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बरथरा कला कांड पर माले की जांच रिपोर्ट : दलित की झोपड़ी जलायी जा रही थी और पुलिस चुपचाप देख रही थी

लखनऊ। भाकपा (माले) के तीन सदस्यीय जांच दल ने चंदौली में सदर कोतवाली क्षेत्र के बरथरा कला गांव का दौरा किया, जहां गुरुवार (08 जुलाई) को दबंगों ने दलित परिवार पर हमला कर उनके आवास को जला डाला था। दल ने पीड़ित परिवार सहित गांव के लोगों से मुलाकात की।

पीड़ित परिवार ने जांच दल को बताया कि जिस वक्त उनकी झोपड़ी जल रही थी, पुलिस सूचना पाकर मौके पर पहुंच गई थी, मगर मूक दर्शक बनी रही। पीड़ितों को थाने पहुंचने को कह कर पुलिस वापस लौट गई। जब पीड़ित पक्ष करीब 25 की संख्या में दलित बस्ती से निकल कर उसी शाम थाने पहुंचा, तो वहां हमलावर पक्ष पहले से मौजूद था और थानेवालों से उनका वार्तालाप चल रहा था। दलित गांववासी यह देखकर दंग और आशंकित थे कि हमलावरों को थाने में पुलिसकर्मियों द्वारा नाश्ता परोसा जा रहा था।

जांच टीम को पीड़ित परिवार के मुखिया इंद्रदेव प्रसाद ने बताया कि थाने में पुलिस हमलोगों पर समझौता कर लेने का दबाव बनाने लगी। पुलिस की मौजूदगी में दबंगों द्वारा हमें थाने में भी धमकाया गया। दबंग ठाकुर बोले, समझौता कर लो इसी में तुमलोगों की भलाई है। यही नहीं, समझौता को राजी कराने के लिए पुलिस ने पीड़ित परिवार के साथ बदसलूकी भी की।

इसके पहले, जांच दल ने घटनास्थल का दौरा कर देखा कि दलित बस्ती ठाकुरों के खेत से बिल्कुल सटी हुई है। दलित बस्ती के निवासी गरीब हैं और मजदूरी उनकी आजीविका का स्रोत है। विवाद की शुरुआत गुरुवार की शाम तब हुई, जब दलित इंद्रदेव प्रसाद का लड़का एकादशी (18 साल) मूत्रत्याग के लिए खेत की मेड़ पर गया। उस समय ट्रैक्टर से खेत की जुताई कर रहे रोहित सिंह (पुत्र मोहन सिंह) ने गली दी, जिसका एकादशी ने मौखिक विरोध किया।

यह विरोध रोहित सिंह को नागवार लगा और वह फौरन घर जाकर सात-आठ लोगों के साथ मय लाठी-डंडा इंद्रदेव के घर पा आ धमका। इन लोगों ने जातिसूचक गालियां देते हुए इंद्रदेव प्रसाद, उनकी पत्नी वैजयंती, महिलाओं और बच्चों की लाठियों से पिटाई की। यहां तक कि चारपाई पर पड़े 80 साल के लकवाग्रस्त बुजुर्ग रामसेवक राम को भी नहीं बख्शा और उनपर भी लाठियां बरसाईं। हमलावरों ने इंद्रदेव के परिवार को खेत पर जाने पर जान से मार देने की धमकी देते हुए दलित परिवार की आवासीय झोपड़ी में आग लगा दी।

 

जिस वक्त यह हमला, मारपीट और आगजनी की गई, 10 साल की छोटी बच्ची सोनम ने मोबाइल से इसका वीडियो बना लिया। वीडियो बनाते देख हमलावरों ने बच्ची को दौड़ाया, उसी वक्त पुलिस पहुंची और घटना को अंजाम देने वाले मोहन सिंह, रोहित सिंह, अजीत सिंह, दिलीप सिंह, वीरेंद्र प्रताप सिंह, आनंद सिंह, नितेश सिंह व अविनाश सिंह मौके से भाग गए।

बहरहाल, सोनम द्वारा बनाई गई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के चलते जनदबाव बढ़ा। पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप से रात को 2:00 बजे पीड़ित पक्ष से तहरीर लेकर पुलिस ने कहा कि अब तुम लोग घर जाओ और मुकदमे (एफआईआर) की कापी सुबह आकर ले जाना। अगले दिन 9 जुलाई की सुबह मार खाए सभी लोग थाने गए तो पुलिस ने मेडिकल जांच कराने की खानापूर्ति मात्र से भी पल्ला झाड़ लिया। 10 जुलाई की शाम तक पीड़ितों की मेडिकल जांच नहीं हुई थी।

जांच दल को यह भी जानकारी मिली कि दबंग हमलावरों को पुलिस ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के भाजपा नेता से लेकर सांसद व विधायक का भी वरदहस्त प्राप्त है। माले टीम ने पीड़ित दलितों के प्रति संवेदना जताते हुए उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया।

उक्त जानकारी देते हुए पार्टी ने कहा कि यह घटना योगी सरकार में सवर्ण दबंगों को दिए जा रहे संरक्षण के चलते उनके बढ़े मनोबल का परिणाम है। यही नहीं, योगी सरकार के करीब साढ़े चार साल के कार्यकाल में दलितों को उन्नाव से लेकर हाथरस और गोरखपुर से लेकर चंदौली तक, करीब-करीब पूरे प्रदेश में सताया गया है। उनका सामंती-सरकारी उत्पीड़न किया गया है। इसका खामियाजा योगी सरकार को आगामी चुनाव में भुगतना होगा।

चंदौली की घटना के खिलाफ माले सोमवार (12 जुलाई) को चकिया तहसील मुख्यालय (चंदौली) पर प्रदर्शन करेगी। जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी, पीड़ित पक्ष की मेडिकल जांच, दो लाख रु का मुआवजा और जलायी गयी झोपड़ी की जगह पक्का आवास देने की मांग की जाएगी।

जांच दल में अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला उपाध्यक्ष कृष्णा राय, एक्टू नेता रमेश राय और इंकलाबी नौजवान सभा के नेता शशिकांत सिंह शामिल थे।

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