समकालीन जनमत

Tag : मनीष कुमार यादव

कविता

बलराम कांवट की कविताएँ एक समावेशी दुनिया का ख़्वाब रचती हैं

उमा राग
 मनीष कुमार यादव ”जंगल में दूर किसी टहनी पर झूलती बया अब तक इसी भरोसे पर सहती आयी है इस विपदा को कि थोड़ी देर...
कविता

मनीष कुमार यादव की कविताएँ अपनी चुप्पी में एक बहुत गझिन यात्रावृत्त को समेटे रहती हैं

समकालीन जनमत
वसु गन्धर्व मनीष की कविताएँ एक कठिन ज़मीन की कविताएँ हैं जो अपने प्रस्तावित पाठ में पाठक से उतने ही सृजनात्मक संघर्ष की अपेक्षा करती...
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