Wednesday, May 18, 2022
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प्रधानमंत्री किसानों का कर रहे अपमान, किसान प्रतिनिधियों से वार्ता में खुद हों शामिल – दीपंकर

पटना. पटना में दो दिसम्बर को  भाकपा-माले विधायक दल कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि वार्ता के नाम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को अपमानित किया है. एक तरह का पैटर्न बन गया है कि सरकार पहले ऐसे आंदोलनों को दबाती है, गलत प्रचार करती है, दमन अभियान चलाती है, लेकिन फिर भी जब आंदोलन नहीं रूकता, तब कहती है कि यह सबकुछ विपक्ष के उकसावे पर हो रहा है. कृषि कानूनों के बारे में सरकार कह रही है किसान इसे समझ नहीं पा रहे हैं. तो क्या पंजाब जैसे विकसित प्रदेशों के किसानों को अब खेती-बारी सीखने के लिए आरएसएस की शाखाओं में जाना होगा़.

उन्होंने कहा कि भाजपा कह रही है कि पंजाब में मंडियों को खत्म कर देने से किसानों को फायदा होगा. इस मामले में बिहार व पंजाब का उदाहरण एक साथ लें तो और अच्छा रहेगा. पंजाब में मार्केटिंग का सिस्टम था, बिहार में तो 2006 में बाजार समितियों को नीतीश कुमार ने भंग कर दिया. बिहार के लोग पहले से ही इसके शिकार हैं। यह जो रास्ता चुना, अगर इससे खेती मजबूत होती, आमदनी बढ़ती तो बिहार में खेती सुधर गई होती. लेकिन बिहार के किसानों की आमदनी घटती चली गई. पंजाब के लोगों को पता है कि इससे अब उनकी खेती चौपट की जा रही है और पूरी खेती-किसानी को कारपोरटों का गुलाम बनाया जा रहा है.

दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि 26 अक्टूबर को श्रम कानूनों में संशोधन के खिलाफ जबरदस्त हड़ताल हुई. उसी दिन किसान भी सड़क पर उतरे. उस दिन 71 वां संविधान दिवस था. देश के मजदूर, किसान, छात्र-नौजवान सभी संविधान के द्वारा मिले हकों की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन सरकार सबको गुलाम बनाना चाहती है. तीन दिसम्बर को फिर वार्ता होने की बात है. वार्ता में पीएम मोदी गायब हैं, वे हर-हर महादेव में लगे हुए हैं. किसानों को बुलाकर अपमानित कर रहे हैं. हमारी मांग है कि प्रधानमंत्री खुद बात करें, और कानूनों को वापस लें . ये तीनों कानूनों स्वामीनाथ आयोग की सिफारिशों , न्यूनतम समर्थन मूल्य, खरीद की गांरटी का निषेध है.
सरकार किसानों को दुश्मन के बतौर देख रही है. सरकार को किसानों ने वोट दिया, उसके वोट से आने वाली सरकार किसानों को दुश्मन मानती है. सरकार आग लगाने का काम रही है. वार्ता में यदि सरकार पीछे नहीं हटती तो इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा और अन्य राज्यों से भी लोग दिल्ली पहुंचेंगे.

माले महासचिव ने कहा कि पूरे देश में मोदी के पुतले जल रहे हैं. कानूनों की प्रतियां जलाई जा रही है, यह आंदोलन राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में सामने आया है. यह किसानों का शाहीनबाग है। शाहीनबाग की सबसे चर्चित बिलकिस बानो को रोक दिया गया. इस एकता को सरकार रोक रही है.

पंजाब और दिल्ली में जबरदस्त गति है. बिहार से हमारी पार्टी के विधायक सुदामा प्रसाद व संदीप सौरभ दिल्ली में किसानों का साथ देने गए हुए हैं. बिहार में भी हमारी पार्टी व वामदल इस आंदोलन को नई उर्जा दे रहे हैं.

उन्होंने कहा कि 3-4 दिसंबर केंद्रीय कमिटी की बैठक में बिहार के चुनाव की समीक्षा होगी। आने वाले विधानसभा चुनाव असम व बंगाल चुनावों पर भी चर्चा होगी।

बिहार में सरकार बदलने की कोशिश थी, हम कामयाब नहीं हो पाए, लेकिन जो हुआ वह जनता की जीत है. वामपंथियों की ताकत बढ़ी है.  कोशिश होगी कि बिहार में विपक्ष को मजबूत बनायें.

श्री भट्टाचार्य  ने कहा कि 6 से 11 दिसंबर  तक पार्टी संविधान बचाओ- देश बचाओ बचाओ अभियान चलाएगी . छह दिसंबर को बाबरी मस्जिद गिराई गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने यह माना था कि मस्जिद गिनाने की घटना बहुत बड़ा जुर्म था, लेकिन किसी को सजा नहीं मिली. नागरिकता संशोधन कानून 11 दिसंबर को लागू हुआ था, जो भी संविधान विरोधी था. नौ दिसंबर को बंगाल में माले के विधायकों को आमंत्रित किया गया है. महबूब आलम के नेतृत्व में एक टीम जाएगी. बंगाल में काफी उत्साह है. बिहार का जो अनुभव रहा है, उसका इस्तेमाल वहां हो सके.

राजाराम सिंह ने कहा कि अभी एकेडमिक चर्चा का वक्त नहीं है. यह पंजाब की नहीं हिंदुस्तान के सभी किसानों की लड़ाई है. सरकार किसानों के बीच फूट डालने की कोशिश बंद करे. कहा कि सरकार कह रही है कि यह बड़े फार्मरों का मामला है, छोटे किसानों का नहीं. लेकिन जब खेती काॅरपोरेट करने लगेंगे तो छोटे-बटाईदार खेती कैसे करेंगे. ये कंपनी राज में ले जाना चाहते हैं. पंजाब के भाइयों को कहना चाहते हैं, हम देश भर में आंदोलन करेंगे , दिल्ली कूच करेंगे, बिहार से भी बड़ा जत्था जाएगा. नीतीश  कुमार धान-गेहूं की खरीद कर रही है. यदि मोदी सरकार तीनों कानूनों वापस नहीं लेती तो बिहार में समानांतर अध्यादेश पारित किया जा सके, ताकि किसानों की सुरक्षा की जा सके.

संवाददाता सम्मेलन को राज्य सचिव कुणाल, किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष फुलचंद ढेवा और विधायक दल के नेता महबूब आलम ने भी संबोधित किया.

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