विन्सेंट वॉन गॉग के ‘आलू खाते लोग ’

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(तस्वीरनामा में हमने तेभागा आंदोलन के दौरान सोमनाथ होर द्वारा बनाया गया यादगार छापा चित्र  बंद बैठक के बारे में जाना था । सोमनाथ होर के इस चित्र पर चर्चा करते हुए हमने विन्सेंट वॉन गॉग के आलू खाते लोग ’ के साथ इसकी तुलना की थी।  तस्वीरनामा ‘  में इस बार उसी अविस्मरणीय चित्र आलू खाते लोग के बारे में , विस्तार से  संपादक )

कला इतिहास में जो विशिष्ट स्थान विन्सेंट वॉन गॉग का हैं, विन्सेंट वॉन गॉग के बनाये चित्रों में ‘आलू खाने वाले ’ उतना ही महत्वपूर्ण है. 1886 में बनाये इस चित्र को स्वयं वॉन गॉग ने अपना सबसे सफल चित्र माना था.  वॉन गॉग ने इस चित्र के विषय में कहा था कि इस चित्र के लिए जान बूझ कर उन्होंने रूखे-सूखे लोगों को ‘मॉडल’ बनाया था ताकि किसानों की जिंदगी के यथार्थ को सही-सही दिखा सकें . वे चित्र-दर्शकों को किसानों की मेहनत के बारे में परिचित करना चाहते थे, इसी उद्देश्य से उन्होंने इस चित्र को बनाया था.

चित्र में एक लालटेन की रौशनी में हम पांच लोगों को खाने की मेज़ पर बैठे देख पाते हैं. वॉन गॉग ने इस चित्र में इन आलू खाते हुए लोगों का चित्रण करते हुए यह रेखांकित किया है कि ये लोग इतने गरीब हैं कि भोजन में उबले हुए आलू और चाय

 

के अतिरिक्त कुछ और खाना इनके साध्य में नहीं है.

इस चित्र में वॉन गॉग द्वारा ‘प्रकाश’ का विशिष्ट प्रयोग न केवल चित्र में उपस्थित लोगों के चेहरों पर के भाव (चित्र 1 से 4) और शारीरिक संरचना (चित्र 5) को दिखाने के लिए ही किया है ,चित्र में पीठ किये हुए बच्ची को पृष्ठभूमि से अलग करने के लिए भी इस चित्र में एक नायाब प्रयोग किया गया है.

चित्र में , उबले हुए आलू से निकलते भाप पर पड़ती रौशनी के जरिये लगभग पारदर्शी पर्दे के मानिंद एक ऐसी पृष्ठभूमि की रचना की है जिससे वह बच्ची (चित्र 6) की छाया-आकृति (silhouette) स्पष्ट दिखती है.

चित्र में वॉन गॉग ने सीमित रंगों का प्रयोग किया है जिसके चलते चित्र एकवर्णी ( मोनोक्रोमेटिक) सा लगता है. पर बावजूद इन सीमित रंगों के चित्र में अद्भुत स्पेस का निर्माण हुआ है.  पाँचों लोगों द्वारा बनाये गए एक गोलाकार स्पेस को हम महसूस कर सकते है जिसके ऊपर एक लालटेन लटक रहा है. दूसरा स्पेस हमें लोगों की पीठ और कमरे की दीवारों के बीच दिखता है , जिसका विस्तार छत  तक है.

विन्सेंट वॉन गॉग की प्रतिभा को समझने के लिए यह शायद सबसे महत्वपूर्ण चित्र है।

विन्सेंट वॉन गॉग (1853-1890) की गिनती, पाश्चात्य चित्रकला इतिहास के प्रमुख चित्रकारों में एक ऐसे चित्रकार के रूप में होती है , जिनकी कला ने अपने और अपने बाद के समय के अनेक कलाकारों को प्रभावित किया. मात्र दस वर्षों की सक्रियता के दौरान उन्होंने दो हज़ार से ज्यादा चित्र बनाये थे जिसमें 860 तैल चित्र शामिल हैं. इनमें से अधिकतर चित्र, विन्सेंट वॉन गॉग ने अपने जीवन के अंतिम दो वर्षों में ही  बनाये थे.

रंगों का चयन और उनके प्रयोग करने की उनकी अपनी विशिष्ट शैली को  हम यूरोपीय ‘ आधुनिक चित्रकला ‘ के नींव के रूप में देख सकते हैं. यह सच है कि अपने जीवन काल में उन्हें चित्रकार के रूप में कोई भी सफलता नहीं मिली पर बीसवीं सदी के आरम्भ से ही विन्सेंट वॉन गॉग के चित्रों को व्यापक प्रसिद्धि मिली और देश विदेश के चित्रकारों को उनके चित्रों ने प्रभावित किया.

विन्सेंट वॉन गॉग ने ग्रामीण जीवन और मेहनत करते मज़दूरों-किसानों पर अनेक चित्र बनाये और इसके लिए उन्होंने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण समय इन्ही   निर्धन किसानों और कामगारों के बीच बिताया था.

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