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दस संगठनों ने दलित चिंतक दारापुरी, लेखक डॉ रामू सिद्धार्थ व दलित कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी की निंदा की

लखनऊ। दस संगठनों ने गोरखपुर में दलित चिंतक एस आर दारापुरी, लेखक-पत्रकार डॉ रामू सिद्धार्थ सहित कई लोगों कि गिरफ़्तारी की निंदा करते हुए सभी को तत्काल रिहा करने और उन पर लगे आरोपों को वापस लेने कि मांग की है।

बयान जारी करने वाले संगठनों में पूर्व कुलपति रूपरेखा वर्मा (साझी दुनिया),  मधू गर्ग (ऐडवा), आशा मिश्रा (महिला फेडरेशन), मीना सिंह (ऐपवा) के अलावा जन संस्कृति मंच, जनवादी लेखक संघ, प्रगतिशील लेखक संघ, डाक्टर राही मासूम रज़ा साहित्य अकादमी, हिंदुस्तानी साहित्य सभा, इप्टा शामिल हैं।

बयान में गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ एकजुटता वीकत करते हुए कहा गया है कि गोरखपुर में 10 अक्टूबर को सरकार से गरीब और भूमिहीन जनता, विशेषतः दलितों को एक-एक एकड़ जमीन देने कि मांग करते हुए अंबेडकर जन मोर्चा द्वारा शांतिपूर्वक धरना दिया गया था जिसे प्रसिद्ध दलित चिंतक श्री दारापुरी के अलावा अन्य कई दलित मोर्चे के साथियों ने सम्बोधित किया था। धरने के दौरान किसी तरह की अशांति या हिंसा नहीं हुई। फिर भी अगले दिन एस आर दरपुरी सहित कई कार्यकर्ताओं व पत्रकारों पर गंभीर अपराध की धारायें लगा कर उन्हें निरुद्ध कर दिया गया और जेल भेज दिया गया।

जेल भेजे गये लोगों में एस आर दारापुरी के अलावा अंबेडकर जन मोर्चा के संयोजक श्रवण कुमार निराला, पत्रकार डॉ रामू सिद्धार्थ शामिल हैं। फ़्रांस से आये एक विद्यार्थी भी निशाने पर है जो, संभवतः, अपने शोध के संदर्भ में आया हुआ था।
गरीबों और मुफलिसों की हिमायत करना देश में कब से जुर्म हो गया, ये हमारी समझ में नहीं आता। कार्यक्रम शांतिपूर्वक समाप्त हो जाने के बाद सभी वापिस जा चुके थे और अगले दिन ये कार्यवाही होना शासन के इरादों पर संदेह करने को मजबूर करता है। गिरफ्तार हुये लोग दलितों और गरीबों के लिये लगातार आवाज़ उठाते रहे हैं और जनता की समस्याओं पर सजग रहे हैं। दारापुरी जी समान नागरिकता और दलित समुदाय की समस्याओं पर काम करते रहे हैं। वे ख़ुद बड़े पुलिस अधिकारी रह चुके हैं और कानून की अच्छी जानकारी रखते हैं। वे और अन्य प्रताड़ित कार्यकर्ता अपनी संवेदना और साहस के लिये जाने जाते हैं। हम सब सरकार से मांग करते हैं कि इन सभी विचारकों व कार्यकर्ताओं पर लगाये गये आरोपों को तुरंत वापिस ले और उन्हें रिहा करे।

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