दरभंगा। प्रसिद्ध इंकलाबी शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की जयंती के अवसर पर 13 फरवरी को नागार्जुन नगर स्थित प्रो.राजेंद्र कुमार स्मृति सभागार (बी. एम.क्लासेज) में संगोष्ठी तथा जन संस्कृति मंच, दरभंगा का चौथा जिला सम्मेलन आयोजित किया गया।
डॉ. रामबाबू आर्य तथा डॉ. अजय कुमार ने सम्मेलम की अध्यक्षता की जबकि जसम राज्य कार्यकारिणी की ओर से बतौर पर्यवेक्षक अशोक पासवान उपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरुआत में एक मिनट मौन रखकर हाल में दिवंगत जन संस्कृति मंच के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जाने माने आलोचक-कवि प्रो. राजेंद्र कुमार, कथाकार-संपादक ज्ञानरंजन, मशहूर कवि विनोद कुमार शुक्ल को श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम के वैचारिक सत्र का उद्घाटन करते हुए जसम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो.सुरेन्द्र सुमन ने कहा कि आज फ़ैज़ साहब की जयंती के साथ ही स्मृति दिवस पर दलित आलोचक प्रो.तुलसीराम को भी हम याद करते हैं। जब कभी जुल्मतों का दौर आएगा, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ स्वतः लोगों की ज़ुबान पर आ जाएंगे। फ़ैज़ को भूला कर समानता और आजादी की कोई भी लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। जब 1931 में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने देश की आजादी के लिए फांसी के फंदे को चूम लिया था, फ़ैज़ उस वक्त महज 20 वर्ष के थे। इस शहादत ने उन्हें भीतर से झकझोर दिया। उस दौर के मुकम्मल हिंदुस्तान तथा कालांतर में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश, तीनों देशों का दिल फ़ैज़ साहब के भीतर धड़कता है। वे विभाजन के बाद पाकिस्तान गए और वहां भी तानाशाही हुकूमत से लड़ते रहे।
उन्होंने आगे कहा कि फ़ैज़ के यहां विचारधारा बहुत महत्वपूर्ण है। आज जुल्मतों के दौर में जब संघर्ष की बात है तो वह फ़ैज़ की वैचारिकी से ही संभव होगा।

अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. रामबाबू आर्य ने कहा कि फ़ैज़ सम्पूर्णतः मानव–मुक्ति के शायर हैं। दुनिया में जहां कहीं भी शोषण, उत्पीड़न है, वहां फ़ैज़ प्रासंगिक हैं।
डॉ.अजय कुमार ने कहा कि फ़ैज़ जैसे शायर किसी सरहद में सीमित नहीं हैं। डॉ. संजय कुमार ने कहा कि आज गंगा–जमुनी तहज़ीब को समाप्त करने का खुला सत्ता सम्पोषित अभियान चलाया जा रहा। फ़ैज़ साझी विरासत के हिमायती थे। उन्हें याद करने का अर्थ तभी है जब हम इस साझी संस्कृति को बचाएं। दिनेश साफी ने कहा कि आज के दौर में चारों तरफ घुप्प अंधेरा है तब रौशनखयाल शायरों, बुद्धिजीवियों और लेखकों की विशेष भूमिका है। फ़ैज़ हमारे दौर के जरूरी शायर हैं।
सांगठनिक सत्र में सम्मेलन ने 29 सदस्यीय जिला परिषद तथा 15 सदस्यीय जिला कार्यकारणी चुना। सम्मेलन ने सर्वसहमति से जिला अध्यक्ष डॉ.रामबाबू आर्य, जिला उपाध्यक्ष डॉ.अजय कुमार, भोला जी, डॉ.संजय कुमार, डॉ.एम अंसारी को तथा जिला सचिव समीर कुमार एवं जिला सहसचिव रूपक कुमार, लक्ष्मण कुमार तथा सोनी कुमारी को चुना।
सम्मेलन से पांच प्रस्ताव पास कर यूजीसी रेगुलेशन बिल का समर्थन समर्थन किया गया और 12 फरवरी को दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में इतिहासकार प्रो. एस इरफान हबीब पर एबीवीपी द्वारा हमले की कड़ी भर्त्सना की गई। इसके साथ ही सरकार द्वारा एस.आई.आर तथा अन्य हथकंडों द्वारा लोकतंत्र के अपहरण की निंदा की गई। जन पक्षधर साहित्यिक–सामाजिक संगठनों पर बढ़ते सरकारी अंकुश और दमन की भी खुले तौर पर भर्त्सना की गई। अमेरिका की टैरिफ नीति और मोदी सरकार अमेरिकापरस्त नीति की भी आलोचना की गई। कार्यक्रम में सांगीतिक प्रस्तुति जनगायक भोला , डॉ. अजय कुमार तथा गंगा मंडल ने दी।
इस मौके पर डॉ.संतोष कुमार यादव, दीपक कुमार, राजकुमार, अरविंद यादव, रिंकी कुमारी, लक्ष्मण कुमार समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

