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स्मृति

“ सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक रूप से उपेक्षित लोगों की आवाज़ थे डॉ रामविलास भारती ”

मऊ। राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ और जन संस्कृति मंच की ओर से शिक्षक एवं सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता डॉ रामविलास भारती के असामयिक निधन पर राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ के सभागार में पाँच अक्टूबर को आदरांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा की शुरुआत आंचल और जाह्न्वी ने “दुनिया से जाने वाले जाने चले जाते हैं कहाँ..” श्रद्धांजलि गीत से किया।

सभा की अध्यक्षता करते हुए सामाजिक चिंतक और पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक शिवचंद राम ने कहा कि डॉ रामविलास भारती सिर्फ एक शिक्षक ही नहीं थे बल्कि वह उच्च कोटि के साहित्यकार, पत्रकार और सामाजिक चिंतक भी थे। डॉ आंबेडकर के विचारों पर चलते हुए उन्होंने समाज को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा को एक जरूरी टूल्स के रूप में इस्तेमाल किया। आर्थिक और पारिवारिक टूटन के बावजूद भी उन्होंने शिक्षा को समाज के सबसे निचले तबके तक पहुंचाने के लिए आजीवन प्रयास किया और उसमें सफल भी रहे। बेहतर समाज बनाने के उनके सपने को पूरा करने में हम सभी को अपना अधिकतम सहयोग करना ही डॉ रामविलास भारती के प्रति सच्ची आदरांजलि होगी।

जन संस्कृति मंच, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ जयप्रकाश धूमकेतु ने कहा कि डॉ रामविलास भारती हाशिए के समाज के मजबूत स्तंभ, दलित विमर्शकार, आदर्श अध्यापक और सांस्कृतिक रूप से बेहद सजग व्यक्तित्व थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन एक ऐसे समाज को बनाने में समर्पित कर दिया जो समता और बंधुत्व पर आधारित हो।

 

जन संस्कृति मंच, मऊ के अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने कहा कि डॉ रामविलास भारती जी समाज में सरकारी स्कूलों के विरुद्ध पनपती धारणाओं को अपने रचनात्मक प्रयास से ध्वस्त करने का सार्थक प्रयास किया। शिक्षा के माध्यम से गरीब परिवार के बच्चों में भी आसमान छूने के सपने जागते रहे।

लोकतंत्र सेनानी राम अवध राव ने कहा कि भारती जी डॉ अंबेडकर के सबसे प्रखर ध्वजवाहक थे। उनके भीतर अपनों द्वारा दिए गए दर्द को छुपा कर मुस्कुराने की अद्भुत क्षमता थी।

पूर्व प्रधान राम भवन ने कहा कि इस भौतिकवादी दौर में भी डॉ रामविलास भारती अपने वेतन से खर्च कर अनेक छात्रों को पढ़ाते थे। उन्होंने डॉ अंबेडकर के सपनों को शिक्षा के माध्यम से साकार करने का अद्वितीय प्रयास किया।

शिक्षक नेता अवनीश कुमार सिंह ने कहा कि डॉ रामविलास भारती बेहद तार्किक, साहसी और संघर्षशील व्यक्ति थे। सुदर्शन ने कहा कि वह समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को चिन्हित कर उसे शिक्षा के लिए प्रेरित करते थे।

कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रामाश्रय यादव ने कहा कि भारती जी प्रतिभाशाली, ऊर्जावान और समाज में निरंतर सक्रिय रहते थे। वह एक शिक्षक के मौलिक चरित्र को जीते थे। रजनीश भारती ने कहा कि जिस व्यवस्था के विरुद्ध वैचारिक रूप से डॉ भारती लड़ रहे थे उस लड़ाई को निरंतर जारी रखना ही उनके प्रति सच्ची आदरांजलि होगी।

सभा का संचालन करते हुए डॉ तेजभान ने कहा कि डॉ रामविलास भारती सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक रूप से उपेक्षित लोगों की आवाज थे। उनको समाज में आत्मसम्मान के साथ जीना सिखाना ही उनके जीवन का अंतिम लक्ष्य था।

सभा को संबोधित करते हुए सुभासपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ जितेंद्र भारती, डॉ प्रफुल्ल चंद भारती, एडवोकेट प्रेमचंद कौशल, विश्वनाथ प्रसाद, ओमप्रकाश चंद्रा, फखरे आलम, डॉ राम शिरोमणि, अखिलेश कुमार, मनोज कुमार, शरद चंद, विनीत प्रताप राय, ओमप्रकाश बागी, रवि प्रकाश, राजकुमार, वीरेंद्र प्रताप, कल्पनाथ, रामजन्म सागर, कन्हैया लाल, अरुण चंद्रा सहित सैकड़ों लोगों ने डॉ रामविलास भारती के प्रति अपनी आदरांजलि व्यक्त की।

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