निराला की कविताएँ अपने समय के अंधेरे को पहचानने में हमारी मदद करती हैं: प्रो. विजय बहादुर सिंह

जनमत फील्ड रिपोर्टिंग शख्सियत स्मृति

विवेक निराला 

 

निराला की 57 वीं पुण्यतिथि पर आयोजित ‘छायावाद और निराला :कुछ पुनर्विचार’ विषय पर ‘निराला के निमित्त’ की ओर से आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रसिद्ध आलोचक प्रो. विजय बहादुर सिंह ने छायावाद की प्रासंगिकता पर कई प्रश्नों के साथ विचार करने का प्रस्ताव रखा।

उन्होंने रेखांकित किया कि छायावाद आधुनिक भारत का सांस्कृतिक स्वप्न है। ‘अस्मिता की तलाश’ पहली बार छायावादी कविता में ही दिखाई देती है।
छायावाद ने ‘मनुष्यता’ को सबसे बड़ी अस्मिता के रूप में रेखांकित किया। छायावाद के सभी कवियों में निराला सबसे अलग हैं।

 

निराला किसी एक काव्यान्दोलन में अंटने वाले कवि नहीं हैं। एक ओर वे भक्तिकाल के कवियों के साथ खड़े होते हैं तो दूसरी ओर प्रयोगवाद के साथ। नवगीत के रचनाकार भी अपना प्रस्थान बिंदु निराला से ही मानते हैं।

वे सतत गतिशीलता के कवि हैं। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ तथा ‘चरैवेति-चरैवेति’ निराला की कविता को समझने के दो सूत्र हैं।

उन्हें अपने समय के राजनैतिक व सांस्कृतिक अंधेरों की सूक्ष्म समझ थी। उनकी पूरी कविता इस गहन अंधेरे के प्रतिरोध और एक नई सुबह की उम्मीद की कविता है।

गोष्ठी का आधार वक्तव्य देते हुए वरिष्ठ आलोचक प्रो राजेंद्र कुमार ने छायावाद के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि छायावाद केवल औपनिवेशिक गुलामी के विरुद्ध ही नहीं है, बल्कि हमारे समाज की गतिहीन रूढ़ियों के खिलाफ है। वह आत्मालोचना का काव्य है।

छायावाद ने ‘भिन्नता’ के महत्व और ‘विषमता की पीड़ा’ को कविता में व्यक्त किया। निराला जनता के हृदय में जीने वाले कवि हैं। निराला की कविता आत्मविश्वास के अर्जन के उत्सव की कविता है।

कार्यक्रम का आरंभ निराला जी के चित्र पर प्रो विजय बहादुर सिंह, प्रो राजेंद्र कुमार, हरीश चंद्र पाण्डे, प्रियदर्शन मालवीय और डॉ सरोज सिंह द्वारा माल्यार्पण से हुआ।

अतिथियों का स्वागत सेंट जोसफ कॉलेज के हिंदी अध्यापक डॉ.  मनोज सिंह ने किया। चिंतन निराला एवं विमर्श निराला ने पुष्पगुच्छ के द्वारा अतिथियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ सूर्य नारायण और धन्यवाद ज्ञापन विवेक निराला ने किया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार नीलकान्त, हरीश चंद्र पांडे,प्रियदर्शन मालवीय, डॉ रचना आनंद, प्रो संतोष भदौरिया, डॉ अमरेंद्र त्रिपाठी, डॉ आशुतोष पारथेश्वर, डॉ कुमार वीरेंद्र, डॉ क्षमाशंकर पांडेय, डॉ दीनानाथ, डॉ दिनेश कुमार, डॉ संतोष सिंह, डॉ सुबोध शुक्ल, अनुपम परिहार, डॉ अमितेश कुमार, डॉ शिवकुमार यादव, डॉ रामपाल गंगवार, हितेश सिंह, रागविराग, सुभाषिता, डॉ सुरभि त्रिपाठी, अविनाश मिश्र सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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