पुस्तक ज्योति रीता के कविता संग्रह ‘अतिरिक्त दरवाज़ा’ की पुस्तक समीक्षासमकालीन जनमतApril 27, 2025April 27, 2025 by समकालीन जनमतApril 27, 2025April 27, 20250105 पवन करण स्त्रियों को तो बिगड़ना ही था, स्त्रियों ने बिगड़ने में बहुत वक्त़ लगा दिया.. स्त्री कितनी दूर तक होती है? खुद को...
कविता उम्मीद की दूब के ज़िंदा रहने की कामना से भरी ज्योति रीता की कविताएँसमकालीन जनमतJanuary 24, 2021January 24, 2021 by समकालीन जनमतJanuary 24, 2021January 24, 202101818 कुंदन सिद्धार्थ “जब धरती पर सारी संवेदनाएँ समाप्ति पर होंगी तब बचा लेना प्रेम अपनी हथेली पर कहीं जब धरती बंजरपन की ओर अग्रसर...