समकालीन जनमत

Tag : Jitender Visariya

कविता

कवि जितेंद्र विसारिया की कविताएँ समाज और सत्ता के खोखलेपन को बेनक़ाब करती हैं।

समकालीन जनमत
रौशन कुमार कवि जितेंद्र विसारिया जी की कविताएँ समाज और सत्ता के दोहरेपन तथा खोखलेपन को बेनक़ाब करती हैं। इनकी कविताएँ धर्म, मिथक, इतिहास और...
पुस्तक

कीर्तिगान : भीड़ हत्या का दस्तावेज़ी यथार्थ

समकालीन जनमत
जितेन्द्र विसारिया यह कहा जाता है कि भीड़ का कोई मस्तिष्क नहीं होता, किंतु जब भीड़ किसी विचार या विचारधारा से संचालित होती है, तब...
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