Saturday, December 10, 2022
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जनसुनवाई में कोशी तटबन्ध के बीच सर्वे के प्रावधान को रैयत/किसान विरोधी बताया गया

 सुपौल (बिहार)। ” कोशी नदी के तटबन्ध के बीच चल रहे सर्वे के प्रावधान किसान रैयत विरोधी है उसे नही बदला गया तो विवश होकर किसान असहयोग आंदोलन शुरू करने की तैयारी करेंगे। ”

यह निर्णय कोशी नव निर्माण मंच द्वारा सुपौल के पब्लिक लाईब्रेरी में तटबन्ध के बीच के किसानों की आयोजित जन सुनवाई में तीन सदस्यीय अध्यक्ष मण्डल ने दी।

जन सुनवाई का विषय प्रवेश महेन्द्र यादव ने कराते हुए विस्तार से सर्वे के प्रवधानों व उद्देश्यों को बताया जिसके बाद वरिष्ठ पत्रकार अमरनाथ झा, वरिष्ठ समाजिक कार्यकर्ता विनोद कुमार व भुवनेश्वर प्रसाद को तीन सदस्यीय (जूरी) अध्यक्ष मण्डल के रूप में चुना गया।

 जन सुनवाई में तटबन्ध के बीच चल रहे सुपौल प्रखण्ड के सर्वे के जटिलताओं व प्रवधानों की खामियों को पूर्व सरपंच हरेराम मिश्रा, अमीन, संतराम यादव ने रखते हुए नौ पंचायत के किसानों द्वारा विरोध करने के कारणों को विस्तार से बताया। बलवा के किसान रंजीत यादव व उपेन्द्र यादव ने बाढ़ पीड़ित किसानों के कागज एकत्र करने की कठिनाइयों व बड़े लोगों के फोन पर भी सर्वे हो जाने, गरीबों को कागज मंगाने के नाम पर दौड़ाने, भ्र्ष्टाचार व सरकार के नाम जमीन जाने की बातें उठायी।

बसबिट्टी से राजेन्द्र यादव, मूंगा लाल तांती व मदन कुमार सिंह, घूरन पंचायत के निर्मली गाँव के अरुण व संजय ने मौजे की अधिकांश जमीन नदी में होने की बात रखते हुए कहा कि यह सब बिहार सरकार हो जाएगा। खोखनहा के परमेश्वर यादव, सिंघेश्वर राय, मो सदरुल, मो अब्बास, सन्तोष मुखिया, रामचन्द्र यादव, नौआबाखर से रामचन्द्र शर्मा, झकराही से महावीर प्रसाद, चन्द्र मोहन यादव, बौराहा से पूर्व सरपंच अलोक राय, सोनवर्षा से गौकरण सुतिहार, ढोली से इंद्रजीत सिंह, कृष्णदेव भारत, सिकरहटा डगमारा से कामेश्वर कर्ण, राजेश मेहता इत्यादि ने अपने अपने गांव की रैयत की जमीन जिसपर वे लगान व सेस चुकाते है, वह जमीन नदी में या बालू है तो वर्तमान प्रावधानों के अनुसार बिहार सरकार के नाम होने के खतरों की पीड़ा बतायी।

जनसुनवाई में लोगों ने बताया कि चल रहे सर्वे कार्य में सेटेलाइट से मैप 2011-12 में लिया गया था जिसमें अधिकांश नदी व बालू की जमीन जिसपर मेड़ नही है वह बिहार सरकार के नाम हो जाएगी।  कोशी नदी अपने पुराने खाते व नक्शे की जमीन में बहुत कम जगह ही बहती है और धारा परिवर्तन के कारण फिर किसी अन्य रैयत के खेत में चली जाती है। इस प्रकार तटबन्ध बनते समय ठगे गए रैयतों की वर्तमान पीढी एक बार फिर से बड़ी संख्या में भूमिहीन होने के कगार पर है।

निर्णय लिया गया कि जन सुनवाई की रिपोर्ट को लेकर भू राजस्व मंत्री व प्रधान सचिव से मिलने से लेकर अनेक प्रशासनिक विधायी लोगों से वार्ता होगी। इसमें सुधार नही होने पर बांध के बीच असहयोग अभियान शुरू होगा।

जन सुनवाई कार्यक्रम का संचालन इंद्र नारायण सिंह ने किया। इस मौके पर श्रवण, प्रमोद, मुकेश पटेल, अजय यायावर, विकास आदि मौजूद रहे।

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