जनमतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति साहित्य का उद्देश्य: प्रेमचंदसमकालीन जनमतJuly 26, 2019July 26, 2019 by समकालीन जनमतJuly 26, 2019July 26, 2019012929 [1936 में प्रगतिशील लेखक संघ के प्रथम अधिवेशन लखनऊ में प्रेमचंद द्वारा दिया गया अध्यक्षीय भाषण] यह सम्मेलन हमारे साहित्य के इतिहास में स्मरणीय घटना है।...
जनमतस्मृति प्रेमचंद के फटे जूते: हरिशंकर परसाईसमकालीन जनमतJuly 25, 2019July 26, 2019 by समकालीन जनमतJuly 25, 2019July 26, 201905483 प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फोटो खिंचा रहे हैं। सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने...
जनमतज़ेर-ए-बहसस्मृति प्रेमचंद साहित्य में दलित विमर्श: प्रो. चमनलालसमकालीन जनमतJuly 25, 2019July 27, 2019 by समकालीन जनमतJuly 25, 2019July 27, 201909613 प्रो. चमनलाल प्रेमचंद के दलित विमर्श को लेकर हिन्दी लेखकों में काफी विवाद है। प्रेमचंद के जीवनकाल के दौरान भी उनके साहित्य को लेकर विवाद...
साहित्य-संस्कृति किसान के क्रमिक दरिद्रीकरण की शोक गाथा है ‘गोदान’गोपाल प्रधानJuly 25, 2019December 9, 2019 by गोपाल प्रधानJuly 25, 2019December 9, 201913570 सन 1935 में लिखे होने के बावजूद प्रेमचंद के उपन्यास ‘गोदान’ को पढ़ते हुए आज भी लगता है जैसे इसी समय के ग्रामीण जीवन की...
जनमतशख्सियतसाहित्य-संस्कृतिस्मृति ‘सांप्रदायिकता और संस्कृति’ : प्रेमचंद (प्रेमचंद पर शृंखला की शुरुआत)समकालीन जनमतJuly 25, 2019July 25, 2019 by समकालीन जनमतJuly 25, 2019July 25, 201903176 31 जुलाई को कथाकार प्रेमचंद का जन्मदिन है। समकालीन जनमत अपने पाठकों के लिए आज से 31 जुलाई तक प्रेमचंद पर एक विशेष शृंखला की शुरुआत...