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स्त्री जीवन को नियंत्रित करने वाली सामाजिक संरचनाओं की पहचान करती है लघु फ़िल्म “ओद गोहरी ”

लखनऊ। जन संस्कृति मंच, लखनऊ द्वारा एक दिसंबर को लघु फ़िल्म “ ओद गोहरी ” की स्क्रीनिंग एसबीएम लाइब्रेरी के सभागार में हुई। यह आयोजन केवल एक फ़िल्म प्रदर्शन भर नहीं था, बल्कि हमारे समय की उन गहरी सामाजिक संरचनाओं पर बातचीत का अवसर बना, जिनमें स्त्री का जीवन, उसकी एजेंसी और उसकी संघर्ष-यात्रा अक्सर अदृश्य कर दी जाती है।

फ़िल्म की निर्देशक रोचना कुमार की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को विशिष्ट बना दिया। उन्होंने फ़िल्म की प्रेरणा, उसके सामाजिक संदर्भ, कथा के निर्माण और शोध की प्रक्रिया पर विस्तार से बात की। रोचना ने बताया कि “ओद गोहरी” केवल एक व्यक्तिगत कहानी नहीं, बल्कि उन असंख्य स्त्रियों का रूपक है, जिन्हें पितृसत्तात्मक मान्यताओं, कठोर परंपराओं और अंधविश्वास की बेड़ियों में जकड़कर अपने अस्तित्व से समझौता करने के लिए मजबूर किया जाता है।

रोचना कुमार ने चर्चा के दौरान यह भी रेखांकित किया कि कैसे फ़िल्म में दिखाया गया भय, मौन, और संघर्ष हमारी सामाजिक वास्तविकता में मौजूद व्यापक ढाँचों को उजागर करता है—ऐसे ढाँचे जो स्त्री की इच्छा, निर्णय और स्वतंत्रता को नियंत्रित करते हैं। उन्होंने दर्शकों द्वारा उठाए गए सवालों का अत्यंत संवेदनशील और विचारपूर्ण उत्तर दिया, जिससे संवाद और गहराता गया।

चर्चा में उपस्थित दर्शकों—विशेषकर युवा और वरिष्ठ महिलाओं—ने फ़िल्म के विभिन्न पहलुओं को लेकर अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न और अनुभव साझा किए। उनकी भागीदारी ने संवाद को बहुस्तरीय बना दिया। कई स्त्रियों ने यह कहा कि फ़िल्म ने उन्हें अपने ही जीवन में मौजूद उन संरचनाओं को देखने और समझने का नया माध्यम दिया है, जिन पर अक्सर बात नहीं हो पाती है।

यह आयोजन जन संस्कृति मंच की उस निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा है जिसके तहत मंच साहित्य, रंगमंच, संगीत जैसे क्षेत्रों से आगे बढ़कर अब दृश्य कला, फ़िल्म और मूर्तिकला जैसेयुक्त अन्य कला रूपों में भी सक्रिय हस्तक्षेप करना चाहता है। यह विस्तार केवल कला के माध्यम बढ़ाने का प्रयास नहीं, बल्कि समाज की व्यापक लोकतांत्रिक-सांस्कृतिक चेतना को समृद्ध करने की दिशा में एक गंभीर कदम है।

जन संस्कृति मंच का मानना है कि कला, जब सामाजिक प्रश्नों से जुड़ती है, तो वह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहती—बल्कि वह समाज को देखने, समझने और बदलने का उपकरण बन जाती है। “ओद गोहरी” की स्क्रीनिंग इसी दृष्टि को सुदृढ़ करती है।

फ़िल्म स्क्रीनिंग के इस कार्यक्रम का संयोजन जन संस्कृति मंच, लखनऊ के सह सचिव शान्तम निधि द्वारा किया गया। विमल किशोर, निधि सहाय, सुनिधि श्रीवास्तव, श्वेता राय, रूपाली गौतम, आर के वर्मा, फरजाना महदी, सुचित माथुर, वेदान्त शुक्ला, मोनिका, सिम्मी अब्बास आदि ने अपनी प्रतिक्रिया व विचारों से चर्चा को जीवन्त बनाया। जसम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कौशल किशोर ने रोचना कुमार को इस फिल्म के लिए बधाई दी और फिल्म को लेकर पहल के लिए जसम की लखनऊ इकाई को धन्यवाद दिया।

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