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संकल्प रंगोत्सव : छह नाटकों का मंचन, पांच साहित्यकारों -संस्कृति कर्मियों का सम्मान

बलिया। बलिया की साहित्यिक  , सामाजिक एवं सास्कृतिक संस्था “संकल्प” ने इस वर्ष अपनी स्थापना के 15 वर्ष पूरे किए । इस अवसर पर कलेक्ट्रेट बलिया के ड्रामा हाल में तीन दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह “संकल्प रंगोत्सव “का आयोजन किया गया । यह समारोह दिसम्बर महीने के अंतिम सप्ताह (27 दिसम्बर से 29 दिसंबर ) में आयोजित किया गया, जब समूचे उत्तर-भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही थी ।
27 दिसम्बर 2019 को सैकड़ो दर्शकों की उपस्थिति में जिलाधिकारी बलिया हरिप्रताप शाही ने दीप प्रज्ज्वलन कर इसका शुभारंभ किया । मंच पर पहली प्रस्तुति दस्तक पटना की थी, जिसने सुप्रसिद्ध रंग निर्देशक पुंज प्रकाश के निर्देशन में  सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ की लंबी कविता “पटकथा” को मंचित किया । यह रंग-प्रस्तुति एकल थी, जिसे आशुतोष विज्ञ मंच पर लेकर आये थे । जैसा कि हम सब जानते हैं कि धूमिल की कविता ‘पटकथा’ आजादी के बाद की उम्मीदों के बंधने और उनके टूटने की दास्तान को बयां करती है । आजाद भारत का सपना देखने वालों ने एक बेहतर समाज की कल्पना की थी । मगर अफसोस कि यह आजादी मात्र सत्ता के हस्तांतरण की कहानी बनकर रह गयी । व्यवस्था परिवर्तन और बेहतर समाज निर्माण की हसरत अधूरी ही रही ।
उनकी यह प्रस्तुति इस मायने में भी खास रही कि इस कंपकपाती ठंड में भी उन्होंने नंगे बदन, सिर्फ एक धोती पहनकर अभिनय किया । उन्हें दर्शकों का भी भरपूर समर्थन मिला, उनकी खूब सराहना मिली ।
पहले दिन की दूसरी प्रस्तुति सेतु सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी की रही । प्रतिमा सिन्हा द्वारा लिखित और सलीम राजा द्वारा निर्देशित नाटक “हादसे के बाद” एक बहुत ही संवेदनशील विषय को हमारे सामने उठाता है । इस नाटक में बलात्कार पीड़ित लड़की और उसके परिवार पर पड़ने वाले नैतिक और मनोवैज्ञानिक प्रभावों को बेहद संवेदनशीलता के साथ जीवंत किया गया है । नाटक यह बताने का प्रयास करता है कि ऐसे अपराधों के बाद परिवार और समाज को कैसे एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए । इस नाटक में भुक्तभोगी लड़की के किरदार  में चित्रा वर्मा, पिता राकेश वर्धन ,मां राज लक्ष्मी मिश्रा, बहन प्रियंका मेहरोत्रा ,भाई सत्यम ने अपनी-अपनी भूमिकाओं से सबको प्रभावित किया।
राष्ट्रीय नाट्य समारोह की दूसरी शाम की पहली प्रस्तुति पटना की सांस्कृतिक टीम ‘रंग-यात्रा’ की प्रस्तुति ‘बुद्धिजीवी’ की थी । प्रसिद्ध संस्कृतिकर्मी हरिवंश जी द्वारा लिखित इस नाटक को युवा रंगकर्मी निशांत ने निर्देशित किया था । यह नाटक हमारी राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था पर चोट करता है । इसमें दिखाया गया है कि देश का आदिवासी समाज किस तरह से अपनी मूलभूत जरूरतों से अभी भी महरूम है । यही नही, उसके निवास क्षेत्र में स्थित खनिज पदार्थों को हासिल करने के लिए पूंजीपति तबका कैसे सरकार से सांठगांठ करके उसे बेदखल कर रहा है । अव्वल तो उसे समाज का सहयोग नही मिलता, और जो कुछ लोग उनकी आवाज बनते हैं, उन्हें अर्बन नक्सल और देशद्रोही कहकर प्रताड़ित किया जाता है ।
इसमें मुख्य रूप से सलोनी, प्रियंका ,संगीता ,शशांक,राकेश कुंदन , मयंक,  शिवानी, मानसी, प्रांशु आदि का अभिनय शानदार रहा । पार्श्व संगीत शैलेंद्र और निशांत ने दिया जबकि ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था रणजीत कुमार ने संभाली ।
दूसरी प्रस्तुति जबलपुर विवेचना रंगमंडल की थी, जिसने सुप्रसिद्ध रंग निर्देशक अरुण पांडे के निर्देशन में हरिशंकर परसाई द्वारा लिखित “निठल्ले की डायरी” को मंचित किया । हम सब परसाई के चुटीले और धारदार व्यंग्य से परिचित हैं । यह नाटक उस परिचय को और प्रगाढ़ बना रहा था । तथा समाज और राजनीति की तमाम विद्रूपताओं को हमारे सामने ला रहा था, और हमें शिक्षित भी कर रहा था कि ऐसी स्थिति में जनता का क्या पक्ष होना चाहिए ।
नाटक में कक्का के भूमिका में नवीन चौबे और निठल्ले की भूमिका में संतोष राजपूत का अभिनय सबने सराहा । इसके अतिरिक्त मनीष तिवारी ,राकेश ,राजेश वर्मा, गजनीश  की भूमिका भी बहुत ही सराहनीय रही। संगीत राजेश्वरी वर्मा का था और ध्वनि और प्रकाश की व्यवस्था किशोर रावत का था।
नाट्य समारोह के आखिरी दिन दो नाटकों का मंचन हुआ । पहली प्रस्तुति कोलकाता के लिटिल थेस्पियन ग्रुप द्वारा एस एम अजहर के निर्देशन में “पतझड़” नाटक की थी । यह नाटक टेनेसी विलियम्स की द ग्लास मैनेजरी पर आधारित एक ऐसे परिवार की कहानी है, जिसमें परिवार का मुखिया अपनी जिम्मेदारियों से विमुख हो जाता है । उसका असर उसके बेटे पर भी पड़ता है । वह भी घर की जिम्मेदारियों को नहीं समझता। जबकि माँ पूरे परिवार को जोड़ने की कोशिश करती है। इसमें मुख्य भूमिका वरिष्ठ रंगकर्मी उमा झुनझुनवाला की थी । उनकी संवाद अदायगी और देह भाषा ने बलिया के रंगमंच को नयी समझ दी । इसके अलावा इंदीवर प्रधान, हिना परवेज, यामिनी प्रधान ,अमर्त्य भट्टाचार्य , सुवन पार सेन  की भी भूमिका सराहनीय रही।
इस दिन की दूसरी और इस समारोह की अंतिम प्रस्तुति जिले की सुप्रसिद्ध रंग संस्था और मेजबान “संकल्प” की रही। महान लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की अमर कृति “बेटी-वियोग” को संकल्प के रंगकर्मियों ने मंच पर जीवंत कर दिया । नाटक में एक बेटी के दर्द को बहुत ही मार्मिक तरीके से मंच पर प्रस्तुत किया है । यह नाटक उस दौर में लिखा गया था जब धन के अभाव में लोग अपनी बेटियों को बेचते थे। कहना न होगा कि आज भी दहेज और लड़कियों के प्रति भेदभाव से भरे सामाजिक ताने-बाने में यह नाटक उतना ही प्रासंगिक है ।
इस नाटक में सोनी कुमारी ,ट्विंकल गुप्ता , आनंद कुमार चौहान, अर्जुन रावत का, अखिलेश मोर्या के अभिनय को सबने सराहा । इसके साथ पुष्पा, प्रकृति, संस्कृति , शालू, सलोनी,  पुष्पा की भूमिका सराहनीय रही । नाटक को शैलेंद्र मिश्र ने संगीत से संवारा था, जबकि पार्श्व गायन बिट्टू, कृष्ण कुमार का ध्वनि और प्रकाश की व्यवस्था राकेश विक्रम सिंह ने सम्भाली।
नाट्य समारोह के अंतिम दिन बलिया जिले की पांच प्रमुख उभरती हुई प्रतिभाओं को “संकल्प सम्मान” से सम्मानित किया गया । ये पांचों विभूतियां बलिया की रहने वाली हैं और अपने अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं । ये थीं, सुप्रसिद्ध उपन्यासकार श्री सत्य व्यास, युवा कवि अदनान कफील दरवेश, फिल्मी गीतकार डा सागर, समाज सेवी स्मृति सिंह और प्रसिद्ध रंगकर्मी सोनी  । इन्हें रसड़ा के एस डीएम के हाथों सम्मान पत्र , बुके और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया साथ ही साथ बलिया जिले के प्रमुख मीडिया हस्तियों को भी प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया ।
इस नाट्य समारोह में बलिया और उसके आसपास के नागरिक समाज ने उत्साह के साथ भाग लिया । इसमें सुप्रसिद्ध चित्रकार राजेंद्र गर्ग, डॉ अमरनाथ पासवान, प्रोफेसर यशवंत सिंह, श्री राम जी तिवारी ,शालिनी श्रीवास्तव ,डॉ कदम्बिनी सिंह , समीर पांडे ,अजय पांडे ,संतोष सिंह, पंडित ब्रजकिशोर त्रिवेदी, मोहन जी श्रीवास्तव ,शैलेश सिंह,कौशल कुमार उपाध्याय, डॉ  इफ़तेखार खान ,डॉ राजेंद्र भारती, डा० भवतोष पांडेय, भानू प्रकाश सिंह इत्यादि सैकड़ों गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे । आयोजन को पिछले एक महीने से जिन लोगों ने कड़ी मेहनत करके इसे सफल बनाया उसने सोनी ,ट्विंकल गुप्ता, डा० अशोक कंचन जमाल पुरी, अरविंद गुप्ता ,आनंद कुमार चौहान ,अर्जुन कुमार रावत गोविंदा पासवान अखिलेश मौर्या , विशाल, रोहित, अभिषेक, प्रकाश, दीपक, इत्यादि की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण रही।
कार्यक्रम के अंत में संकल्प के सचिव रंगकर्मी आशीष त्रिवेदी ने सभी कलाकारों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगामी दिनों में भी “संकल्प” का यह कारवां आगे बढ़ता रहेगा ।

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