समकालीन जनमत
साहित्य-संस्कृति

‘ कम्युनिस्ट आंदोलन ने राजनीति, समाज, संस्कृति और ज्ञान परंपरा को गहरे तक प्रभावित किया ’

मऊ। भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के 100 वर्ष पूरे होने पर जन संस्कृति मंच की तरफ से राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ सभागार में “भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के 100 साल : विरासत और नई चुनौतियां” विषय पर संवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बतौर भाकपा माले के महासचिव कॉमरेड दीपांकर भट्टाचार्य, भाकपा माले के कार्यकारी प्रदेश सचिव ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा, किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयप्रकाश राय समेत के कई वरिष्ठ नेता व नागरिक समाज के लोग शामिल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता समकालीन जनमत के प्रधान संपादक रामजी राय ने की।

संवाद में अपनी बात रखते हुए भाकपा माले के महासचिव कॉमरेड दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि भारत की कम्युनिस्ट पार्टी का इतिहास देश में उपनिवेशवाद, सामंतवाद के खिलाफ संघर्ष करते हुए भारत को एक समाजवादी लोकतांत्रिक देश बनाने के लिए संघर्ष का है। उसी समय में बना आरएसएस देश में सांप्रदायिकता का बीज बो रहा था, गांधी की हत्या कर रहा था, अंग्रेजी हुकूमत के आगे समर्पित था। उस दौर में कम्युनिस्ट आंदोलन पूरी दुनिया में बदलाव के नारे के साथ भारत के मेहनतकश को संगठित करता हुआ शोषण के विभिन्न रूपों के खात्मे के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा था जिसका प्रभाव राजनीतिक,सामाजिक, सांस्कृतिक से लेकर ज्ञान परंपरा और सिनेमा पर रहा जो अपने स्वरूप में प्रगतिशील और समावेशी रहा।

दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि आज भारत में उसी आजादी की लड़ाई से हासिल संविधान हैं लेकिन भाजपा और आरएसएस का मौजूदा शासन संविधान को खत्म कर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता हैं जिसमें दलितों, महिलाओं और मेहनतकश जनता के सभी हासिल अधिकार छीन कर गैर बराबरी का शासन स्थापित किया जाना हैं।

उन्होंने कहा कि देश के संसाधनों को चंद पूंजीपतियों को सौंप देने के लिए फासीवाद के संपूर्ण एजेंडों को लागू किया जा रहा हैं। इसी क्रम में जगह जगह बुलडोजराज स्थापित किया जा रहा हैं, एसआईआर के नाम पर वोट का अधिकार छीना जा रहा है, देश को सांप्रदायिक आग में धकेला जा रहा हैं, संविधान की स्पष्ट रूप से अवहेलना की जा रही है। लोकतांत्रिक आवाजों को दबाते हुए उत्तर प्रदेश माले के सचिव सुधाकर यादव, मिर्जापुर की सचिव जीरा भारती समेत सोनम वांगचु राजनैतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डाल कर उत्पीड़न किया जा रहा हैं जिसके खिलाफ मौजूदा दौर संगठित संघर्ष का है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे समकालीन जनमत के प्रधान संपादक रामजी राय ने अपनी बात रखते हुए कहा कि मौजूदा दौर एक व्यापक एकजुटता का संघर्ष के विभिन्न आयामों को खोलता हुआ सामाजिक बदलाव और बेहतर समाज के निर्माण का है जिसके लिए सभी लोगों को मिलकर आगे बढ़ाना है।

कार्यक्रम में कई श्रोताओं के सवाल किये जिसका जवाब भाकपा माले महासचिव कॉमरेड दीपांकर भट्टाचार्य ने दिया। कार्यक्रम का संचालन जन संस्कृति मंच के फखरे आलम ने किया। राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ के सचिव ओमप्रकाश सिंह ने आभार व्यक्त किया।

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