कविता लोक से उपजी कविताओं का संग्रह ‘ दूर से दिख जाती है बारिश ’समकालीन जनमतJuly 10, 2026July 10, 2026 by समकालीन जनमतJuly 10, 2026July 10, 20260141 आलोक मिश्र इस साल प्रकाशित हुए नए कविता संग्रहों में से जिन-जिन को पढ़ पाया उनमें ‘दूर से दिख जाती है बारिश’ अपनी तासीर...
कविता नीरज की कविताएँ समकालीन जटिलताओं की पुख़्ता शिनाख़्त हैंसमकालीन जनमतJune 1, 2025June 1, 2025 by समकालीन जनमतJune 1, 2025June 1, 20250340 विजय राही समकाल को समझे बिना कविता को समझना दुष्कर है। कोई भी कवि समय सापेक्ष परिस्थितियों को उजागर करता हुआ आगे बढ़ता है या...
कविता विजय राही की कविताएँ वर्तमान के साथ अंतःक्रिया करती हैंसमकालीन जनमतAugust 11, 2019August 17, 2019 by समकालीन जनमतAugust 11, 2019August 17, 201903814 अलोक रंजन एक कवि का विस्तार असीमित होता है और यदि कवि अपने उस विस्तार का सक्षम उपयोग करते हुए अपनी आंतरिक व्याकुलता को समय...