( ‘द हिन्दू’ में यह लेख 16 अगस्त, 2025 को प्रकाशित हुआ है। लेख का हिन्दी अनुवाद दिनेश अस्थाना ने किया है )
स्वतन्त्रता-दिवस के अवसर पर प्रधान-मंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान का खंडन करते हुए कि, अवैध घुसपैठिए देश की जनसांख्यकी के लिए खतरा हैं, भाकपा(माले) महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य कहते हैं कि बिहार में एसआईआर की भरपूर कवायद के बावजूद पूरे राज्य में एक भी अवैध घुसपैठिया नहीं मिला।
भाकपा(माले) महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने बिहार में कराये गए मतदाता-सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर उच्चतम न्यायालय के अन्तरिम-आदेश का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि इस मामले पर भारतीय चुनाव-आयोग(ईसीआई) को अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं और आशा व्यक्त की है कि मतदाता-सूची बनाने में आयोग पारदर्शिता बरतना सुनिश्चित करेगा और मसौदा-सूची में से काटे गए नामों के कारणों के विस्तृत-विवरण से अवगत कराएगा।
स्वतन्त्रता-दिवस के अवसर पर प्रधान-मंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान का खंडन करते हुए कि, अवैध घुसपैठिए देश की जनसांख्यकी के लिए खतरा हैं, भाकपा(माले) महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य कहते हैं कि बिहार में एसआईआर की भरपूर कवायद के बावजूद पूरे राज्य में एक भी अवैध घुसपैठिया नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि “प्रधान-मंत्री मोदी ने स्वतंत्रता-दिवस पर अपना अब तक का सबसे लंबा भाषण दिया, परंतु महत्वपूर्ण विंदु यह है कि स्वतंत्रता-दिवस का अर्थ मात्र विभाजन तक सिमट कर रह गया है। ऐसा लगता है कि सरकार विभाजन के आधे-अधूरे एजेंडे को पूरा करने का प्रयास कर रही है।“
‘जनसांख्यकी-चुनौतियों’ को लेकर 2024 में सरकार द्वारा प्रस्तावित पैनेल को अमली-जामा कभी पहनाया नहीं जा सका
उन्होंने कहा कि जिन 65 लाख लोगों के नाम काटे गए हैं उनमें से कोई विदेशी नागरिक नहीं था। उन्होंने आगे कहा कि “पर एक बार फिर मोदी जी ने अवैध आप्रवासन, घुसपैठ का पूरी तरह से अप्रमाणित झूठा एजेंडा सामने ला दिया है। और यह कि वे हमारी जनसांख्यकी को बदल रहे हैं, सारे रोजगार छीन रहे हैं, जमीन कब्जा कर रहे हैं, महिलाओं से शादी कर रहे हैं और जबरदस्ती धर्म-परिवर्तन करा रहे हैं। यह आरएसएस और भाजपा का पूर्णतया आप्रवास-विरोधी एजेंडा है। इसी एजेंडे के चलते देश का विभाजन हुआ था और संभवतः वे अब दूसरा विभाजन करवाना चाहते हैं।“
बिहार का एसआईआर चुनाव-आयोग की शक्तियों और नागरिकों के मताधिकार के बीच एक युद्ध है। उनका सवाल था कि जब 2011 के बाद कोई जनगणना हुई ही नहीं तो केंद्र ऐसा निष्कर्ष कैसे निकाल सका कि अनेकों विदेशी नागरिक अवैध रूप से भारत में घुस आए हैं। उन्होंने कहा कि “ इससे देश में एक आतंक का वातावरण पैदा हो गया है, इससे असुरक्षा की भावना प्रबल हुई है और जब इसे वर्तमान में चल रहे एसआईआर, पिछले दरवाजे से आई एनआरसी, तथाकथित पुलिस-जांच अभियान, गृह-मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के साथ रख कर देखा जाय तो हमारे समक्ष सामाजिक-विभाजन का और मताधिकारों से वंचित लोगों के एक स्थायी संवर्ग की उत्पत्ति का गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाता है।”

