्ता चाहती है कि उमर खालिद जैसे लोग, जो बरसों से जेल...
Fearlessly expressing peoples opinion