समकालीन जनमत

Author : समकालीन जनमत

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स्मृति

साहित्य में नक्सलबाड़ी चेतना के प्रतीक थे कॉमरेड कंचन कुमार

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मनीष आज़ाद कॉमरेड कंचन कुमार से मेरी पहली मुलाकात देहरादून में हुई थी. उस वक़्त हम वर्ल्ड सोशल फोरम (WSF 2004) के खिलाफ “Mumbai Resistance”...
साहित्य-संस्कृति

नुक्कड़ लाइव थियेटर फेस्टिवल : चार नाटकों का मंचन, जन गायक कृष्ण कुमार निर्मोही का सम्मान

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बेगूसराय ( बिहार )।  रंगनायक द लेफ्ट थियेटर जसम द्वारा दिनकर कला भवन के मुख्य द्वार पर 28 फरवरी और एक मार्च को ” खामोशी...
साहित्य-संस्कृति

गजलों में छिपे हुए सच को कहने का साहस है – डॉ जीवन सिंह

डॉ डी एम मिश्र के ग़ज़ल संग्रह का लोकार्पण लखनऊ। जन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से डॉ डी एम मिश्र के नये ग़ज़ल संग्रह...
जनमत

आशा बहुओं के मानसिक स्वास्थ्य का विरोधाभास

समकालीन जनमत
रश्मि चक्रवर्ती स्वतंत्र पत्रकार  रश्मि चक्रवर्ती का यह लेख 22 फरवरी को ‘ द हिन्दू ’  में प्रकाशित हुआ था । समकालीन जनमत के पाठकों...
ख़बर

बिना कारण लाल बारादरी को सील किये जाने के विरोध में लखनऊ में निकला मार्च, पुलिस ने रास्ते में रोका 

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लखनऊ।  छात्र, युवा, महिला, मज़दूर और नागरिक संगठनों ने कोई कारण बताए बिना लाल बारादरी को सील किये जाने के खिलाफ आज परिवर्तन चौक से...
जनमत

यूजीसी गाइडलाइन पर सामाजिक न्याय की लड़ाई तेज होगी, 18 मार्च को पटना में होगी समता अधिकार रैली

समकालीन जनमत
पटना। यूजीसी रेगुलेशन समता आंदोलन, बिहार द्वारा 25 फरवरी को पटना के आइएमए हॉल में यूजीसी रेगुलेशन को लागू करने के सवाल पर राज्यस्तरीय कन्वेंशन का...
साहित्य-संस्कृति

वर्ग की अवधारणा को खंडित नहीं करता, बल्कि व्यापक बनाता है अस्मितावाद : डॉ रामायन राम

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अनिल सिन्हा स्मृति व्याख्यान दलित चेतना के कवि आशाराम जागरथ और सी बी भारती ने कविताएं सुनाईं लखनऊ। ” अस्मितावाद न तो सर्वहारा को विभाजित...
ख़बर

यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) विनियम, 2026 पर लगी रोक तुरंत हटाई जाए : अखिल भारत शिक्षा अधिकार मंच

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 नई दिल्ली। अखिल भारत शिक्षा अधिकार मंच (AIFRTE) ने मांग की है कि यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा) विनियम, पर लगी रोक...
साहित्य-संस्कृति

डॉ.रामबाबू आर्य जसम दरभंगा के अध्यक्ष और समीर कुमार सचिव बने

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दरभंगा। प्रसिद्ध इंकलाबी शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की जयंती के अवसर पर 13 फरवरी को नागार्जुन नगर स्थित प्रो.राजेंद्र कुमार स्मृति सभागार (बी. एम.क्लासेज) में...
ख़बर

बेटियों के न्याय के लिए महिलाओं-युवाओं के विधानसभा मार्च पर पुलिस लाठीचार्ज

पटना। बिहार में छात्राओं और महिलाओं पर बढ़ती यौन हिंसा, बलात्कार तथा नीट छात्रा मामले सहित महिला उत्पीड़न के मामलों में न्याय सुनिश्चित करने की...
ख़बर

यूजीसी इक्विटी गाइडलाइंस के समर्थन में लखनऊ विश्वविद्यालय में जोरदार प्रदर्शन

लखनऊ। यूजीसी इक्विटी गाइडलाइंस 2026 के समर्थन में आज लखनऊ विश्वविद्यालय के न्यू कैंपस में बड़ी संख्या में छात्र&छात्राओं ने प्रदर्शन किया।  यह प्रदर्शन उच्च...
स्मृति

इलाहाबाद में प्रो. राजेन्द्र कुमार को गहरी आत्मीयता से याद किया गया

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इलाहाबाद। कवि-आलोचक प्रोफेसर राजेंद्र की स्मृति में रविवार को अंजुमन रुहे अदब परिसर में स्मृति सभा आयोजित हुई। स्मृति सभा में  प्रोफेसर राजेंद्र कुमार को...
ख़बर

कामगार महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता के लिए नरेगा का प्रभावी क्रियान्वयन ज़रूरी : प्रो. रीतिका खेरा

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इलाहाबाद। कैरियर कोचिंग के हॉल संख्या–4 में समकालीन जनमत और जन संस्कृति मंच द्वारा आयोजित मीना राय स्मृति व्याख्यानमाला के दूसरे व्याख्यान में प्रख्यात अर्थशास्त्री...
ख़बर

मोहम्मद दीपक का जज़्बा एक उम्मीद है — इसे बचाइए

कोटद्वार, उत्तराखंड की घटना के संदर्भ में ‘ हम देखेंगे ’ ( अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतिरोध अभियान ) की ओर से जारी उत्तराखंड राज्य से...
ख़बर

बुलडोजर राज के खिलाफ भूमि एवं वनाधिकार के लिए मिर्ज़ापुर पहुँचे हज़ारों लोग

समकालीन जनमत
मिर्ज़ापुर (उत्तर प्रदेश ) |  भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी–लेनिनवादी) लिबरेशन ने 28 जनवरी को मिर्ज़ापुर में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया। यह जनसभा...
पुस्तक

पहचान की लड़ाई और विमर्श की जमीन

समकालीन जनमत
अजय प्रताप तिवारी भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना में आदिवासी शब्द किसी विशेष समुदाय की संकेत सूचक ही नहीं है, बल्कि अपने समुदाय के संघर्ष, अस्तित्व...
स्मृति

अपनी वैचारिक दृढ़ता के लिए याद रखे जायेंगे राजेंद्र कुमार

समकालीन जनमत
लखनऊ। हिंदी के जाने-माने कवि व आलोचक राजेंद्र कुमार को याद करते हुए 25 जनवरी को जन संस्कृति मंच की लखनऊ इकाई ने श्रद्धांजलि सभा...
साहित्य-संस्कृति

 जसम के आयोजन में लेखकों और संस्कृतिकर्मियों ने किया प्रतिरोध की रचनाओं का पाठ

समकालीन जनमत
रायपुर. छत्तीसगढ़ में पिछले दिनों दक्षिणपंथी सरकार के तामझाम से भरे साहित्य उत्सव का अर्थहीन शोर-शराबा कायम था तो दूसरी तरफ़ वे लेखक, कवि, कलाकार...
पुस्तक

एक ऐसा उपन्यास जिसे पढ़ते हुए आँखें भीगती रहीं

समकालीन जनमत
अनिल प्रभा कुमार के हिन्दी उपन्यास ‘ सितारों में सूराख़ ’ के उर्दू तर्जुमे की भूमिका का हिन्दी अनुवाद आफ़ताब अहमद प्रिय पाठको, हिन्दी की...
साहित्य-संस्कृति

‘ कम्युनिस्ट आंदोलन ने राजनीति, समाज, संस्कृति और ज्ञान परंपरा को गहरे तक प्रभावित किया ’

मऊ। भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के 100 वर्ष पूरे होने पर जन संस्कृति मंच की तरफ से राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ सभागार में “भारत में...
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