Wednesday, February 8, 2023
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भूस्खलन/भूधंसाव से जोशीमठ का अस्तित्व खतरे में लेकिन सरकार बनी हुई है मूकदर्शक

जोशीमठ में पिछले एक साल से अधिक समय से भूस्खलन/भू धंसाव की परिघटना हो रही है जिससे जोशीमठ के सैकड़ों घरों में दरारें आ गयी हैं, हजारों लोग प्रभावित हैं । लोगों के आशियाने उजड़ रहे हैं। लोग वर्षों की मेहनत से बनाए अपने घरों से उजड़ कर सड़क पर आने को हैं। दुनिया भर के मीडिया ने इस सवाल को उठाया है उसके बावजूद शासन-प्रशासन का उपेक्षापूर्ण बर्ताव आश्चर्यजनक है ।
जोशीमठ के सैकड़ों घर, असपताल, सेना के भवन, मंदिर, सड़कें, प्रतिदिन धंसाव की जद में हैं और यह हर दिन बढ़ रहा है ।
20 से 25 हजार की आबादी वाला नगर अनियंत्रित अदूरदर्शी विकास की भेंट चढ़ रहा है। एक तरफ तपोवन विष्णुगाड परियोजना की एनटीपीसी की सुरंग ने जमीन को भीतर से खोखला कर दिया है दूसरी तरफ बायपास सड़क जोशीमठ की जड़ पर खुदाई करके पूरे शहर को नीचे से हिला रही है ।
एक तरफ जनता पिछले एक साल से अधिक से त्राहि त्राहि कर रही है दूसरी तरफ शासन-प्रशासन मूक तमाशा देखता रहा है। जोशीमठ के स्थानीय प्रशासन ने एक साल में तमाम बार कहने व लिखने के बावजूद घरों का सर्वे नहीं किया । दिसम्बर प्रथम सप्ताह में बहुत जोर डालने पर नगर पालिका को प्रभावितों की गिनती करने को कहा गया। अर्थात आपदा आने पर मरने वालों की गिनती करने के निर्देश दिए। नगर पालिका ने आदेश के क्रम में लगभग 3000 लोगों को चिन्हित किया जो आपदा आने पर प्रभावित होंगे। आपदा से बचाव के उपाय करने के बजाय आपदा की प्रतीक्षा करने का यह क्रूर ह्र्दयहीन रवैया बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इस राज्य को जिसे अपने बलिदानों से हमने हासिल किया उसमें जनता को मरने के लिये छोड़ देने का यह अनुपम उदाहरण शायद ही कहीं मिले ।
24 दिसम्बर को सरकार के इसी उपेक्षा एवं संवेदनहीन रवैये के खिलाफ हजारों की संख्या में जनता सड़कों पर उतरी ।लोगों ने तत्काल पुनर्वास की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। लोग इस सर्दी के मौसम में दरारों से पटे घरों में बल्लियों के सहारे घर टिकाए , रहने को मजबूर हैं।
एक जनवरी को इसी सन्दर्भ में जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने विधायक बद्रीनाथ के साथ मुख्यमंत्री से मिलने का समय लिया था। इस अपेक्षा से कि मुख्यमंत्री जोशीमठ की जनता के इन हालात को जानेंगे सुनेंगे व तत्काल निर्णय लेंगे । किन्तु मुख्यमंत्री ने पूर्व कैबिनेट मंत्री, वर्तमान विधायक व संघर्ष समिति के लोगों, अध्यक्ष नगर पालिका जोशीमठ व अन्य लोगों को जो सुदूर जोशीमठ से बड़ी आशा से आए थे बैठने तक को नहीं कहा। एक मिनट से कम में बात आधी अधूरी सुनकर चीफ सेक्रेटरी से बात करने की कह आगे बढ़ गए। हमारे जोर देने पर विधायक बद्रीनाथ के दोबारा यह पूछने पर कि हम रुंके या जाएं उन्होंने कह दिया कि चले जाओ ।
यह न सिर्फ विधायक का बल्कि क्षेत्र की जनता का अपमान था। यह जोशीमठ की पीड़ित ठंड में राहत की उम्मीद कर रही जनता का भी अपमान था। हम इस प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से इसकी निंदा करते हैं। मुख्यमंत्री से इस पर माफी की अपील करते हैं। शाम को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती को बुलाकर उनसे जोशीमठ के हालात व मांग जानने व इस पर मुख्यमंत्री से रात 10 बजे की मुलाकात में रखने की बात कही। यह सोचकर कि जनता के हित में शायद यह हो और दिन में जो व्यवहार मुख्यमंत्री का रहा उसके शमन का यह प्रयास हो, संघर्ष समिति के संयोजक प्रदेश अध्यक्ष के आवास पर गए । उन्हें स्थिति से अवगत कराया व लोगों की तत्काल जरूरत से अवगत कराया गया जिस पर तत्काल निर्णय लेना जरूरी था ।
जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती व अन्य पदाधिकारी
किन्तु आज सुबह के अखबार में उनका बयान आया है। जिससे यह लगता है कि बयान पहले ही अखबार को देकर बाद में लीपापोती को हमे बुलाया गया। प्रदेश अध्यक्ष ने आपदा से ग्रस्त लोगों के इस क्षण को भी राजनीति के अवसर लाभ उठाने का मौका बना लिया यह घोर आपत्तिजनक है। यह असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है ।
हम प्रदेश की जनता से भी अपील करते हैं कि एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक पर्यटन नगर जो कि सीमा का अंतिम नगर होने से सामरिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है , को बचाने के लिये सरकार पर दबाब बनाने में हमारी मदद करें ।
प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से हम यह भी कहना चाहते हैं कि जोशीमठ की जनता को न्याय मिलने उनके पुनर्वास की व्यवस्था होने तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।
( जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति की ओर से श्री अतुल सती संयोजक संघर्ष समिति, श्री शैलेन्द्र पंवार अध्यक्ष / संघर्ष समिति एवं नगर पालिका परिषद, श्री कमल रतूड़ी सचिव संघर्ष समिति, विधायक बद्रीनाथ श्री राजेंद्र भंडारी  द्वारा जारी) 
जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति  द्वारा मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड को दिया गया ज्ञापन 
सेवा में,
मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड
देहरादून ।
विषय : भूस्खलन भू – धंसाव के कारण ऐतिहासिक सांस्कृतिक पर्यटन व सामरिक महत्व के नगर जोशीमठ के अस्तित्व पर संकट के सन्दर्भ में जोशीमठ के प्रतिनिधिमंडल की आपके साथ वार्ता के क्रम में ।
महोदय, जोशीमठ उत्तराखण्ड में भारत चीन सीमा पर बसा अंतिम नगर है । इस नगर का ऐतिहासिक, सांस्कृतिक,रणनीतिक महत्व है । कत्यूरी राजवंश की राजधानी होने से इसका उत्तराखण्ड के इतिहास में खास महत्व है । शंकराचार्य के यहां आने ज्ञान पाने व प्रथम मठ स्थापना के बाद इस नगर का धार्मिक सांस्कृतिक महत्व पिछले 13 सौ सालों में लगातार बढ़ा ही है ।पर्यटन तीर्थाटन का मुख्य केंद्र है । पिछले 30 चालीस सालों में इस नगर का पर्यटन महत्व भारत की सबसे लंबे रोपवे बनने से व औली के स्कीइंग केंद्र बनने से बढ़ता गया है । सेना, आईटीबीपी गढ़वाल स्काउट्स के यहां मुख्यालय होने से इस नगर का रणनीतिक महत्व है । पिछले दो तीन दशकों में इसके महत्व बढ़ने से ही इस नगर की आबादी में भी वृद्धि हुई है ।
महोदय, भू गर्भ शास्त्रियों के अनुसार यह नगर मोरेन पर बसा है । उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा गठित 1976 की मिश्रा कमेटी ने इस पर विस्तृत रिपोर्ट देते हुए इस नगर को बचाए रखने के लिए यहां भारी निर्माण पर रोक लगाने की सिफारिश की थी ।साथ ही कुछ अन्य रचनात्मक सुझाव भी दिये थे ।उन पर अमल न होने से आज इस महत्वपूर्ण नगर के अस्तित्व पर ही संकट आ गया है । जो कभी भी एक भयावह तबाही का, मानवीय त्रासदी का सामना करने की दहलीज पर खड़ा है ।
तहसील प्रशाशन के निर्देश पर नगरपालिका परिषद द्वारा कराए गये ताजा सर्वेक्षण में नगर के 550 के लगभग घर दरारों से पटे हैं । इनमें अधिकांश बहुत गम्भीर स्थिति में हैं, जो हल्के झटके से कभी भी ढह सकते हैं । एक हल्का भूकम्प इस नगर को जमींदोज करने के लिये पर्याप्त होगा । बड़ी बड़ी इमारतों ने अपना स्थान छोड़ दिया है । बहुत से सरकारी भवन, मंदिर, अस्पताल, सडकें,सेना के भवन, सेना अस्पताल आदि इस आपदा से ग्रस्त हो चुके हैं । सैकड़ों और कभी भी इसकी चपेट में आ जाएंगे क्योंकि भूमि प्रतिदिन नीचे धंस रही है । सरकार द्वारा कराए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण के समय अर्थात 17 अगस्त 2022 के मुकाबले अब दिसम्बर 2022 के अंत आने तक स्थिति बहुत गम्भीर व चिन्ताजनक हो चुकी है। प्रतिदिन भूमि अपना स्थान छोड़ रही है और स्थिति भयावह हो रही है ।
नगर के लोग रात को सो नहीं पा रहे हैं । आशंका व भय का वातावरण बना हुआ है।
महोदय, नवम्बर 2021 के बाद से जो कुछ घरों में दरार आने का सिलसिला शुरू हुआ था उसका परिमाण व आकार इतना व्यापक हो गया है कि उसने पूरे नगर को ही प्रभावित कर दिया है । इसलिए अब तत्काल ही कुछ ठोस जमीनी कार्यवाही किये जाने की जरूरत है ।ऐसी स्थिति में किसी भी तरह के भारी निर्माण से नगर का अस्तित्व ही समाप्त हो सकता है । इस सम्बंधित सभी वैज्ञानिक अध्ययन व रिपोर्ट सरकार के पास हैं सार्वजनिक हैं । जिनमें सभी में यह सुझाव है।
भारी निर्माण ने व एनटीपीसी की सुरंग में पिछले 12 साल से लगातार हो रहे जल रिसाव ने भी इस संकट को बढ़ाने में भूमिका निभाई है । ( वैज्ञानिक सर्वेक्षण में इसकी पुष्टि हुई है ) पूर्व में एनटीपीसी से हुए हमारे समझौते में सन 2010 में एनटीपीसी ने लोगो के घर मकानों का बीमा करने का लिखित भरोसा दिया था । यदि वह पूरा कर लिया गया होता तो शायद आज लोगों को इस तरह सरकार के भरोसे न रहना पड़ता ।
उपरोक्त अत्यंत गम्भीर हो चुकी,आपात स्थिति के मद्देनजर हमारी मांग है कि …
1 – जोशीमठ के सन्दर्भ में हुए विभिन्न वैज्ञानिक भूगर्भिक अध्ययनों और उनकी रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए, उनको अमल में लाया जाय । जिसमें सरकार द्वारा कराया गया अध्ययन भी उपलब्ध है ।
इन सभी रिपोर्ट में जोशीमठ में तत्काल सभी तरह के निर्माण पर, रोक की सिफारिश की गयी है , बाईपास निर्माण इसमें से एक है ।इस सन्दर्भ में सरकार शीघ्र आदेश जारी करे ।
2 – एनटीपीसी को पूर्व में किये समझौते के पालन के लिए सरकार निर्देशित करे, जिसके तहत जोशीमठ के समस्त घर मकानों का बीमा किया जाना था । साथ ही एनटीपीसी की सुरंग को इस भूस्खलन के एक कारक के तौर जिम्मेदार मानते हुए जोशीमठ के लोगों को हुए नुकसान की भरपाई हेतु निर्देशित किया जाए ।
3- जोशीमठ के स्थायीकरण व विस्थापन व पुनर्वास हेतु एक उच्चस्तरीय उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी बनाई जाय । जिसकी निगरानी में जोशीमठ के स्थायीकरण व पुनर्वास के कार्य समयबद्ध तरीके से किये जा सकें । इस कमेटी में जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति को भी शामिल किया जाय जो लगातार इस विषय में कार्यरत है व जमीनी स्थिति को बेहतर समझती है ।
4- भूस्खलन के कारण बेघर हो रहे लोगों के तुरन्त विस्थापन पुनर्वास की व्यवस्था की जाय । जिनके घरों की क्षति हुई है उनकी क्षति पूर्ति वर्तमान बाजार दर पर की जाए । पुनर्वास के समय जोशीमठ की व्यावसायिक स्थिति एवं महत्व को ध्यान में रखा जाय ।
5 – उत्तराखण्ड सरकार की वर्तमान विस्थापन एवं पुनर्वास नीति में संशोधन किया जाए ।
6 – सम्पूर्ण जोशीमठ के घर मकानों के यथाशीघ्र सर्वेक्षण कर तत्काल बेघर हो रहे लोगों के आवास निवास की व्यवस्था की जाय ।
कार्यवाही में देरी पर यह आपदा भयंकर रूप ले सकती है, जिससे भारी जन – धन हानि की आशंका है । अतः आपात स्थिति के मद्देनजर उपरोक्त पर तत्काल कार्यवाही की अपेक्षा आपसे यह प्रतिनिधिमंडल करता है ।
भवदीय
जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति
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