Wednesday, May 18, 2022
Homeविज्ञानग्लोबल वार्मिंग से बढ़ रही हैं महासागरीय धाराओं की गति

ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ रही हैं महासागरीय धाराओं की गति

संदीपन तालुकदार


महासागरीय धाराओं का परितंत्र समुद्रों में ऊष्मा और पोषक तत्वों का वितरण करता है। इसका मौसम पर भी बड़ा प्रभाव होता है। इन धाराओं की बढ़ती गति के नतीज़े गंभीर हो सकते हैं।

बहुविषयक विज्ञान जर्नल ”साइंस एडवांस” में प्रकाशित एक पेपर के मुताबिक़, महासागरीय परिसंचार तंत्र (Ocean Circulatory System) की गति में तेजी आ रही है। ”डीप रिसर्चिंग एक्सलरेशन ऑफ ग्लोबल मीन ओसिअन सर्कुलेशन ओवर द पास्ट टू डिकेड” नाम के इस पेपर को पांच फरवरी को प्रकाशित किया गया है। इसमें महासागरीय धाराओं (Ocean Current) की बढ़ती गति पर काम है। पिछले 25 सालों में महासागरीय धाराओं में लगातार तेजी आई है, जिसकी वजह बढ़ता ग्लोबल वार्मिंग बताई जा रही है।

समुद्र में विशाल महासागरीय धाराओं को जोड़ने वाला एक तंत्र है, जिसे ”ग्रेट ओसियन कंवेयर बेल्ट” के नाम से जाना जाता है। यह बेल्ट दुनिया के सभी समुद्रों के पानी को आपस में जोड़ती है। समुद्रों का यह पानी गोल-गोल गतिज होता है। मतलब, अगर कोई आदमी अटलांटिक सागर में कूदता है, तो वो सभी महासागरों के पानी में घूमते हुए, वापस अटलांटिक में पहुंच जाएगा। यह तंत्र ऊष्मा और पोषक तत्वों का वितरण करता है। इसका दुनिया के मौसम पर भी बहुत प्रभाव होता है। इस तंत्र के ज़रिए कटिबंधीय क्षेत्रों से ध्रुवीय क्षेत्रों में गर्म पानी पहुंचता है और वहां से ठंडा पानी वापस ऊष्ण इलाकों में वापस आता है।

इस अध्ययन का नेतृत्व चाइनीज़ एकेडमी ऑफ साइंस से जुड़े शोधार्थी शिजान हू ने किया है। उनके साथ ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और चीन के दूसरे लोग भी शामिल थे। इन शोधार्थियों ने अपने अध्ययन के लिए ”आर्गो फ्लोट्स” और दूसरे डाटा उपकरणों का इस्तेमाल किया।

अध्ययन के मुताबिक़, 1990 से 2013 के बीच महासागरीय धाराओं की ऊर्जा करीब ”15 फ़ीसदी प्रति दशक” के हिसाब से बढ़ी है। अगर आंकड़ों का यह अंदाजा सही है, तो इसके बहुत ख़तरनाक प्रभाव होंगे। इससे ”जेट स्ट्रीम”, मौसम प्रवृत्तियां प्रभावित हो सकती हैं। यहां तक कि सागरों की गहराईयों में संरक्षित ऊष्मा की मात्रा पर भी असर पड़ सकता है।

शोधार्थियों के मुताबिक़ अगर ऊपरी दो हजार मीटर को अध्ययन के लिए लिया शामिल किया जाए, तो इसका मतलब होगा कि समुद्रों के 76 फ़ीसदी हिस्से की गति बढ़ रही है। यह गति कटिबंधीय सागरों, खासकर प्रशांत महासागर में सबसे ज्यादा है।प्राथमिक तौर पर इसके लिए  पवनों की गति में हर दशक में हो रहा दो फ़ीसदी इज़ाफा जिम्मेदार है। इससे 2000-3000 मीटर तक की महासागरीय धाराओं की गति तेज हुई है। शोधार्थियों के मुताबिक़ पवन की गति में प्रति दशक दो फ़ीसदी का इज़ाफा, महासागरीय धाराओं की गति में पांच फ़ीसदी प्रति दशक तक बढ़ोत्तरी कर रहा है।

जब ग्लोबल वार्मिंग अपने चरम बिंदु पर पहुंचती है तो पवनों की गति बढ़ती है। ऐसा माना गया था कि यह समय इस शताब्दी के आखिर में आएगा।  लेकिन शोधार्थियों ने लिखा, ” पूरे वैश्विक परिसंचरण तंत्र की गति में 20 वीं शताब्दी के आखिरी दशक से काफी तेजी आई है।” अध्ययनों से पता चलता है कि वैज्ञानिक समुदाय जितना समझ पाया है, पृथ्वी, मौसम परिवर्तन से उससे कहीं ज्यादा संवेदनशील है।

वैज्ञानिक अभी तक यह साफ नहीं कर सके हैं कि महासागरीय धाराओं में आए इस बदलाव से क्या प्रभाव पड़ेगा। लेकिन इस उभार का महाद्वीपों के पूर्वी तट पर प्रभाव पड़ सकता है, जहां महासागरीय धाराएं ताकतवर हैं। कुछ मामलों में महासागरीय धाराओं की बढ़ती गति से समुद्रों के हॉट-स्पॉट्स को नुकसान पहुंच सकता है। हॉट-स्पॉट्स, वह जगह होती हैं, जहां जैव-विविधता बड़े स्तर पर विविध होती है। मतलब, हॉट-स्पॉट्स को नुकसान पहुंचने से इस इलाके के समुद्री जीवों का खात्मा हो सकता है।

शोधार्थी यह बात भी निश्चित्ता से नहीं कह सकते कि महासागरीय धाराओं में आया परिवर्तन ग्रीनहाऊस गैस और उससे जुड़ी ग्लोबल वार्मिंग की वजह से लक्षित हुआ है। लेकिन उनका साफ कहना है कि जो बदलाव आए हैं, वो महासागरीय धाराओं की गति में होने वाले प्राकृतिक बदलावों से कहीं तेज हैं। महासागरीय धाराओं में आया परिवर्तन ही अकेला नहीं है, हाल में महासागरों में बड़े स्तर के कई दूसरे बदलाव भी देखे गए हैं।

( न्यूज क्लिक से साभार ।)

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments