वर्गीज़ के. जार्ज
दिल्ली और देश के दीगर हिस्सों में छात्रों द्वारा जारी प्रदर्शनों के जवाब में प्रधान-मंत्री मोदी बीती 23 जुलाई से रीलबाजी पर उतर आये हैं। माना जा रहा है कि 14 से 29 साल की उम्र की इस इन्स्टाग्राम पीढ़ी, जिसे जेन-जी भी कहा जाता है, से संवाद के लिये उन्होंने यह साहसिक कदम उठाया है। इस आयुवर्ग में सबसे अधिक उम्र के वे लोग हैं जिन्होंने 2014 में पहली बार मतदान किया है और उसके साथ ही मोदी को सत्ता सौंपी है; और सबसे छोटे वे लोग हैं जो उस समय बमुश्किल 2 साल के रहे होंगे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत जी भी नयी पीढ़ी से राब्ता बनाने के लिये अलग-अलग रास्ते खोज रहे हैं। उन्हीं से संवाद के लिये आतुर हैं।
एक खास वीडियो इस समय वायरल है जिसमें मोदी जी उन युवा प्रदर्शन-कारियों का क्षमादान देते दिखायी देते हैं जिन्होंने उनके और उनकी माँ के लिये अश्लील गालियाँ निकाली थीं। उन्होंने उन्हें कुछ ‘‘शरारती बच्चे’’ बताया और उन्हें सही रास्ता दिखाने की जिम्मेदारी समाज पर डाल दी। कुछ लोग इसे उनकी महानता का प्रतीक बता रहे हैं तो कुछ लोग, यह कहते हुये कि संघ और उसके विस्तृत परितंत्र की परिधि के भीतर की भाषागत अश्लीलता बरदाश्त करने से उन्हें कोई गुरेज नहीं है, इसे उनके रूप का दोहरापन कह रहे हैं।
इससे एक और भी बड़ा सवाल पैदा होता हैः अपनी इस रील-राजनीति के जरिये वह वास्तव में किसे सम्बोधित कर रहे हैं? उनका सम्बोधन जेन-जी के लिये है या उनके व्हाट्सऐप पीढ़ी वाले माता-पिता के लिये? यदि उन प्रदर्शनकारियों पर जारी पुलिसिया दमन और सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार गैर-जिम्मेदार या राजनीति-प्रेरित बताने की मुहिम को ध्यान में रखा जाये तो यह बहुत साफ हो जाता है कि मोदी और भागवत इन्स्टाग्राम पीढ़ी से मुखतिब नहीं हैं बल्कि उनकी चिन्ता उस पुरानी व्हाट्सऐप पीढ़ी को लेकर है जो कहीं न कहीं लगता है भाजपा के समर्थन से कुछ छिटक रही है।
वह शायद इस पितृसत्ताक सोच से प्रभावित हो रहे हैं कि ‘‘आधी तज सारी को धावे, आधी रहे न सारी पावे’’। 2014 की चुनावी मुहिम में मोदी जी की लोकप्रियता का ताना-बाना उसी व्हाट्सऐप पीढ़ी के नेटवर्क पर बुना गया था। उसी नेटवर्क के जरिये कांग्रेस-नीत यूपीए को अप्रासंगिक बना देने का अभियान चलाया गया था और उसी से मोदी जी की राजनीतिक छवि भी गढ़ी गयी थी। उस समय के महत्वाकांक्षी युवाओं की विश्वदृष्टि, जो इस समय के जेन-जी के माता-पिता हैं, पर चर्चा बाद में की जा सकती है पर यह स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं होना चाहिये कि वही इस समय भी भाजपा के अवलम्ब-आधार हैं।
चिन्ता का सबब
इस सोच का कोई कारण नहीं है कि वे मोदी के ख़िलाफ़ विद्रोह कर रहे हैं लेकिन कम से कम दो मुद्दे तो ऐसे हैं ही जिनको लेकर उनके मन में उनकी उपलब्धियों के प्रति कुछ सन्देह पैदा हो गया है। पहला है अयोध्या के राममंदिर में भक्तों द्वारा दिये गये दान में हेराफेरी का विवाद और दूसरा है पेट्रोल में अनिवार्य रूप से इथेनॉल मिलाये जाने से सम्बन्धित विवाद की गम्भीरता। दोनों मुद्दे सरकार को असहज कर देने वाले हैं। वही अयोध्या के दानी हैं और मोदी के नेतृत्व में हिन्दुत्व के उभार से जुड़े हुये उन लोगाें में से बहुतों के पास अपनी गाड़ी रखने की क्षमता भी है। उन लोगों का भरोसा हिल गया है लेकिन अभी तक उनके सामने कोई ऐसा नेता नहीं है जिसे वे मोदी के ऊपर तरजीह दे सकें।
मोदी अपनी रीलों के जरिये उन्हीं लोगों से मुखातिब हैं। उनका सन्देश बहुत साफ हैः देखिये आपकी बेटियाँ ही खुलेआम गाली बक रही हैं, बेटे नहीं। यह एक सांस्कृतिक-आघात है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उनका मार्गदर्शन करें और उनकी सुरक्षा करें।
उन्हें टहोका दिया जा रहा है कि वे समझें कि फौरी जरूरत क्या हैः अयोध्या के दानपात्र का विवाद, इथेनॉल की मिलावट से गाड़ियों को होनेवाला नुकसान या मनबढ़ बेटियों द्वारा दिया जा रहा सांस्कृतिक-आघात। यह वही पुराना भेड़िया है जिसे इस डिजिटल युग में फिर से झाड़पोंछ कर सामने खड़ा किया जा रहा है- कलियुग का, जिसमें हमेशा से वर्तमान में सामाजिक, लैंगिक पदानुक्रम और स्थापित व्यवस्था के काल्पनिक अतिक्रमण का रोना रोया जाता है। प्रतीत होता है कि मोदी जी का सन्देश उनके वांछित मतदाता समूह तक अच्छे से पहुँच रहा है। ध्यान से देखें तो पता चलता है कि मोदी जी के सुर व्हाट्सऐप पीढ़ी की सोच के तार से जा मिले हैं कि ‘‘हाँ, उन्हें अपनी बेटियों को अनुशासित और सांस्कारिक बनाना ही है।’’
शायद मोदी की आधी रात की रीलबाजी और आरएसएस-प्रमुख के बयानात के उद्देश्य यही हैं।
वे भाषा तो इन्स्टाग्राम की बोल रहे हैं पर सम्बोधित व्हाट्सऐप जगत को ही कर रहे हैं। मोदी जी अपनी पितृसत्ताक जमात से ही मुखातिब हैं, न कि प्रदर्शनकारियों से।
‘द हिन्दू’ दिनांक 08.08.2026 से साभार किंचित सम्पादित अनुवादः दिनेश अस्थाना
(फीचर्ड इमेज: अंकुर राय)

