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अपराधियों की गिरफ्त में बिहार, सरकार नाम की चीज नहीं- भाकपा माले

पटना. भाकपा-माले पोलित ब्यूरो सदस्य रामजी राय ने बर्बर भागलपुर तेजाब कांड के अगले ही दिन गोपालगंज में अपराधियों द्वारा एक आशा कार्यकर्ता पर तेजाब से हमले की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि बिहार आज पूरी तरह अपराधियों की गिरफ्त में है और भाजपा-जदयू की सरकार ने इन अपराधियों के सामने पूरी तरह समर्पण कर दिया है. आज बिहार में सरकार नाम की कोई चीज नहीं रह गई है. ‘सुशासन’ की सरकार का यही वास्तविक चेहरा है।

उन्होंने कहा कि बीती रात भागलपुर में अपराधियों ने घर में घुसकर एक लड़की को तेजाब से नहला दिया। इस मामले की चहुंओर निंदा हो रही है। लेकिन अपराधियों पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। भागलपुर मामले के हुए 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि इसी तरह का दूसरा मामला गोपालगंज से सामने आ गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार गोपालगंज के मीरगंज थाना क्षेत्र के कांधगोपी मध्य विद्यालय तथा जीन बाजार के बीच सुनसान रास्ते पर स्कूटी से जा रही आशा कार्यकर्ता को हेलमेट पहने दो बाइक सवार युवकों ने तेजाब फेंक कर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया।

माले नेता ने कहा कि भागलपुर के अलीगंज में बीती रात इंटर की नाबालिग छात्रा को एसिड से नहला देने की दर्दनाक घटना के खिलाफ पूरे राज्य में आक्रोश है. सभी अपराधियों की अविलम्ब गिरफ्तारी होनी चाहिए. बिहार सरकार का यह दायित्व है कि वह इस तरह की बर्बर घटनाओं पर अविलम्ब रोक लगाए और पीड़िताओं की सुरक्षा व इलाज की गारंटी करे.

माले नेता में विगत 17 अप्रैल को कटिहार शहर के बगल में बिजली मिस्त्री बाबर की हत्या को कानून-व्यवस्था के पूरी तरह फेल होने का उदाहरण बताया है और इस घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. कहा कि यह मोब लिंचिंग की घटना हो सकती है.

आइसा नेता काज़िम इरफनी के नेतृत्व में 7 सदस्यीय जाँच टीम ने मृतक के परिजनों से मिलकर मामले की तहकीकात की। इस मामले में पुलिस प्रशासन की शिथिलता सामने आई है।

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार पिछले 16 अप्रैल को चक्रवाती तूफान के कारण कटिहार में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी. बिजली विभाग के एक मिस्त्री सहित 4 अन्य प्राइवेट पार्टटाइम मिस्त्री भी बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए काम कर रहे थे. अचानक तेज़ रफ़्तार से एक टेम्पो (ऑटोरिक्शा) वहाँ से गुजरा जिसकी चपेट में सरकारी बिजली मिस्त्री आ गए और उनका पैर फ्रैक्चर हो गया. वे जख्मी हो गए.

इसे देख बाबर खान सहित उनके साथियों अब्दुल खालिक, सिरोज (गढ़भेली) मो. जावेद, मो. मुबारक (धुसमर) ने उस ऑटो रिक्शा (ड्राइवर ने शायद शराब पी रखी थी) का पीछा किया. जैसे ही सामने एक गाँव (मधेपुरा गाँव) आया, ऑटो चालक ने अपना ऑटो धीमा कर दिया और वे ऑटो से नीचे आ गए (चूंकि यह उसी ऑटो वाले का गाँव था, लेकिन यह बात बाबर और उनके दोस्तों को पता नहीं था) नीचे आ कर ऑटो वाले ने अपने सभी गाँव वालों को एकजुट कर लिया और उन चार दोस्तों को बुरी तरह पीटने लगे। हालांकि वे लोग वहां से जान बचा कर भागने की कोशिश की लेकिन सामने रेलवे फाटक बंद होने के कारण भाग न सके. बाबर को बुरी तरह से पीट दिया था और अन्ततः उसपर भाला व लाठियां भांजी गई, भाला उसके दिल के निचले हिस्से पर धंस गया था जिससे उनका काफी मात्रा में खून बहने लगा.

उनके दोस्तों ने उसे वहां से अस्पताल ले जाने की भरसक कोशिश की और किसी तरह वहाँ से बाहर निकल गए। वे लोग किसी तरह सदर अस्पताल कटिहार पहुंचे भी गए लेकिन उनका इलाज नहीं हो पाया। उसे किसी बेहतर बड़े अस्पताल ट्रांसफर कर दिया गया था। वे लोग सदर अस्पताल से सीधे कटिहार मेडिकल कॉलेज गए और वहाँ भी वेंटिलेशन की सुविधा उपलब्ध नहीं रहने की बात कहते हुए उसे पूर्णिया मैक्स अस्पताल ले जाने की बात कही गई। प्राथमिक उपचार के लिए एक इंजेक्शन लगाने की जरूरत थी लेकिन नस काफी अंदर सिकुड़ जाने के कारण इंजेक्शन भी नहीं लग सका और आधे घंटे के बाद उसकी मौत हो गई।

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