कविता कवि जितेंद्र विसारिया की कविताएँ समाज और सत्ता के खोखलेपन को बेनक़ाब करती हैं।समकालीन जनमतDecember 14, 2025December 14, 2025 by समकालीन जनमतDecember 14, 2025December 14, 20250170 रौशन कुमार कवि जितेंद्र विसारिया जी की कविताएँ समाज और सत्ता के दोहरेपन तथा खोखलेपन को बेनक़ाब करती हैं। इनकी कविताएँ धर्म, मिथक, इतिहास और...
पुस्तक कीर्तिगान : भीड़ हत्या का दस्तावेज़ी यथार्थसमकालीन जनमतDecember 7, 2025December 8, 2025 by समकालीन जनमतDecember 7, 2025December 8, 2025091 जितेन्द्र विसारिया यह कहा जाता है कि भीड़ का कोई मस्तिष्क नहीं होता, किंतु जब भीड़ किसी विचार या विचारधारा से संचालित होती है, तब...