सुल्तानपुर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन आइसा के प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक द्वारा सुल्तानपुर के बरामदपुर गांव में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस 6 दिसम्बर के अवसर पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश कुमार इलाहाबाद विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विक्रम हरिजन, गोरखपुर विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रामनरेश राम, इंकलाबी नौजवान सभा के प्रवेश सह- सचिव सोनू यादव तथा कवि और लेखिका सुनीता अबाबील समेत गांव के तमाम गणमान्य उपस्थित रहे।

इस अवसर पर डॉक्टर अंबेडकर के जीवन के संघर्षों और उनकी वैचारिक विरासत को याद किया गया। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश कुमार ने अपनी बात रखते हुए कहा कि बाबा साहेब एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र की स्थापना चाहते थे जबकि आज भारत के संविधान पर हमला बोलकर इसे हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश की जा रही है। नई शिक्षा नीति जैसी शिक्षा विरोधी योजनाएं, चार श्रम कानून जैसी शोषणकारी योजनाएं इस दौर में बनाई जा रही हैं जिसे समझते हुए उसके खिलाफ एक बड़ी जन गोलबंदी करनी पड़ेगी।

सभा में अपनी बात रखते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ विक्रम हरिजन ने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर का जीवन संघर्ष एक समतल मूलक समाज बनाने के लिए था जहां सबके लिए सम्मान और सुरक्षा की गारंटी की जानी थी लेकिन मौजूदा दौर उनके सपनों के अनुरूप दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में लगातार दलितों पर हो रहे हमले, उत्पीड़न, अत्याचार भाजपा सरकार के सुरक्षा वायदे को खोखला साबित कर रही है।

कवि और लेखिका डॉ. सुनीता अबाबील ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ताउम्र महिला अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे और उन्हें सामाजिक आर्थिक न्याय दिलाने के लिए लड़ते रहे लेकिन आज उनके सपनों पर हमला किया जा रहा है महिलाओं के साथ यौन हिंसा से लेकर उन्हें मुख्य धारा से बेदखल कर दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश की जा रही है। नई शिक्षा नीति के आने का महिला शिक्षा पर क्या दुष्प्रभाव पड़ेगा इस पर भी उन्होंने ध्यान केंद्रित किया।

दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रामनरेश राम ने अपनी बात रखते हुए कहा कि डॉ. आंबेडकर भारत के जल जंगल जमीन के संसाधनों पर सबका सामूहिक अधिकार चाहते थे वह चाहते थे की जमीन और रोजगार के अधिकार पर सबका सम्मान प्रतिनिधित्व हो लेकिन उनके विचारों के ठीक उलट आज यह जरूरी संसाधनों पर कुछ मुट्ठी भर लोगों का अधिकार बनते जा रहा है।

इंकलाबी नौजवान सभा के प्रदेश अध्यक्ष सोनू यादव ने शिक्षा और रोजगार पर बल देते हुए कहा की अंबेडकर शिक्षा के द्वारा ही तैयार होकर समाज में सबसे वांछित तबके से आने के बावजूद संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं लेकिन मौजूदा दौर में शिक्षा पर भी सबसे बड़ा खतरा मडरा रहा है लोगों को शिक्षा और रोजगार से वंचित किया जा रहा है।पूरे समाज में ब्राह्मणवाद और पूंजीवाद का जाल फैल गया है जिसके कारण लोगों की जिंदगी बदहाल हो रही हैं। जिस सरकार का काम आम जनता की भलाई करना था वह सरकार पूंजीपतियों के ऊपर मेहरबान बनी हुई हैं।

कार्यक्रम का संचालन ऐसा उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक सुल्तानवी ने किया। विवेक ने भी अपने बात रखते हुए कहा कि मौजूदा दौर में शिक्षा रोजगार महंगाई और सामाजिक अन्याय तथा असुरक्षा के खिलाफ एकजुट होकर मजबूत लड़ाई लड़ने की जरूरत है तभी जाकर बाबा साहेब के सपनों को और सुदृढ़ किया जा सकता है। इस दौरान गांव के सैकड़ो गणमान्य लोग उपस्थित रहे। जीसमें गांव के प्रधान उदयभान, रामबाली जी, भरतराज यादव, अरविन्द मौर्या, ओमप्रकाश पाल, डॉ. रामप्रसाद, बी. एन. भारती, एस. पी. गौतम, के मास न्यूज़ से संतोष जी, अमान सुल्तानपुरी और अतुल जैसे तमाम लोग मौजूद रहे।कॉमरेड विवेक सुल्तानवी के नेतृत्व में शाम के समय में बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा तक मार्च निकाला गया जिसमें सैकड़ो की संख्या में गांव के लोग मौजूद रहे। सभी ने पैदल मार्च में शामिल होकर बाबा साहेब के संघर्षों को याद करते हुए उनके विचारों का समाज बनाने के लिए समर्पित होकर संगठित होकर लड़ाई लड़ने का आवाहन किया। इस दौरान समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ नारे भी लगाए गए। समूचे कार्यक्रम द्वारा बाबा साहब के संघर्ष और विरासत को याद करते हुए उनको श्रद्धांजलि दिया गया।
द्वारा
विवेक सुल्तानवी,प्रदेश उपाध्यक्ष, आइसा उत्तर प्रदेश

