समकालीन जनमत

Tag : विजय राही

कविता

लोक से उपजी कविताओं का संग्रह ‘ दूर से दिख जाती है बारिश ’

समकालीन जनमत
आलोक मिश्र   इस साल प्रकाशित हुए नए कविता संग्रहों में से जिन-जिन को पढ़ पाया उनमें ‘दूर से दिख जाती है बारिश’ अपनी तासीर...
कविता

नीरज की कविताएँ समकालीन जटिलताओं की पुख़्ता शिनाख़्त हैं

समकालीन जनमत
विजय राही समकाल को समझे बिना कविता को समझना दुष्कर है। कोई भी कवि समय सापेक्ष परिस्थितियों को उजागर करता हुआ आगे बढ़ता है या...
कविता

विजय राही की कविताएँ वर्तमान के साथ अंतःक्रिया करती हैं

समकालीन जनमत
अलोक रंजन  एक कवि का विस्तार असीमित होता है और यदि कवि अपने उस विस्तार का सक्षम उपयोग करते हुए अपनी आंतरिक व्याकुलता को समय...
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