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यह चुनाव तानाशाही बनाम लोकतंत्र का है, बिहार भाजपा के घमंड को तोड़ेगा : दीपंकर भट्टाचार्य

दीघा से महागठबंधन समर्थित माले प्रत्याशी के पक्ष में नागरिक सम्मेलन

पटना। दीघा विधानसभा से महागठबंधन समर्थित भाकपा-माले प्रत्याशी शशि यादव के पक्ष में आज पटना के मां गायत्री आईटीआई, (गेट नंबर 73 के सामने) कुर्जी मेन रोड पटना में नागरिक सम्मेलन का आयोजन हुआ. सम्मेलन में माले कार्यकर्ताओं के साथ-साथ राजद, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआईएम के जिला अध्यक्षों/सचिवों के अलावा बड़ी संख्या में शहर के बुद्धिजीवियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और दीघा विधानसभा से इस बार भाजपा-जदयू को खदेड़ बाहर करने तथा काॅ. शशि यादव को भारी मतों से विजयी बनाने का संकल्प लिया.

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माले महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य शामिल हुए. उनके अलावा माले के वरिष्ठ नेता केडी यादव, दीघा से महागठबंधन समर्थित माले प्रत्याशी शशि यादव, अमर, अभ्युदय, ऐक्टू नेता रणविजय कुमार, महासंघ गोपगुट के सम्मानित अध्यक्ष रामबलि प्रसाद, ऐपवा की पटना जिला सचिव अनीता सिन्हा; राष्ट्रीय जनता दल के पटना जिला अध्यक्ष देवमुनि सिंह यादव, कांग्रेस पटना महानगर के अध्यक्ष शशि रंजन यादव, भाकपा राष्ट्रीय परिषद की सदस्य निवेदिता झा, भाकपा (मा) के जिला सचिव मनोज चंद्रवंशी, शिक्षाविद् व सामाजिक कार्यकर्ता गालिब, भोजन अधिकार अभियान के रूपेश, सामाजिक कार्यकर्ता सरफराज, वाटर ऐक्टिविस्ट रंजीव, सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रकांता खान व अशरफी सदा, कर्मचारी महासंघ के महासचिव प्रेमचंद सिन्हा, किसान महासभा के नेता उमेश सिंह, इनौस के बिहार राज्य सचिव सुधीर कुमार, संजय यादव, अनय मेहता, राखी मेहता, इनौस के पटना संयोजक विनय, बिहार घरेलू कामगार यूनियन की असरीता, पन्नालाल सिंह, मुर्तजा अली आदि नेता-कार्यकर्ता शामिल हुए.

सम्मेलन को संबोधित करते हुए माले महासचिव ने कहा कि नीतीश कुमार के अनुभव पर बहुत बात होती है. लेकिन सवाल यह है कि उनके अनुभव से बिहार मिला क्या ? उन्होंने केवल अपनी कुर्सी बचाने का काम किया. हमने देखा कि 2015 में महागठबंधन में शामिल होकर मुख्यमंत्री की कुर्सी उन्होंने फिर से हासिल की और उसके बाद भाजपा के खिलाफ मिले जनादेश के साथ विश्वासघात करते हुए उसी भाजपा से हाथ मिला लिया. इससे बड़ा विश्वासघात क्या होगा ?

आज सुशील मोदी कह रहे हैं कि 2020 का जनादेश कुछ भी हो, हम सरकार बना लेंगे. भाजपा के इस घमंड को तोड़ देना है. यह दिखला देना है कि बिहार तानाशाही को कभी स्वीकार नहीं करेगा. यह चुनाव तानाशाही बनाम लोकतंत्र का है. विगत 15 सालों में बिहार ने इसी तानाशाही को झेला है और अब वह इसे बर्दाश्त नहीं करेगा.

चुनाव में मास्क का इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन भाजपा अपना मास्क उतार चुकी है. वाजपेयी का मास्क उतरा तो मोदी सामने आए. अब योगी का यूपी माॅडल सामने आ गया है. यदि भाजपा चुनाव जीत जाती है तो वे वही माॅडल बिहार में भी लागू करेंगे. मतलब दलितों-अकलियतों-गरीबों के खिलाफ दमन का राज बनाना चाहती है. वह प्रचारित करेगी कि बिहार ने कोरोना व लाॅकडाउन की असफलता पर मुहर लगा दी. प्रवासी मजदूरों का आंकड़ा तक सरकार के पास नहीं है लेकिन हल्ला करेंगे कि यह सब मुद्दा ही नहीं है. बिहार लोकतंत्र के पक्ष में रहा है और आने वाले चुनाव में वह इसे साबित कर देगा.

राजद के जिला अध्यक्ष ने कहा कि पटना की सभी सीटों पर महागठबंधन के उम्मीदवार मजबूती से लड़ेंगे और भाजपा को पटना शहर से खदेड़ बाहर करेंगे. उन्होंने कहा कि राजद के एक-एक कार्यकर्ता शशि यादव के प्रचार अभियान में उतरेंगे.

निवेदिता झा ने कहा कि शशि यादव महिला आंदोलन की मुखर आवाज हैं और इसे विधानसभा में पहुंचना चाहिए.

कार्यक्रम का संचालन ऐक्टू नेता जितेन्द्र यादव ने किया.

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