रेतीले टिब्बों पर खड़े होकर काले बादलों की उम्मीद ओढ़ता कवि : अमित ओहलाण

कविता जब खुद आगे बढ़कर कवि का परिचय देने में सक्षम हो तो फिर उस कवि के लिए किसी परिचय की प्रस्तावना गढ़ने की ज़रुरत नहीं पड़ती. कविता की पहली पंक्ति ही यह पता दे कि कवि उस ज़मीन में जीवन रोप रहा है जहाँ उसने किसान की सहज बुद्धि और श्रम के साथ मौसम की भंगिमाओं को जाना है, वह जानता है कि बीजों की गुणवत्ता के साथ-साथ, पंक्ति से पंक्ति और पौधे से पौधे के बीच कितनी दूरी रखी जानी चाहिए, उसे ज्ञान है कि किन फसलों की बुआई…

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