Monday, October 3, 2022
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शोक सभा में इप्टा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणवीर सिंह को श्रद्धांजलि दी गई

मऊ। राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ पर आयोजित बैठक में देश के जाने-माने रंगकर्मी, निर्देशक, नाट्य एवं फिल्म अभिनेता, लेखक, इतिहासकार व इप्टा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणवीर सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

श्रद्धांजलि देते हुए अभिनव कदम के संपादक जयप्रकाश धूमकेतु ने रणवीर सिंह के जीवन यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 7 जुलाई 1929 को डूंडलाड राजस्थान में जन्मे रणवीर सिंह ने मेयो कॉलेज से प्रारंभिक शिक्षा के बाद कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से 1945 में बी ए किया। रंगमंच और फिल्म में प्रारंभ से ही उनकी रूचि थी और वे राजघराने के बंधन तोड़कर 1949 में मुंबई चले गए जहां उन्होंने बी आर चोपड़ा की फिल्म शोले में अशोक कुमार और बीना के साथ तथा चांदनी चौक में मीना कुमारी और शेखर के साथ अभिनय किया। वे 1953 में जयपुर लौटे और जयपुर थिएटर ग्रुप की स्थापना की जिसमें अनेक नाटकों का निर्देशन किया, अभिनय एवं प्रकाश व्यवस्था भी संभाली।

रणवीर सिंह 1959 में कमलादेवी चट्टोपाध्याय के बुलावे पर दिल्ली चले गए जहां उनकी सरपरस्ती में उन्होंने “भारतीय नाट्य संघ” की स्थापना की जो इंटरनेशनल थिएटर इंस्टीट्यूट से संबंध था यहां उन्होंने “यात्रिक” थिएटर ग्रुप के साथ अनेक नाटक किए। उन्होंने ने अनेक टीवी धारावाहिकों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिनमें अमाल अल्लाना के निर्देशन में “मुल्ला नसरुद्दीन” अनुराग कश्यप के निर्देशन में “गुलाल” एवं संजय खान के निर्देशन में “टीपू सुल्तान की तलवार” प्रमुख है। अभिनय और निर्देशन के अतिरिक्त उन्होंने अनेक नाटक लिखे जो हजारों बार खेले गए हैं। इनमें पासे, हाय मेरा दिल ,सराय की मालकिन ,गुलफाम, मुखौटों की जिंदगी, मिर्जा साहब ,अमृत जल, तन्हाई की रात प्रमुख हैं। उन्होंने कई विदेशी नाटकों के भारतीय रूपांतरण किये। वे इतिहास के गहरे अध्येता थे। रंगमंच के इतिहास को उन्होंने वाजिद अली शाह, पारसी रंगमंच का इतिहास, इंद्रसभा, संस्कृत नाटक का इतिहास जैसी पुस्तकों से समृद्ध किया। साथ ही नाटकों के कई विश्व कोषो में भारतीय रंगमंच की उपस्थिति दर्ज कराई।

इप्टा के जिलाध्यक्ष राम अवतार सिंह ने कहा कि 1984 में इप्टा के पुनर्गठन की प्रक्रिया में वे इप्टा से जुड़े और 1985 में आगरा में आयोजित राष्ट्रीय कन्वेंशन में शामिल हुए तथा 1986 में हैदराबाद के राष्ट्रीय सम्मेलन में उपाध्यक्ष चुने गए। ए के हंगल के निधन के बाद 2012 में राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए। इप्टा के हर राष्ट्रीय सम्मेलन कार्यक्रम में नौजवानों की ऊर्जा के साथ शामिल होते थे उनके मार्गदर्शन में इप्टा की सक्रियता निरंतर बढ़ती रही। रंगमंच में नए नाटकों और नए प्रयोगों को वह जरूरी मानते थे।

बैठक में प्रमुख रूप से सरोज सिंह, राम सोच यादव अब्दुल अजीम खां, रामू प्रसाद, समसुलहक चौधरी, डा. त्रिभुवन शर्मा, बसंत कुमार, ब्रिकेश यादव, सिकंदर,अजय कुमार मिश्र, परशुराम प्रजापति,संजय राजभर आदि उपस्थित रहे।

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