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नियोजित शिक्षक द्वारा आत्महत्या दुर्भाग्यपूर्ण, बिहार सरकार जिम्मेवार : माले

समान वेतन लागू नहीं होने से निराश भौतिक विज्ञान के शिक्षक विमल कुमार यादव ने की आत्महत्या.

शिक्षक व शिक्षा विरोधी है भाजपा-जदयू की सरकार.

 पटना. भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिहार के नियोजित शिक्षकों के लिए समान काम के लिए समान वेतन की मांग को खारिज कर दिए जाने के बाद भागलपुर जिले के रन्नुचक उच्च विद्यालय में भौतिक विज्ञान के शिक्षक विमल कुमार यादव द्वारा की गई आत्महत्या को बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

माले सचिव कुणाल ने कहा कि नियोजित शिक्षक अपनी जायज मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत हैं, पटना उच्च न्यायालय में उन्होंने जीत भी दर्ज कर ली थी, लेकिन उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई. सुप्रीम कोर्ट में उसने तर्क दिया कि रेग्युलर व नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति अलग-अलग तरीके से हुई है. नियोजित शिक्षकों को समान वेतन देना संभव नहीं है. दुर्भाग्य यह कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस दलील को स्वीकार कर ली और शिक्षकों के कानूनी हक का गला घोट दिया. इसी से निराश होकर विमल कुमार यादव ने आत्महत्या कर ली है. सरकार व न्यायालय द्वारा शिक्षकों केे हकों की हकमारी का नतीजा है कि आज विमल कुमार यादव जैसे शिक्षक आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो रहे हैं.

उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी व बिहार की नीतीश सरकार की असलियत पूरी तरह खुलकर सामने आ गई है. ये सरकारें घोर शिक्षा व शिक्षक विरोधी हैं. यह न्यायालयों की भी विडंबना है कि उसने कई बार खुद कहा है कि समान काम के लिए समान वेतन दिया जाना सरकारों की संवैधानिक जवाबदेही है, लेकिन आज वह इसके उलट फैसले दे रही है.

भाजपा-जदयू की सरकार ठेका आधारित रोजगार की ही नीति को चलाते रहना चाहती है, ताकि वह कई अन्य जवाबदेहियों से बच सके. हमारी पार्टी समान काम के लिए समान वेतन के प्रति प्रतिबद्ध है और शिक्षक समुदाय से आग्रह करती है कि हो रहे चुनाव में ऐसी शिक्षक व रोजगार विरेाधी सरकार को सबक सिखाएं. साथ ही, विमल कुमार यादव के परिवार के साथ दुख की इस घड़ी में पूरी तरह से खड़ी है. पार्टी ने शिक्षक समुदाय से यह भी निवेदन किया है कि इस मुश्किल समय में अपना धैर्य बनाएं रखें. लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है.

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