वाराणसी. बीएचयू के ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ ओमशंकर संवैधानिक आधार पर स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार और हर छह करोड़ की आबादी के लिए एम्स बनाने की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे हैं. आज उनके अनशन को पांच दिन हो गए.
डॉ ओमशंकर बीएचयू के लंका गेट पर अनशन कर रहे हैं. इस दौरान वह अपने मरीजों का इलाज भी कर रहे हैं.
डॉ ओमशंकर बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में ह्रदय रोग विभाग में कि चिकित्सक के पद पर कार्यरत हैं.
बनारस के तमाम सामाजिक और राजनैतिक संगठन डॉ ओमशंकर द्वारा चलाये जा रहे आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। इस आंदोलन की मांग है कि हर 6 करोड़ की जनसंख्या पर एक ‘एम्स’ की स्थापना करके हम जनता को सस्ती सुलभ मेडिकल सुविधाएं मुहैया करा सकते हैं. साथ ही सभी मेडिकल कॉलेजों को एम्स की तर्ज पर विकसित करने की राष्ट्रीय नीति को स्वीकृत करने की भी यह आंदोलन मांग कर रहा है। इसी तर्ज पर वह उत्तर प्रदेश में 6 एम्स और 24 स्पेशियलिटी सेंटर की स्थापना की मांग उठ रही है।
डॉ ओमशंकर कहते हैं की मोदी और योगी दोनों ने ही उत्तर प्रदेश में एम्स स्थापना का वादा जरूर किया था लेकिन तमाम वादों के साथ भी स्वाथ्य सम्बन्धी वादे भी जुमले साबित हुए.
गौरतलब है कि बनारस में इस समय प्रवासी भारतीय सम्मेलन चल रहा है जिनसे यह सरकार बनारस में निवेश की उम्मीद कर रही है. इस सम्बंध में डॉ ओमशंकर कहते हैं कि प्रवासी भारतीयों के सम्मेलन में और कुंभ मेले में खर्च करने के लिए तो सरकार के पास करोडों रूपये हैं लेकिन प्रदेश की गरीब जनता को सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं कैसे मिल सकें , इसके लिए मोदी और योगी की सरकार के पास कोई भी कारगर योजना नहीं है.
पूर्वांचल में एम्स बनाने के स्थान को लेकर डॉ ओमशंकर सुझाव देते है कि बनारस के निकट चुनार, रामनगर, बाबतपुर पर किसानों की उपजाऊ जमीनों को बिना नुकसान पहुंचाएं भी एम्स का निर्माण कराया जा सकता हैं. यह पूछने पर कि किसी अस्पताल को एम्स का दर्जा मिलने और पूर्ण एम्स होने में क्या फर्क है तो उन्होंने बताया कि एम्स अपने तय बजट के साथ स्वास्थ्य विभाग के अधीन होता है और ‘एम्स जैसा अस्पताल’ यूजीसी और एचआरडी मंत्रायलों के अधीन होता है जिनके पास सीमित संसाधन ही होते हैं.
स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार की आवाज को 2012 से उठाने वाले डॉ. ओमशंकर मोदी सरकार की स्वास्थ्य नीति के तहत शुरू हुई आयुष्मान भारत योजना के बारे में चर्चा करते हुए कहते हैं कि इस योजना के तहत मोदी जी देश के हर गरीब पर 5 लाख खर्च करने का वादा करते हैं जबकि इससे कम खर्च करके राष्ट्रीय स्तर पर एम्स बनाकर देश में सस्ती समान मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा सकती हैं। इससे स्पष्ट होता है कि मौजूदा सरकार स्वास्थ्य सेवा का भी निजीकरण करना चाहती है जो कि हमारे देश की गरीब जनता के हित में नहीं होगा और मोदी सरकार की इस नीति का पुरज़ोर ढंग से हमें विरोध करना होगा तभी मेरे इस आमरण अनशन की सफलता भी होगी।
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