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धराली आपदा पर श्वेत पत्र जारी करे सरकार , प्रभावितों के लिए पुनर्वास नीति घोषित हो

जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक और भाकपा माले राज्य कमिटी के सदस्य अतुल सती ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को पत्र लिखकर धराली आपदा की सही तस्वीर पेश करने के लिए तत्काल श्वेत पत्र जारी करने, धराली के आपदा-प्रभावितों के लिए पुनर्वास नीति घोषित करने, पोस्ट-डिज़ास्टर असेसमेंट के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने और अगले छह माह के लिए सरकारी राहत कैम्प लगाने की मांग की है।
अतुल सती ने पत्र में लिखा है कि लगातार आपदाओं के संकट से जूझ रहे उत्तराखंड में हाल ही में आई धराली आपदा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सरकार आम जनता के प्रति कितनी संवेदनहीन है।
आपदाओं से होने वाले नुकसान में सबसे गंभीर पहलू है — मानव जीवन और संपत्ति की हानि। इसके अलावा व्यावसायिक, आर्थिक, कृषि तथा अन्य क्षेत्रों में भी भारी क्षति होती है। लेकिन धराली की घटना यह दर्शाती है कि न केवल आपदा से पहले कोई ठोस तैयारी नहीं की गई, बल्कि आपदा आने के बाद भी सरकार का रवैया बेहद उदासीन और लापरवाह रहा।
यह तथ्य विशेष रूप से गंभीर है कि इसरो के संस्थान आई.आई.आर.एस. ने वर्ष 2024 में ही उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को रिपोर्ट प्रेषित करके अवगत करवा दिया था कि धराली और हर्षिल के ऊपरी क्षेत्र में कृत्रिम झीलों का निर्माण हुआ है जो कभी भी एक भयानक आपदा का रूप ले सकती हैं। इसके बावजूद, और वैज्ञानिकों की लगातार चेतावनियों के बाद भी, धराली में आई आपदा ने सरकार की नाकामी को उजागर किया है। यह घटना साफ दिखाती है कि सरकार किस स्तर पर लापरवाह और आम लोगों के प्रति असंवेदनशील है।
इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्च अधिकार प्राप्त समिति ने भी हर्षिल-धराली इलाके में सड़क निर्माण को लेकर स्पष्ट चेतावनी दी थी। समिति ने साफ निर्देश दिए थे कि सड़क का निर्माण एलिवेटेड रूट के रूप में किया जाए, अन्यथा यहां आपदाओं का खतरा बढ़ेगा। इन चेतावनियों को अनदेखा करना आज की इस त्रासदी का सीधा कारण बना है।
इस पृष्ठभूमि में हमारी मांगें निम्नलिखित हैं—
-धराली आपदा की सही तस्वीर पेश की जाए — सरकार तत्काल श्वेत पत्र जारी करे, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि कुल कितना नुकसान हुआ है, कितने लोग हताहत हुए हैं, और किसकी कितनी संपत्ति नष्ट हुई है।
-धराली के आपदा-प्रभावितों के लिए अलग से पुनर्वास नीति की घोषणा की जाए, जिसमें उनके स्थायी पुनर्वास का स्पष्ट रोडमैप हो।
व्यावसायिक और कृषि क्षेत्र के नुकसान की भरपाई के लिए, उनकी आय में आए व्यवधान और हानि का आकलन किया जाए तथा उसके आधार पर उचित मुआवज़ा दिया जाए। इसके लिए तत्काल पोस्ट-डिज़ास्टर असेसमेंट हेतु एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए।
-हताहतों के मुआवज़े के निर्धारण में पूर्व की केदारनाथ आपदा को आधार बनाया जाए, ताकि मुआवज़ा राशि पर्याप्त और न्यायसंगत हो।
-जिन लोगों के घर-मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें तत्काल अस्थायी शेल्टर या प्रीफ़ैब हाउस उपलब्ध कराए जाएं।
-अभी से कम-से-कम अगले छह माह के लिए सरकारी राहत कैम्प लगाए जाएं, जहां भोजन, वस्त्र और आवश्यक सामान वितरित किया जाए। ज़रूरत पड़ने पर इन कैम्पों की अवधि आगे बढ़ाई जा सकती है।
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