गोरखपुर के मानबेला में किसानों पर पुलिस का लाठीचार्ज, महिला का हाथ टूटा

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चार महिलाओं सहित सात को पुलिस ने हिरासत में लिया, किसानों ने भी किया पथराव
किसानों और कांग्रेस ने पुलिस पर कई राउंड फायरिंग करने का आरोप लगाया

गोरखपुर. गोरखपुर के मानबेला में  नौ वर्ष पहले अधिग्रहीत भूमि पर कब्जा करने को लेकर ग्रामीणों व गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के बीच चल रही तनातनी शनिवार की शाम हिंसक हो गई। ग्रामीणों का पुलिस से टकराव हुआ। पहले दोनों तरफ से पथराव हुआ और उसके बाद पुलिस ने लाठचार्ज किया जिसमें एक महिला का हाथ टूट गया जबकि एक और व्यक्ति को काफी चोटें आईं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने हवाई फायरिंग की और आधा दर्जन बाइकों व दो ठेलों को क्षतिग्रस्त कर दिया। पुलिस ने चार महिलाओं सहित सात लोगों को हिरासत में लिया है।

मानबेला में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है

इसके पहले कांग्रेस नेता राणा राहुल सिंह की अगुवाई में मानबेला गांव के सैकड़ों लोगों ने शहर में जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया और नगर निगम परिसर में प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन दिया।
किसान अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा सर्किल रेट के हिसाब से मांग रहे हैं और इस रेट पर मुआवजा मिलने तक जमीन पर गोरखपुर विकास प्राधिकरण द्वारा कब्जा लिए जाने की कार्यवाही का विरोध कर रहे हैं।

मानबेला वही स्थान है जहाँ 2014 की सर्दियों में लोक सभा चुनाव के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी भाषण दिया था और 56 इंच का सीना का जिक्र किया था.उनका मंच अधिग्रहित भूमि पर ही बना था. यह स्थान अब गोरखपुर नगर निगम का वार्ड बन गया है.

वर्ष 2009 में जीडीए ने मानबेला, पोखरभिंडा उर्फ करीमनगर, फत्तेपुर सहित एक दर्जन गांवों की करीब 124 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की थी। किसानों ने उस समय भी काफी कम सिर्फ 16 रूपए वर्ग फीट मुआवजा दिए जाने का आरोप लगाते हुए किसान नेता दिवाकर सिंह की अगुवाई में किसानों ने आंदोलन किया था लेकिन पुलिस ने कई बार उन पर बुरी तरह लाठीचार्ज कर जमीन अधिग्रहीत कर ली.

किसान को पकड़ कर ले जाती पुलिस

इस भूमि में  57 एकड़ पर राप्तीनगर विस्तारित आवासीय योजना की शुरूआत करते हुए जीडीए ने 893 भूखंड बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी। जीडीए ने 893 आवंटियों को भूखंड बेच भी दिए और उनकी रजिस्ट्री की कार्यवाही शुरू कर दी। इसी बीच मुआवजे का विवाद कोर्ट में चला गया और रजिस्ट्री की कार्यवाही रूक गई। आवंटियों को उनकी भूमि पर कब्जा भी नहीं दिया गया। इस पर वे हाईकोर्ट में चले गए। हाईकोर्ट ने आवंटियों को कब्जा देने का आदेश दिया।

सूबे में नई सरकार बनने के बाद जीडीए ने किसानों से बातचीत की पहल की। किसानों के एक गुट से बातचीत कर जीडीए ने 70 लाख रूपए हेक्टेयर की दर से मुआवजा देने की बात कही। साथ में यह शर्त लगा दी कि पूर्व में दिए गए मुआवजे पर हुए ब्याज को कुल दिए जाने वाले मुआवजे से कम किया जाएगा। इससे वह किसान भी नाराज हो गए जो नए दर पर मुआवजा लेना चाहते थे। अधिकतर किसान सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। बाद में जीडीए ने ब्याज कटौती की शर्त वापस ले ली लेकिन किसान सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजे की मांग पर अडे रहे। इस कारण दोनों पक्षों में कोई सहमति नहीं बन पाई है।
हाईकोर्ट के आदेश पर जीडीए 18 जनवरी से आवंटियों को कब्जा दिलाने की कार्यवाही कर रहा है। उधर किसान लगातार अपना प्रतिरोध जारी रखे हुए हैं। पहले दिन किसानों के विरोध को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कांग्रेस नेता राणा राहुल सिंह सहित 100 किसानों को घंटो अपने घेरे में रोके रखा था। इसके बाद से किसानों की ओर से छिटपुट प्रतिरोध होता रहा।

मानबेला के किसानों और कांग्रेसियों ने शनिवार को गोरखपुर शहर में जुलूस भी निकाला

जीडीए ने दूसरे चरण में आठ फरवरी से आवंटियों को कब्जा देने का अभियान फिर शुरू किया। इसके पहले मानबेला में स्थायी रूप से पीएसी तैनात कर दी गई। आठ फरवरी को किसानों से जीडीए अधिकरियों व कर्मचारियों से झड़प हुई। किसानों ने पथराव किया।
नौ फरवरी को आवंटियों को कब्जा दिलाने का विरोध करते हुए एक महिला ने अपने उपर मिट्टी का तेल उड़ेल लिया और आत्मदाह की धमकी दी। इसके बाद जीडीए के अधिकारियों और पुलिस ने अपने कदम पीछे खींच लिए।
आज कांग्रेस नेता राणा राहुल सिंह की अगुवाई में सैकड़ों किसान प्रदर्शन करते हुए नगर निगम स्थित लक्ष्मीबाई पार्क गए और अधिकारियों को ज्ञापन देकर सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा देने की मांग की।
उधर जीडीए और पुलिस अधिकारी उधर मानबेला गांव के पास आवंटियों को कब्जा दिलाने पहुंचे। अधिकारियों ने धारा 144 लागू होने की घोषणा करते हुए ग्रामीणों को अधिग्रहीत भूमि खाली करने का आदेश दिया। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। अपरान्ह साढ़े चार बजे मानबेला में अम्बेडकर पार्क के पास किसानों के एक समूह से जीडीए अधिकारियों व पुलिस से टकराव हो गया। पुलिस ने किसानों को ं बलपूर्वक खदेड़ने की कोशिश की। जवाब में कुछ लोगों ने पथराव किया। पुलिस ने भी पहले पत्थर फेंका और फिर लाठीचार्ज कर दिया। लाठीचार्ज में लैलतुन निशा पत्नी हफीजुल्लाह का हाथ टूट गया। सजतुल्ला उर्फ लोला को भी गंभीर चोटें आईं। पुलिस ने जर्नादन, दीलम, मीना सहित सात लोगों को पकड़ लिया और थाने ले गई। इसमें चार महिलाएं हैं।

अधिग्रहीत भूमि

कांग्रेस नेता राणा राहुल सिंह और किसानों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने दहशत फैलाने के लिए कई राउंड हवाई फायरिंग की। आधा दर्जन बाइकों और दो ठेलों को क्षतिग्रस्त कर दिया। लोगों को घर में घुस कर पकड़ा गया और पिटाई की गई। कांग्रेस नेता का आरोप है कि पुलिस ने तीन किशोरियों को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस की ओर से फायरिंग से इंकार किया जा रहा है।
पुलिस की कार्यवाही से मानबेला के लोग डर गए हैं और अधिकतर पुरूष गांव छोड़ कर दूसरे स्थानों पर चले गए हैं।

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