पत्थलगड़ी के बहाने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर चोट ?

झारखंड के आदिवासी बहुल गांवों में किया गया पत्थलगड़ी राज्य सरकार के लिए सिर दर्द बन चुका है. इन गांवों के लोग सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन चला रहे हैं. वे अपने को सरकारी व्यवस्था से अलग-थलग रखना चाहते हैं. बच्चों को सरकारी विद्यालयों में भेजने पर मनाही है. कई गांवों के आदिवासी बच्चों ने सरकारी विद्यालय जाना बंद कर दिया है. आदिवासी महासभा इन बच्चों के लिए अलग से विद्यालय चला रहा है.

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क्या पत्थलगड़ी असंवैधानिक है ?

[author] [author_image timthumb=’on’]http://samkaleenjanmat.in/wp-content/uploads/2018/05/gladson-dungdung.jpg[/author_image] [author_info]ग्लैडसन डुंगडुंग [/author_info] [/author] झारखंड के आदिवासी इलाकों में हो रही पत्थलगड़ी से सरकार की नींद हराम हो गई है. झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने रांची में बड़ा-बड़ा होर्डिंग लगवाकर और अखबारों में विज्ञापन के माध्यम से आदिवासियों को कड़ा संदेश देने की कोशिश की कि पत्थलगड़ी असंवैधानिक है और जो भी इसमें शामिल है उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जायेगी. मैं इन दिनों झारखंड के खूंटी एवं पश्चिमी सिंहभूम जिले के ‘मुंडा’ एवं ‘हो’ आदिवासियों के इलाका में घुम रहा हूँ. यहां प्रत्येक गांव के…

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पत्थलगड़ी और प्रवेश निषेध

जब संविधान, कानून एवं सरकार के होते हुए आदिवासी लूटे जा रहे हैं तब क्या वे चुपचाप अन्याय सहते रहेंगे ? इसीलिए वे अपने पारंपरिक अधिकारों का उपयोग करते हुए अपनी रक्षा कर रहे हैं.

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पत्थलगड़ी से क्यों भयभीत है राज्य सत्ता

आदिवासियों ने जिस झारखंड राज्य के गठन के लिए सात दशकों तक संघर्ष किया उसी राज्य में अब उन्हें अपनी आजीविका के संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष करना पड़ा रहा है. आदिवासियों को यह बात मालूम हैं कि उनका अस्तित्व बरकरार रखने के लिए उनके पास संघर्ष करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है. यही रास्ता राज्यसत्ता को भयभीत करती है क्योंकि जनांदोलन तथाकथित विकास और आर्थिक तरक्की के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों के लूट पर अड़ंगा लगाता है.

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पत्थलगड़ी आंदोलन की जड़ें

आदिवासियों के साथ प्रगति, विकास, जनहित, राष्ट्रहित एवं आर्थिक तरक्की के नाम पर धोखा किया गया है। इसलिए अब वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन, इलाके और प्राकृतिक संसाधनों को काॅरपोरेट को देने के लिए तैयार नहीं हैं। पत्थलगड़ी आंदोलन की जड़ें यहीं हैं।

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