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भाकपा (माले) ने आपातकाल दिवस पर ‘ लोकतंत्र आज़ादी मार्च ‘ निकाला

लखनऊ. आपातकाल दिवस पर आज भाकपा (माले) ने परिवर्तन चौक से गांधी प्रतिमा (जीपीओ) तक लोकतंत्र-आज़ादी मार्च निकाला और गांधी प्रतिमा पर आयोजित सभा के माध्यम से यह ऐलान किया कि मोदी राज में पैदा किये गए अघोषित आपातकाल जैसे हालात को बदलने और संविधान, लोकतंत्र पर हो रहे चौतरफा हमले के ख़िलाफ़ पार्टी पूरी ताक़त के साथ संघर्ष करेगी।

पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत आज सुबह 11 बजे भाकपा (माले) के जिला प्रभारी का0 रमेश सिंह सेंगर के नेतृत्व में पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने लाल झंडों, प्लेकार्ड से युक्त जुलूस परिवर्तन चौक से प्रेस क्लब, परिवार न्यायालय, लालबाग़ होकर गांधी प्रतिमा पर पहुंचा, जहाँ पर जुलूस सभा मे बदल गया।

जीपीओ पार्क में पुलिस की भारी व्यवस्था थी | वे न प्रदर्शन करने दे रहे थे और न धरना व सभा ही | काफी देर तक पुलिस के साथ जुबानी झड़प, नोकझोक चलती रही, मोदी व योगी सरकार के विरोध में नारे लगते रहे | आखिरकार पुलिस को प्रदर्शनकारिओ के तेवर देख पीछे हटना पड़ा | इस सभा को माले नेता कामरेड रमेश सिंह सेंगर, एपवा की नेता का. मीना सिंह और जसम के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष कौशल किशोर ने संबोधित किया |

सभा को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज मोदी राज में अघोषित आपातकाल चल रहा है। विरोध की हर आवाज़ को न सिर्फ कुचला जा रहा है, बल्कि राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ताओं की हत्याएं, उनकी गिरफ्तारियां करके उन्हें जेलों में ठूसा जा रहा है। देश के प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज, बर्बर राव अभी भी जेलों में हैं और आनन्द तेलतुंबड़े, गौतम नवलखा जैसे तमाम कार्यकर्ताओं को जनदबाव के चलते रिहा किया गया है। अखबार और दूरदर्शन की आज़ादी छीन ली गयी है और पत्रकारों को जेल में डाला जा रहा है तथा रवीश जैसे लोगों को धमकियां मिल रही हैं।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट, सीबीआई, आरबीआई जैसी संस्थाएं गिरफ्त में हैं। संविधान बदलने की बातें की जा रही हैं इतना ही नहीं भीड़ हत्याओं के द्वारा दलितों मुसलमानों को मारा जा रहा है। कानून और व्यवस्था चौपट है। वक्ताओं ने कहा कि हमारी पार्टी का एक एक कार्यकर्ता लोकतंत्र, संविधान और आज़ादी की रक्षा के लिए जी जान से संघर्ष करेगा।

मार्च में आइसा के शिवा रजवार, आरवाईए के नेता राजीव गुप्ता, पार्टी की राज्य कमेटी के सदस्य राधेश्याम मौर्य, मधुसूदन मगन, मंजू गौतम, रामसेवक रावत, नौमी लाल, रमेश शर्मा, नितिन राज, कमला गौतमशान्ती, मालती, डोरी लाल, आइसा के अतुल, रुस्तम कुरैशी, नि.म.यू.के समेदास, कमलेश गौतम, ओमप्रकाश, अनिल कुमार, छोटे लाल आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।

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समकालीन जनमत

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