कविता दुर्गेश की कविताऍं कच्ची-पक्की स्मृतियों की ताज़ी व पहली तोड़ हैंसमकालीन जनमतDecember 28, 2025December 28, 2025 by समकालीन जनमतDecember 28, 2025December 28, 20250156 नीरज हमारे इर्द-गिर्द हमेशा अनुत्तरित आत्माभिव्यक्तियों के गुबार मौजूद होते हैं जिन्हें केवल सहृदय ही महसूस कर पाते हैं, कवि-हृदय इस मामले में सबसे सहज...
कविता नीरज की कविताएँ समकालीन जटिलताओं की पुख़्ता शिनाख़्त हैंसमकालीन जनमतJune 1, 2025June 1, 2025 by समकालीन जनमतJune 1, 2025June 1, 20250315 विजय राही समकाल को समझे बिना कविता को समझना दुष्कर है। कोई भी कवि समय सापेक्ष परिस्थितियों को उजागर करता हुआ आगे बढ़ता है या...
पुस्तक एक देश बारह दुनिया: समकालीन भारत में विकास के विरोधाभासों का रेखाचित्रसमकालीन जनमतOctober 3, 2021October 4, 2021 by समकालीन जनमतOctober 3, 2021October 4, 20210448 नीरज एक स्वतंत्र देश के तौर पर भारत के लिए 75 वर्षों का अरसा कोई लंबा समय तो नहीं है। लेकिन, यह भी सच है...