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February 23, 2020
खबर

जनसंवाद चौपाल में जोशीमठ नगरपालिका चुनाव के प्रत्याशियों ने रखी अपनी बात

उत्तराखंड में नगर निकायों के चुनावों का प्रचार चल रहा है. 18 नवंबर को तीन नगर निकायों – श्रीनगर(गढ़वाल), रुड़की और बाजपुर को छोड़ कर, प्रदेश के अन्य निकायों में चुनाव होंगे. इन तीन निकायों में चुनाव न होना राज्य सरकार की दक्षता और कुशलता का एक और नमूना है. इस पर विस्तार से अन्यत्र बात होगी.
आम तौर पर प्रचार तो ऐसी ही चल रहा है कि सबको देखा बारी-बारी,अबकी बार फलाने भाई की बारी या फिर सारे ही प्रत्याशी-सुयोग्य,कर्मठ,ईमानदार हैं- उनके भौंपुओं के शोर में. लेकिन भौंपुओं के शोर के अतिरिक्त प्रत्याशी को जानने-समझने का,उसके विजन और बात से रूबरू होने और उससे सवाल करने का कोई अवसर,आम तौर पर,जैसे किसी चुनाव में मतदाताओं के पास नहीं होता,वैसे ही  निकाय चुनाव में भी यह मौका नहीं आता. किसी भी स्वस्थ लोकतन्त्र के लिए जरूरी है कि जिसे चुना जा रहा है,वह जवाबदेह हो. लेकिन जब सवाल पूछने का अवसर ही नहीं है तो जवाबदेह बनाने की प्रक्रिया शुरू ही नहीं होगी.
प्रत्याशी अपनी बात लोगों के समक्ष रख सके और लोग प्रत्याशी से सवाल कर सकें,इस संदर्भ में जोशीमठ के कुछ उत्साही और संजीदा युवाओं द्वारा एक महत्वपूर्ण आयोजन 11 नवंबर को जोशीमठ के गांधी मैदान में आयोजित किया गया. “जनसंवाद चौपाल” के नाम से आयोजित इस कार्यक्रम में नगरपालिका,जोशीमठ के अध्यक्ष पद के सभी प्रत्याशियों को एक मंच पर लाया गया.प्रत्येक प्रत्याशी को बोलने के लिए 15 मिनट का समय दिया गया तथा सभी प्रत्याशियों के वक्तव्यों के बाद सवाल-जवाब का सत्र आयोजित हुआ,जिसमें प्रत्याशियों से उपस्थित लोगों द्वारा सवाल किए गए. वाद-विवाद-संवाद, स्वस्थ लोकतन्त्र के नितांत आवश्यक अवयव हैं. जोशीमठ में आयोजित जनसंवाद चौपाल ने लोकतन्त्र के आवश्यक अवयवों के लिए अवसर उपलब्ध करवाया,यह महत्वपूर्ण है.
इस कार्यक्रम की विशेषता या ताकत कहिए तो यह थी कि अध्यक्ष पद के सभी दावेदार,एक ही मंच से अपने विचारों को अभिव्यक्त करने के लिए इकट्ठा हुए. 7 प्रत्याशी तो एकदम सही वक्त पर मंच पर थे. सत्ताधारी भाजपा के प्रत्याशी लगभग अंत में ही आए. हो सकता है संवाद में उनकी रुचि या भरोसा न हो या वे इसकी जरूरत ही न महसूस करते हों. पर फिर भीड़ जुटी देख कर लगा हो कि नकारात्मक संदेश जाएगा,इसलिए अंतिम क्षण में हाजिर हो गए हों. चूंकि उन्होने देरी का कोई कारण नहीं बताया,इसलिए सिर्फ कयास ही लगाए जा सकते हैं. सब प्रत्याशी बोले,अपने हिसाब से जो बोल सकते थे,बोले. जो लड़ने-भिड़ने और बोलने की कला,सब पर महारत रखते हैं,वे तो अच्छा बोले ही. बाकी कुछ लिखा हुआ बोले,कुछ सकुचाये हुए से बोले,कुछ गुस्साये हुए बोले ! पर बोले सभी,यह सकारत्मक बात थी. दल, दलबदल और सत्ता के विपक्ष प्रबल वाले प्रत्याशियों को एक मंच पर लाना, अपने आप में कठिन ही नहीं,तराजू पर मेंढक तोलने जैसा काम है ! पर जनसंवाद चौपाल के आयोजकों ने यह काम बखूबी कर दिखाया. इस काम के लिए वे साधुवाद के पात्र हैं.
सवाल-जवाब के सत्र में भी लोगों की उत्साहजनक भागीदारी रही. हालांकि सवालों को देख कर ही समझ में आ रहा था कि सही सवाल पूछना आए,यह भी बहुत जरूरी है. सही सवाल,सही व्यक्ति से पूछेंगे, तभी सही जवाब मिलेगा. सही जवाब हासिल करना सीखेंगे,तभी सही व्यक्ति को चुन भी पाएंगे. सही चुनाव करने के लिए काफी मशक्कत की जरूरत है अभी.
बहरहाल जनता की व्यापक भागीदारी के साथ जोशीमठ में नगरपालिका चुनाव के लिये आयोजित यह जनसंवाद चौपाल, एक सफल और बेहतरीन आयोजन था. इस आयोजन के लिए विवेक पँवार और उनकी टीम बधाई की पात्र है.जोशीमठ में पारदर्शी और स्वस्थ लोकतन्त्र के लिए जो पहल हुई है,यह पहल प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों तक भी पहुंचनी चाहिए. इसी तरह का आयोजन पिथौरागढ़ में भी हुआ.उत्तराखंड के दो सीमांत नगरों में ऐसी पहल स्वागतयोग्य है.ऐसा जनसंवाद कार्यक्रम न केवल नगरपालिका बल्कि संसद और विधानसभा के चुनावों के लिए भी आवश्यक है. यह लोकतन्त्र में जनप्रतिनिधियों को जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा.
इन्द्रेश मैखुरी     

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