तेलंगाना एक बार फिर से जमींदारों के शिकंजे में कस गया है

एन. आर.श्याम “भारतवर्ष में समय-समय पर उत्पादन के साधनों पर मालिकाना हक, उत्पादन संबंधों में बदलाव और उत्पादन करने वाली शक्तियों की उन्नति, अभिवृद्धि के लिए जहाँ एक ओर दलितों और किसानों का आंदोलन होता रहा, वहीं दूसरी तरफ उसे कुचलने का प्रयास भी होता रहा । कोरेगांव सभा को भी इसी रूप में और इस संबंध में हुई गिरफ्तारियों को भी लोगों का ध्यान भटकाने के रूप में देखा जाना चाहिए ।” ये शब्द हैं तेलगू के प्रमुख कहानी, उपन्यासकार अल्लम राजैय्या के । ये हैं तेलंगाना के कामारेड्डी…

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