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अघोषित सेंसरशिप का बढ़ता शिकंजा है किताबों पर प्रतिबंध -जन संस्कृति मंच

जन संस्कृति मंच ने जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल द्वारा जाने माने लेखकों और इतिहासकारों द्वारा लिखी गई 25 किताबों को जब्त करने की कड़ी निंदा करते हुए इस कार्रवाई को अघोषित सेंसरशिप का बढ़ता शिकंजा करार दिया है।

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने पाँच अगस्त को एक आदेश के जरिए ‘अलगाववाद को बढ़ावा देने’, ‘भारत के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काने ‘ , जम्मू-कश्मीर के बारे में गलत आख्यान का प्रचार करने, सुरक्षा बलों की निंदा करने, धार्मिक कट्टरपंथ, अलगाव को बढ़ावा देने आदि आरोप लगते हुए जाने माने लेखकों-एजी नूरानी की ‘द कश्मीर डिस्प्यूट ’, अरुंधति रॉय की ‘आज़ादी ’, सुमंत्र बोस की ‘ कंटेस्टेड लैंड्स ’, अनुराधा भसीन की ‘अ डिस्मेंटल स्टेट- द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ कश्मीर ऑफटर आर्टिकल 370 ’, क्रिस्टोफर स्नेडेन की ‘इंडिपेंडेंट कश्मीर ’ , सीमा काजी की ‘ बिटवीन डेमोक्रेसी एंड नेशन – जेंडर एंड मिलिटराइजेशन इन कश्मीर ’, हफ्सा कंजवाल की ’ कोलोनाइजिंग कश्मीर – स्टेट-बिल्डिंग अंडर इंडियन ऑक्यूपेशन ’, डेविड देवदास की ‘ इन सर्च ऑफ ए फ्यूचर द स्टोरी ऑफ कश्मीर ‘ सहित 25 किताबों पर प्रतिबंध लगते हुए जब्त करने का आदेश दिया है।

जन संस्कृति मंच ने कहा कि किताबों पर प्रतिबंध मोदी राज में अभिव्यक्ति की आजादी के संवैधानिक अधिकार पर लगातार हमले का एक और उदाहरण है। किताबों पर प्रतिबंध लगाने के लिए झूठे और हास्यास्पद तर्क दिए गए हैं। जम्मू कश्मीर प्रशासन का यह फैसला ब्रिटिश राज में किताबों की जब्ती और पत्रिकाओं पर प्रतिबंध की याद दिलाता है। उस वक्त विदेशी शासकों ने किताबों, पत्रिकाओं और समाचार पत्रों पर प्रतिबंध के लिए इसी तरह के तर्क गढ़े थे।

छह वर्ष पहले अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद जम्मू कश्मीर से राज्य का दर्जा छीन कर उसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। वहाँ चुनाव तो कराए गए लेकिन अभी तक पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया गया है। जनता द्वारा चुनी गई सरकार के हाथ में कोई शक्ति नहीं है और राज्यपाल के जरिए मोदी सरकार वहाँ निरंकुश शासन चला रही है। इस दौरान जम्मू कश्मीर के पत्र -पत्रिकाओं पर कई तरह के अंकुश लगाए गए हैं। यही नहीं प्रशासनिक मशीनरी जम्मू कश्मीर के बारे में वास्तविक स्थिति को छिपाने के लिए लगातार मिथ्या प्रचार को प्रोत्साहित कर रही है।

जसम ने लेखकों-कलाकारों और जनता से किताबों पर प्रतिबंध के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है।

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