ज़ेर-ए-बहस ‘ गाँवों के चेहरों से नूर चुरा लेती हैं बंदूकें, माएं बिलखती हैं जवान बेटों के जनाज़े देखकर ’समकालीन जनमतMay 31, 2022May 31, 2022 by समकालीन जनमतMay 31, 2022May 31, 20220337 अमित ओहलान “चौबर दे चेहरे उत्ते नूर दसदा नि ऐदा उठुगा जवानी च्च जनाज़ा मिठिये.” जिस घर में जवान मौत हो जाए वो...