कविता सत्यपाल सहगल की कविताओं में निसर्ग और सर्ग के बीच धड़कता हुआ जीवन हैसमकालीन जनमतJanuary 4, 2026January 5, 2026 by समकालीन जनमतJanuary 4, 2026January 5, 20260726 अरुण आदित्य सत्यपाल सहगल की कविताएँ सहज में सुंदर की अनुभूति की कविताएँ हैं। इन कविताओं में निसर्ग और सर्ग के बीच धड़कता हुआ जीवन...
कविता सुरेश जिनागल की कविताएँ वंचना और उत्पीड़न के विरुद्ध प्रतिरोध की चिनगारी की तरह हैंसमकालीन जनमतOctober 12, 2025October 12, 2025 by समकालीन जनमतOctober 12, 2025October 12, 20250320 अरुण आदित्य सुरेश जिनागल गहन मानवीय संवेदना और सामाजिक सरोकारों वाले कवि हैं। उनकी ये कविताएँ वंचना और उत्पीड़न के विरुद्ध प्रतिरोध की चिनगारी की...
कविता लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता की कविताएँ देशकाल की पड़ताल और प्रतिगामी शक्तियों की शिनाख़्त करती हैं।समकालीन जनमतJanuary 19, 2025January 19, 2025 by समकालीन जनमतJanuary 19, 2025January 19, 20250462 अरुण आदित्य लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता की कविता देशकाल की पड़ताल और प्रतिगामी शक्तियों के प्रतिरोध की कविता है। यहाँ हाशिए के लोग हैं, उनका श्रम...
कविता संजय कुंदन की कविताएँ स्थगित प्रश्नकाल में ख़तरनाक सवाल की उपस्थिति हैं।उमा रागOctober 27, 2024October 27, 2024 by उमा रागOctober 27, 2024October 27, 20240196 अरुण आदित्य संजय कुंदन की कविताओं में गूंजती विविध आवाजों को सुनें तो लगता है कि शास्त्रीयता के बोझ से मुक्त यह कविता दरअसल कविता...
कविता अरुण आदित्य वक्र उक्ति के सहज कवि हैंसमकालीन जनमतJanuary 8, 2023January 8, 2023 by समकालीन जनमतJanuary 8, 2023January 8, 20230147 बोधिसत्व कवि अरुण आदित्य की कविता हिंदी में कहाँ उपस्थित है इस बात का आकलन इन पंद्रह कविताओं से नहीं किया जा सकता। वे स्थापित...