बलात्कार और क्रूर यातना की शिकार आशिफ़ा के गुनाहगारों को कौन बचा रहा है !

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हिमांशु रविदास: आठ साल की आसिफ़ा की क्षत विक्षत लाश 17 जनवरी को मिली. बलात्कार और यातना दोनों के चिह्न उसकी मृत देह पर थे. बात है जम्मू-कश्मीर के कठुआ ज़िले की. SIT और CB ने दो SPO दीपक खजूरिया और सुरिंदर वर्मा के ख़िलाफ़ ठोस सबूत पाए. भाजपा के नेताओं के नेतृत्व में हत्यारों-बलात्कारियों के पक्ष में कई प्रदर्शन हुए.

आज कठुआ बार एसोसिएशन ने घेराव करके CB को चार्जशीट फ़ाइल नहीं करने दी. 11 अप्रैल को आरोपितों के पक्ष में कठुआ बंद का कॉल किया गया.

यह तो पुलिस का मामला है, कोई फ़ौजी होता तो राष्ट्रवाद और उबाल खाता.

जब मणिपुर में एक किशोरी मनोरमा का क्षत विक्षत शव मिला था तब मणिपुर की माँओं ने आज़ाद भारत का सबसे साहसिक प्रतिरोध प्रस्तुत किया था. वे नग्न हो गयीं थीं – ‘आओ भारतीय फ़ौज , हमारा बलात्कार करो.’

सुप्रीम कोर्ट को दलित उत्पीड़न के क़ानून में दुरुपयोग दिख गया जिसमें ग़ैर ज़मानती धारा भर लगती है यानी गिरफ़्तारी भर जितना दुरुपयोग सम्भव है. उत्तर पूर्व में AFSPA तो फ़ौज को गोली चलाने का हक़ देता है ! कोर्ट इसके दुरुपयोग की बात स्वीकार कर चुका है.

क़ुनन पुष्पोरा की महिलाओं की चीख़ें तो कभी इस मुल्क ने सुनी ही नहीं.

उधर उत्तर प्रदेश में। एक बलत्कृत बच्ची का पिता हिरासत में मारा गया है. आरोप फिर भाजपा नेता पर है.

मेरे ख़याल से ‘राष्ट्रवादी बलात्कार’ की श्रेणी बना देनी चाहिए. यही वक़्त की माँग है.

आशिफ़ा का बार बार बलात्कार एक मंदिर में हुआ. मंदिर का पुजारी ही सारे षड्यंत्र का मास्टरमाइंड था. उसे ड्रग्स के भारी डोज देकर लाचार किया गया, एक अभियुक्त ने कन्फेशन में बताया कि वह बीच बीच में तड़प कर जागती थी पर कुछ कर नहीं पाती थी.

यह कोई राह चलते किया गया अपराध नहीं था. इसके लिए बाकायदा योजना बनाकर उसे उठाया गया था. उसका एकमात्र अपराध था बाकरवाल समुदाय की होना. यह एक घुमंतू मुस्लिम समुदाय है , अभियुक्त इस समुदाय को सबक सिखाकर रसाना/रासना गाँव से भगाना चाहते थे.

आशिफ़ा की देह पर अनगिनत नोच खसोट, बिजली के झटके, योनि पर घाव आदि के निशान थे. कई दिन तक उसने ये यातनाएं सहीं. अंत में गला घोट कर और सर को एक पत्थर से कुचल कर उसे ख़त्म किया गया.
बलात्कारी एसपीओ खजूरिया ने अपने दो साथी पुलिसवालों को रिश्वत दी जिन्होंने फोरेंसिक विभाग को देने से पहले आशिफ़ा के कपडे धो दिए. इन दोनों के खिलाफ़ सबूत मिटाने की धाराएं लगाई गयी हैं.

‘हिन्दू एकता मंच’ ने आरोपितों के पक्ष में अनेक जुलूस निकाले, इसमें बीजेपी-पीडीपी सरकार के दो मंत्री और भाजपा नेता लाल सिंह चौधरी और चंद्रप्रकाश गंगा नेतृत्त्वकारी भूमिका में थे. उनका कहना था कि अभियुक्तों से दबाव में बयान लिए गए हैं हालांकि जम्मू-कश्मीर पुलिस का कहना है कि मौका ए वारदात से सभी अभियुक्तों की बातों को पुख्ता करने वाले कई सबूत मिल चुके हैं.

बार एसोसियेशन, कठुआ ने हिन्दू एकता मंच के सुर में सुर मिलाते हुए बीते कल चार्जशीट फ़ाइल न होने देने के लिए घेराव किया और आनेवाले कल यानी 11 अप्रैल को कठुआ बंद का आह्वान किया है. उनकी विज्ञप्ति में वे कहीं भी इस मामले को बलात्कार का मामला नहीं लिखते, ‘रासना मामला’ लिखते हैं. एसोसियेशन की अन्य मांगों में जम्मू में अवैध रूप से रह रहे इन लोगों के खिलाफ कार्रर्वाई की भी मांग है. यदि हम एक बारगी मान भी लें कि अभियुक्त निर्दोष हैं और उन्हें बचाने के लिए ये सारे वकील प्रदर्शन कर रहे तो भी – एक नाबालिग बच्ची मारी गयी, वह उनके लिए ज़िक्र का भी विषय नहीं है जिनसे हम ये उम्मीद करते हैं कि वे न्याय की लड़ाई हमारी ओर से लड़ेंगे. उलटे घुसपैठ का उल्लेख कर मानो वे इस वारदात को जायज़ ठहरा रहे हैं.

वैसे अगर वो निर्दोष हैं तो वकीलों को अपनी वकालत पर भरोसा रखना चाहिए और अदालत में उन्हें निर्दोष साबित करना चाहिए. चार्जशीट दाखिल न होने देना और आशिफ़ा के वकील को धमकाना या बहिष्कार की धमकी देना ये साबित करता है कि ये वकालत में नहीं मूलतः गुंडई में यकीन करने वाले लोग हैं.

अब आख़िरी बात, ‘हिन्दू एकता मंच’ के लोग जब अभियुक्तों के पक्ष में जुलूस निकाल रहे थे तो उनके हाथ में तिरंगा था. ठीक वैसे, जैसे कंधमाल में नन्स के साथ बलात्कार करते हुए लोग नारा लगा रहे थे – “भारत माता की जय !”

 

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