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‘ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती विश्वविद्यालय के लोगो और लेटर हेड से उर्दू को हटाना भाषा के प्रति सांप्रदायिक नजरिया ’

लखनऊ। प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ, जन संस्कृति मंच और भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के लोगो और लेटर हेड से उर्दू को हटाकर अंग्रेजी को स्थान देने को असंवैधानिक बताते हुए कड़ी निंदा कि है।

एक बयान में लेखक और सांस्कृतिक संगठनों ने कहा कि यह विश्वविद्यालय 2010 में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती उर्दू अरबी फारसी विश्वविद्यालय के नाम से स्थापित हुआ था । पिछले दिनों इस विश्वविद्यालय का नाम भी बदला गया तथा इसके नाम से ‘उर्दू अरबी फारसी’ शब्द हटाकर उसकी जगह ‘भाषा’ रखा गया। अब लोगो और लेटर हेड से उर्दू को हटाकर अंग्रेजी को स्थान दिया गया है। इतना ही नहीं लेटर हेड में शामिल अरबी के स्थान पर संस्कृत को रखा गया है।

लेखक और सांस्कृतिक संगठनों ने कहा कि अवध की संस्कृति हिंदी व उर्दू की एकता से बनी है। गंगा जमुनी तहजीब, साझी विरासत और भाषाई मेल मिलाप इसकी पहचान है। ऐसे में सरकार का भाषा के प्रति नजरिया सांप्रदायिक व अलगाव पैदा करने वाला है। उर्दू प्रदेश की दूसरी राजभाषा है और उसे हटाकर अंग्रेजी को वहां ले आना न सिर्फ उर्दू का अपमान है बल्कि सरकार की यह कार्रवाई असंवैधानिक है। यह हमारी मिली जुली संस्कृति, एकता और साझी रवायत पर भी प्रहार है।

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