Sunday, August 7, 2022
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ट्रेड यूनियनों ने बजट को मज़दूर व गरीब विरोधी बताया, प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री का पुतला फूंका

पटना,01 फरवरी.
बिहार के केंद्रीय ट्रेड यूनियनों एटक, सीटू, इंटक, टीयूसीसी, एआईयूटीयूसी, यूटीयूसी,एएमयू आदि संगठनों ने मोदी सरकार द्वारा पेश आम बजट को मज़दूर व गरीब विरोधी एवं कारपोरेट के हितों वाला बताते हुए आज शाम बुद्धा स्मृति पार्क पटना से बजट के खिलाफ जुलूस निकाला और डाकबंगला चौक पर प्रधानमंत्री व वित्त मंत्री का पुतला फूंका।
       
जुलूस में शामिल प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति को 5 लाख और आशा-रसोइया को 5 हज़ार भी वेतन क्यों नही मोदी जबाब दो,सांसदों मंत्रियों के वेतन बढ़ाने के लिये बजट पेश करने का नाटक बन्द करो, 40 करोड़ मज़दूरों के मज़दूरी व अधिकारों में वृद्धि क्यों नही मोदी-जेटली जवाब दो आदि नारा लगा रहे थे।
इस अवसर पर ऐक्टू के आर०एन० ठाकुर,रणविजय कुमार,रामबली प्रसाद,एटक के चक्रधर प्रसाद सिंह, गजनफर नवाब, डीपी यादव, सीटू के राजकुमार झा , टीयूसीसी के अनिल शर्मा, एआईयूटीयूसी के सुर्यकर जीतेंद्र,अनामिका, आशा कार्यकर्ता संघ अध्यक्षा शशि यादव, विद्यालय रसोइया संघ नेत्री मीना, महासंघ गोप गुट के प्रेमचन्द कुमार सिन्हा आदि ने सभा को संबोधित किया.सभा की अध्यक्षता ऐक्टू राज्य महासचिव आर एन ठाकुर व संचालन ऐक्टू राज्य सचिव रणविजय कुमार ने किया.
ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि केंद्रीय ट्रेड यूनियन संयुक्त रूप से लम्बे समय से 12 सूत्री मांगें खासकर रोजगार के अवसर को बढ़ाते हुए बेरोजगारी दूर करने,सरकारी कार्यों में वर्षों से ठेका पर काम कर रहे कर्मियों को स्थाई करने, 18 हज़ार मासिक वेतन व 3 हज़ार पेंशन देने, स्थाई करने, 45 वें भारतीय श्रम सम्मेलन से स्वीकृत स्कीम वर्करों को सरकारी कर्मी घोषित करने तथा केंद्रीय स्कीमों के बजट व सुविधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि करने,रक्षा रेलवे,इन्सुरेंस,बैंक आदि पीएसयू में 100 % विनिवेश वापस लेने, श्रम कानूनों में मालिक पक्षीय संसोधन पर रोक तथा बिना कीसी छुट के श्रम कानूनों को सख्ती से लागू करने,आधुनिक गुलामी वाली ठेका प्रथा की समाप्ति,बढती कीमतों पर काबू पाने आदि मांगो पर लगातार संघर्षरत है लेकिन इन सवालों को इस बजट में कोई स्थान नही दिया गया है.

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