प्रयागराज, 22 जुलाई 2025
गत 29 जून को करछना में हुए बवाल के बाद पुलिस द्वारा असंवैधानिक व बर्बर ढंग से की गई 70 से अधिक निर्दोष दलित आदिवासी नौजवानों की गिरफ्तारी के बाद उनकी रिहाई को लेकर भाकपा माले के राज्यव्यापी प्रतिरोध के तहत आज प्रयागराज जिला मुख्यालय पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन व ज्ञापन का कार्यक्रम आयोजित हुआ.
प्रदर्शन के दौरान ही पुलिस द्वारा इस प्रदर्शन को आयोजित करने में जुटे भाकपा माले राज्य कमेटी सदस्य सह आइसा प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार के साथ मारपीट की गई और उन्हें जबरन गिरफ्तार करने की कोशिश की.
इस दौरान करछना मामले में अवैध ढंग से जेल में बंद नाबालिग दलित नौजवानों की माँऐं, अधिवक्ता जो कि इस प्रदर्शन में शामिल थी, वे पुलिस से भिड़ गये और आइसा प्रदेश अध्यक्ष को घेरकर उन्हें पुलिस के हमले से बचाया.
कचेहरी में प्रशासन की अनुमति लेकर आयोजित इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन से पुलिस जिस तरह हाथापाई कर रही है, वह साबित करता है, कि पुलिस का रवैया असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है।

आइसा प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार ने इस मौके पर कहा की प्रयागराज की पुलिस जाति देख कर निर्दोष दलित नौजवानों की गिरफ्तारी कर रही है और इस तानाशाही के खिलाफ बोलने पर आज मेरे साथ यह बर्बर सुलूक व दमन कर रही है. लेकिन जब तक दलित नौजवानों की रिहाई सुनिश्चित नहीं होती। हम इस लड़ाई को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे.
इस मौके पर मौजूद प्रयागराज पुलिस साफ़ तौर पर यह कहती नजर आई की हम इस सवाल पर किसी भी तरह का कोई ज्ञापन या प्रदर्शन नहीं आयोजित करने देंगे.
भाकपा माले इलाहाबाद के प्रभारी सुनील मौर्य का कहना है कि योगी सरकार में दलितों को जलाया जा रहा है और उनको ही जेल भेज दिया जा रहा है और उनके पक्ष में आवाज़ उठाना भी कानून व्यवस्था को ध्वस्त करना बताया जा रहा है। योगी का बुलडोजर राज वंचितों की आवाज को कुचल देने पर आमादा है। हम इसको बर्दाश्त नहीं करेंगे। करछना मामले में भी पुलीस प्रशासन शुरुआत से लेकर आज के प्रदर्शन तक पूरी तरह से सामंतो के पक्ष में है और चुन -चुन कर निर्दोष दलित नौजवानों की गिरफ्तारी और उनके साथ क्रूरता कर रही है.
प्रदर्शन में विश्वविद्यालय के छात्र, वकील और आइसा- आरवाईए, इंसाफ मंच व भाकपा माले कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे.
आज़मगढ़ में भी इसी मामले को लेकर प्रदर्शन किया गया। भाकपा-माले आजमगढ़ की इकाई ने मेंहनगर थाना के सिंह पुर में दलित नौजवान की हत्या और प्रयाग राज के करछना तहसील के 75दलित, आदिवासियों की गिरफ्तार कर जेल भेजने के खिलाफ राज्य व्यापी आह्वान के तहत जिला मुख्यालय पर मार्च एवं प्रदर्शन किया गया।

मार्च कुंवर सिंह उद्यान से निकाला गया। मार्च में लोग दलित आदिवासियों का उत्पीड़न बन्द करो, अपराधी पुलिस गठजोड़ मुर्दाबाद आदि नारे लगा रहे थे। ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री को सम्बोधित 6 सूत्रीय मांग पत्र अतिरिक्त मजिस्ट्रेट आजमगढ़ को सौंपा गया जिसके माध्यम से सिंहपुर में योगेश राम हत्या की उच्च स्तरीय जांच कराने, उनके शव की फिर से डाक्टरों की टीम गठित कर पोस्टमार्टम कराने, पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपए मुआवजा देने साथ ही प्रयाग राज के करछना में चन्द्रशेखर आजाद, रावण के जाने के बाद गिरफ्तार बेगुनाह, आदिवासी नौजवानों को रिहा करने, की मांग की गयी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाकपा-माले जिला प्रभारी कामरेड विनोद सिंह ने कहा कि योगी राज जंगल राज में तब्दील हो चुका है योगी सरकार की पुलिस दबंगों, अपराधियों से नापाक गठजोड़ कायम है जिसके चलते दलित, अल्पसंख्यकों, महिलाओं के हत्याओं की बाढ़ सी आ गयी है और योगी सरकार की पुलिस अपराधियों को बचाने के लिए हत्या को आत्महत्या में तब्दील करने में लगी है।
प्रयागराज के देवीशंकर की हत्या का मामला हो या आजमगढ़ के योगेश हत्या का मामला हो पुलिस मामले को आत्महत्या में तब्दील कर अपराधियों को बचा रही है जहां कहीं भी लोग न्याय के लिए आगे आ रहे हैं योगी सरकार उन्हें जेल में डाल रही है इस तरह के मामले प्रयाग राज सहित पूरे प्रदेश में देखने को मिल रहा है।
भाकपा-माले जिला प्रभारी कामरेड विनोद सिंह ने कहा कि आजमगढ़ के योगेश हत्या काण्ड की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों को जेल नहीं भेजा गया और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला साथ ही प्रयाग राज के करछना के दलित आदिवासी नौजवानों को नहीं छोड़ा गया तो भाकपा-माले आन्दोलन तेज करेगी।
मार्च एवं प्रदर्शन में भाकपा-माले के कामरेड सुदर्शन, कामरेड बसन्त, कामरेड रामकृष्ण, कामरेड रामजीत, कामरेड हरिश्चंद्र, कामरेड रामसुधार राम, कामरेड राममूरत चौहान, कामरेड भीम , कामरेड अजय सहित तमाम लोग शामिल रहे।
इसके अलावा लखनऊ, रायबरेली, जालौन, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, बनारस, गाजीपुर, सोनभद्र से भी इस मामल को लेकर प्रदर्शन की ख़बर है।
नोट- खबर अद्यतन की जा रही है

