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यूपी में दलितों-आदिवासियों पर हमले, सीएए-विरोधी आंदोलनकारियों पर दमन के खिलाफ भाकपा माले ने राजव्यापी विरोध प्रदर्शन किया

लखनऊ। दलितों-आदिवासियों पर बढ़ते हमले, भाकपा माले कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न, सीएए-विरोधी आंदोलनकारियों व समाजसेवियों पर दमन के खिलाफ भाकपा माले नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शनिवार को राजव्यापी प्रतिवाद कार्यक्रम के तहत अपने कार्यालयों, घरों, गांवों में कोविड-19 संक्रमण के मद्देनजर शारीरिक दूर बनाते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रम लखनऊ , इलाहाबाद, मऊ, आजमगढ़, गाजीपुर, वाराणसी, सोनभद्र, गोरखपुर सहित सभी जगहों पर हुए।

विरोध प्रदर्शन के जरिए माले नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सोनभद्र के दुद्धी इलाके में दो आदिवासियों की हत्या, गोरखपुर के गगहा थाना क्षेत्र के पोखरी गांव, आजमगढ़ में गंभीरपुर थाना क्षेत्र के दलित बस्ती तियरी, सीतापुर जिले में हरगांव थाना क्षेत्र के लालपुर गांव सहित कई अन्य स्थानों पर दलितों पर हमले का मामला उठाया। इसके साथ ही लखनऊ में चिनहट थानाक्षेत्र के हरदासी खेड़ा में डेढ़-दो दशका से बसी मजदूर बस्ती में जमीन कब्जाने की घटना में मजदूर मजदूर परिवार के खिलाफ दर्ज मुकदमा रद्द कर उसकी सुरक्षा करने और दोषी भाजपा के लोगों के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की गई।

भाकपा माले ने कहा कि प्रतापगढ़ में पट्टी तहसील के गोविंदपुर व पर्षद गांवों के पटेल किसानों पर सवर्ण सामंती दबंगों ने पुलिस के साथ मिलकर बर्बर हमला किया और उनके घर जलाए गए। खेत में जानवर घुसने को लेकर शुरू हुए विवाद में, पीड़ित किसानों के खिलाफ ही मुकदमे दर्ज कर उनमें से कइयों को जेल भेज दिया गया। इस घटना की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पार्टी ने सामंती दबंगों व उनका पक्ष लेने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा।

माले नेताओं ने कहा कि प्रदेश में लोकतांत्रिक तरीके से जनता की आवाज उठाने वाले भाकपा (माले) नेताओं के ऊपर फर्जी मुकदमे दर्ज कर उत्पीड़न किया जा रहा हैं। लखीमपुर खीरी के पलिया में खनन माफिया के खिलाफ 12 जून को एसडीएम को ज्ञापन देने गये माले नेता कमलेश राय सहित प्रतिनिधिमंडल के छह सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। मिर्जापुर में माले नेता भक्त प्रकाश श्रीवास्तव व उनके परिवार पर 8 जून को हमला हुआ। पांच दिन बाद हमलावर भाजपा नेता के इशारे पर एकतरफा कार्रवाई करते हुए अदलहाट थाने की पुलिस ने श्रीवास्तव समेत चार माले कार्यकर्ताओं पर 13 जून 2020 को फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया। अयोध्या (फैजाबाद) में लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी की मांग को लेकर, केंद्रीय मजदूर संगठन एक्टू के राष्ट्रीय आह्वान के तहत और कोविड महामारी से बचाव के निर्देशों का पालन करते हुए, अपने गांव-घर में उपवास करने पर, पुलिस ने 18 अप्रैल को भाकपा (माले) के जिला प्रभारी कामरेड अतीक अहमद सहित तीन महिला कार्यकर्ताओं के ऊपर सदर कोतवाली में और पार्टी के राज्य कमेटी सदस्य कामरेड रामभरोस व पांच अन्य साथियों के खिलाफ महराजगंज थाने में मुकदमा दर्ज कर दिया।

विरोध प्रदर्शन में सीएए-विरोधी आंदोलनकारियों व समाजसेवियों पर दमन की कड़ी निंदा की गयी। नागरिकता संशोधन कानून की वापसी के लिए शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने और आंदोलन को समर्थन देने के लिए कई छात्र-युवाओं (लखनऊ में आइसा के नितिन राज, युवा कार्यकर्ता अश्विनी यादव आदि), महिलाओं, संस्कृतिकर्मियों, मानवाधिकारवादियों, बुद्धिजीवियों व समाजसेवियों के खिलाफ राजधानी के ठाकुरगंज थाने से लेकर अन्य जगहों पर मुकदमे कायम किये गए हैं। इन आंदोलनकारियों, खासकर आंदोलन की अगुवा महिलाओं को नोटिसें जारी कर थाने बुलवाने और उनका पुनः उत्पीड़न करने की कार्रवाई पुलिस द्वारा शुरू की गई है। भाकपा माले इसकी कड़ी निंदा करती है और इसे फौरन रोकने की मांग करती है।

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