ज़ेर-ए-बहस फासीवाद को मुँह चिढ़ाता ‘‘ एंटिफा ’’समकालीन जनमतSeptember 25, 2025September 26, 2025 by समकालीन जनमतSeptember 25, 2025September 26, 2025080 ( श्रीनिवासन रमानी का यह लेख ‘ द हिन्दू’ में 21 सितंबर को प्रकाशित हुआ है। समकालीन जनमत के पाठकों के लिए इसका हिंदी अनुवाद...
ज़ेर-ए-बहस भारत में फ़ासीवाद की शिनाख्त: अगर अब नहीं, तो कब ?दीपंकर भट्टाचार्यMarch 4, 2025March 4, 2025 by दीपंकर भट्टाचार्यMarch 4, 2025March 4, 20250102 सीपीआई(एम) के आगामी 24वें कांग्रेस से पहले पार्टी की पोलित ब्यूरो द्वारा जारी एक आंतरिक नोट, जिसे मीडिया में प्रमुखता से रिपोर्ट किया गया है,...
साहित्य-संस्कृति भारतीय फासीवाद के मूल में सांस्कृतिक पर्यावरण पर वर्णाश्रम के संस्कारों का प्रभुत्व कायम करनासमकालीन जनमतFebruary 27, 2023February 27, 2023 by समकालीन जनमतFebruary 27, 2023February 27, 20230288 लखनऊ। जन संस्कृति मंच लखनऊ के वार्षिक आयोजन के तहत पहले सत्र में अनिल सिन्हा स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 25 फरवरी...
ख़बरपुस्तक फ़ासीवाद से लड़ाईगोपाल प्रधानJanuary 22, 2020January 21, 2020 by गोपाल प्रधानJanuary 22, 2020January 21, 202002167 (इस किताब को पढ़ते हुए लगातार महसूस होता रहा कि बात किसी अन्य देश की नहीं, अपने ही प्यारे भारत की हो रही है ।...
ख़बर फासीवाद के खिलाफ मजबूत वाम एकता आज की जरूरत : दीपंकर भट्टाचार्यसमकालीन जनमतJuly 25, 2018 by समकालीन जनमतJuly 25, 201802799 “ त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में जनतंत्र की हत्या बंद करो ” नारे के साथ 24 जुलाई को दिल्ली के संसद मार्ग पर पांच प्रमुख...
जनमत फासीवाद के खिलाफ संघर्ष में मार्क्स के विचार से बेहतर विचार नहीं- दीपंकर भट्टाचार्यसमकालीन जनमतJuly 23, 2018July 23, 2018 by समकालीन जनमतJuly 23, 2018July 23, 20184 2574 क्रोनी पूंजीवाद, सांप्रदायिक विभाजन और मनुवादी के बीच गठजोड़ है. लिचिंग स्थाई परिघटना बना दी गई है. लिचिंग करने वालों को पता है कि उन्हें...
जनमत फासीवाद का परीक्षण पूरे सवाब पर हैसमकालीन जनमतJuly 17, 2018 by समकालीन जनमतJuly 17, 201802756 "अभी पूरी दुनिया में क्या चल रहा है इसे समझने के लिए हमें दो चीजों पर गौर करने की जरूरत है। पहला यह है कि...
जनमत हिटलर और फ़ासीवाद का नया उभारगोपाल प्रधानMay 31, 2018May 31, 2018 by गोपाल प्रधानMay 31, 2018May 31, 20183 2174 सोवियत संघ के पतन और विश्व अर्थतंत्र में आए बदलावों के चलते तेजी से उभरी नवफ़ासीवादी सक्रियता फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय राजनीति की सबसे खतरनाक प्रवृत्ति बन...