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त्रिपुरा में वाम नेताओं ,कार्यालयों पर हमलों के खिलाफ लखनऊ में प्रदर्शन

लखनऊ.  त्रिपुरा में 3 मार्च को आये  चुनाव परिणाम के बाद से भाजपा और आईएफटी  द्वारा वांम नेतायों , कार्यलयों , घरों, लेनिन जैसे विचारकों की मूर्तियों और लोकतंन्त्र पर हमले के खिलाफ वांम दलों ने लखनऊ में विरोध प्रदर्शन और प्रतिरोध सभा की । प्रदर्शन माकपा कार्यलय , 10 विधान सभा मार्ग से शुरू होकर जी  पी ओ स्थित गांधी  प्रतिमा तक गया।

जुलूस का नेतृत्व माकपा  पोलिट ब्यूरो सदस्य कामरेड सुभाषणी अली , केंद्रीय कमेटी सदस्य कामरेड  जी  इस मजूमदार ,  माकपा राज्य सचिव कामरेड हीरालाल ,  सीपीआई एमएल नेता रमेश सिंह सेंगर ,  सीपीआई से मोहमद खलीक , राकेश आदि ने किया ।

वक्तयों ने  स्पष्ट शब्दों में इन कायराना हमलों की तीखी  हमलों की आलोचना की। कामरेड सुभाषणी अली ने कहा कि सवाल लेनिन ,गांधी , भगत सिंह , आंबेडकर की मूर्तियां तोड़े जाने का नहीं है और न ही सवाल चुनाव हार जाने का है। पूरी दुनिया में संघर्ष आम जनता के लिए प्रगतिशील विचारधारा जिसका प्रतिनिधित्व मार्क्स , लेनिन, आंबेडकर , गाँधी और भगत सिंह करते है, और हिटलर मुससोलिनी , सावरकर, गोडसे को  मानने वाले नफरत के पुजारियों से  है । नफरत की राजनीति लोकतंत्र की हत्या कर सत्ता के नशे में चूर है और जो भूल गए हैं के मूर्ती तोड़ने से विचार नहीं मरा करते । वामपंथ तुम्हारे खिलाफ लड़ता रहा है और हमारे कार्यकर्ताओं दफ्तरों पर हमला करके तुम हमें संघर्ष और शहादत की विरासत से नहीं डिगा सकते  हो.त्रिपुरा वापिस लड़ेगा और भरपूर जवाब देगा । संघर्ष की विरासत पर हम सत्त्ता में आये थे और हमने भरसक मजदूर वर्ग के हित में काम किया। त्रिपुरा में कुछ वोट हमे कम मिल गया है, हम चुनाव  हार गए हैं लेकिन इसका मतलब कतई नही की  हम नष्ट हो गए।  हम चुनाव की  हार् स्वीकार करते है लेकिन लोकतंन्त्र और युद्ध में हमेशा सही जीते , हमेशा सत्य की जीत हो यह आवश्यक नही ।

वक्ताओं ने कहा कि मुसोलिनी ने  1924 का इटली  का आम चुनाव 64 परसेंट वोट पाकर जीता था , क्या वो सत्य और सही की जीत थी ?  हिटलर ने जर्मनी का फेडरल चुनाव 44 प्रतिशत वोट के साथ  1933 में जीता था तो क्या वो सत्य और सही की जीत थी। इतिहास हमे बताता  है कि की सही और सत्य  को भी हार का सामना करना पड़ा था , और आज भी करना पड़ सकता है । गलत राजनीति की जीत हो सकती है , लेकिन इतिहास गवाह है कि अंतिम विजय सत्य और सही ही कि होती है । मुसोलिनी और हिटलर का अंत किसको याद नही । हम कम्युनिस्ट है , गलतियों से सीखते हैं, सुधारते है और जनता की लड़ाई को आगे बढ़ाते है । चुनाव हार से कम्युनिस्ट विचलित नही होते  और हमारे संघर्ष रूकते हैं। हाँ , त्रिपुरा क्रांतिकारी धरती है , सबक लेकर हम वापिस आएंगे ।  हमारा लाल झंडा संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है , हमने उसको तह करके अगले चुनाव तक के लिए नही रख दिया है, वो आम जनता के संघर्ष में उसी सुर्खी से  फहराएगा जैसा फहराता आया है ।

प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश किसान सभा  के महामंत्री कामरेड मुकुट सिंह, जन संस्कृति मंच के कौशल किशोर और आर के सिन्हा, ऐपवा की मीना सिंह और विमल किशोर, भाकपा माले के राजीव गुप्ता और अरूण कुमार, नागरिक  परिषद् के के के शुक्ल , सीटू नेता प्रेम नाथ राय , एडवा से मधु गर्ग, डीईएफ नेता राधे श्याम, खेत मज़दूर यूनियन से बृज लाल भारती , पूर्व विधायक दीना नाथ सिंह  सहित लखनऊ शहर के बड़े तादाद में जनसंगठनो , सामाजिक  कार्यकर्ता और अमनपसंद नागरिक शामिल हुए.

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